पाकिस्तान में अहमदिया धार्मिक स्थल ध्वस्त, IHRC ने सिंध प्रशासन की कड़ी निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जमालपुर स्थित एक अहमदिया धार्मिक स्थल की मीनारें स्थानीय अधिकारियों ने कथित तौर पर गिरा दीं और प्रार्थना स्थल को ईंटों से बंद कर दिया — यह कार्रवाई 14 मई को करुंडी क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई। यूके स्थित इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमिटी (IHRC) ने इस घटना को 'राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता' करार देते हुए पाकिस्तान सरकार और सिंध प्रशासन से निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
14 मई को करुंडी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर जमालपुर स्थित अहमदिया धार्मिक स्थल के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शनकारियों ने वहाँ की मीनारें गिराने और प्रार्थना स्थल को बंद करने का दबाव बनाया।
इसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने कथित तौर पर स्थल पर पहुँचकर मीनारें गिरा दीं और प्रार्थना स्थल को ईंटों से बंद कर दिया। इसी दौरान करुंडी में एक अहमदिया व्यक्ति पर हमले की भी जानकारी सामने आई है।
IHRC की प्रतिक्रिया
IHRC ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान में एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जहाँ कट्टरपंथी समूहों और स्थानीय दबाव के कारण अहमदिया समुदाय के धार्मिक स्थलों को बार-बार निशाना बनाया जाता है। संगठन के अनुसार, 'किसी धार्मिक स्थल को नष्ट करना या उसमें बदलाव करना धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है और इससे अहमदिया समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बनता है, जो पहले से ही भेदभाव का सामना कर रहा है।'
संगठन ने यह भी चिंता जताई कि पाकिस्तानी अधिकारी अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा करने के बजाय भीड़ के दबाव में काम करते प्रतीत होते हैं।
अहमदिया समुदाय पर असर
अहमदिया समुदाय पाकिस्तान में दशकों से कानूनी और सामाजिक भेदभाव झेल रहा है। 1974 में संविधान संशोधन के ज़रिये उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित किया गया था और 1984 के अध्यादेश के तहत उनके धार्मिक अभिव्यक्ति पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर लगातार चिंता जताते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
IHRC ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना की निंदा करने और पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देने की अपील की है। संगठन ने पाकिस्तान सरकार और सिंध प्रशासन से माँग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जाँच हो और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
आलोचकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपने भेदभावपूर्ण कानूनों में बदलाव नहीं करता, ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।