क्या केपी के सीएम अफरीदी लाहौर में रैली कर शरीफ सरकार को चुनौती देंगे?
सारांश
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लाहौर, 28 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के युवा वजीर-ए-आला सोहेल अफरीदी पाकिस्तानी सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर रहे हैं। वह इस समय लाहौर में हैं और रविवार को वे मीनार-ए-पाकिस्तान में एक विशाल सार्वजनिक रैली का संचालन करेंगे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, उनका लाहौर का चयन देश की सियासत में बदलाव का संकेत है।
केपी से बाहर, वे लाहौर में भी पीटीआई के प्रभाव को दर्शाने की योजना बना रहे हैं। उनका यह दौरा पंजाब में पीटीआई के बढ़ते प्रभाव का एक प्रमुख प्रदर्शन है। पार्टी के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के मुद्दे पर, अफरीदी सत्ताधारी गठबंधन के निशाने पर हैं।
लाहौर और मीनार-ए-पाकिस्तान का चयन क्यों किया गया? इसका उत्तर यह है कि यह भव्य स्मारक उस स्थान का प्रतीक है जहां राजनीतिक संघर्ष सफल होते हैं और क्रांतिकारी विचारों का जन्म होता है। पहले भी कई राजनीतिक पार्टियों ने इस स्थान पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। यह वही स्थल है जहां 1940 में लाहौर प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।
लाहौर में अपनी ताकत दिखाने का समय महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब सत्ताधारी गठबंधन ने दावा किया है कि पंजाब में पार्टी का समर्थन कमजोर हो रहा है। अफरीदी ने अपने तीन दिवसीय लाहौर दौरे के दौरान समर्थकों से कहा कि रैली शाम 6 बजे शुरू होगी।
अफरीदी ने विरोधी राजनीतिक पार्टियों को सीधी चुनौती दी और उन्हें खैबर-पख्तूनख्वा में भी ऐसा ही इवेंट आयोजित करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, “वे कोई भी जगह चुन सकते हैं।”
सीएम अफरीदी ने जेल में बंद पार्टी सदस्यों से मिलने के लिए पंजाब सरकार की आलोचना की और कहा कि ऐसा करना गलत है। उन्होंने पंजाब सरकार पर 'राजनीतिक असहिष्णुता' का आरोप लगाया।
अफरीदी ने कहा कि पीटीआई बातचीत का समर्थन करती है, लेकिन सड़कों पर लामबंदी की तैयारी जारी रहेगी। इस बीच, पुलिस ने अफरीदी के दौरे के दौरान पीटीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
पीटीआई के अधिकारियों को उम्मीद है कि रविवार की मीनार-ए-पाकिस्तान रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।