CGTN सर्वे: 90.8% का मानना — अमेरिका ईरान युद्ध में रणनीतिक लक्ष्य पाने में विफल रहा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्ति के लिए मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर होने के बाद, चाइना मीडिया ग्रुप के अंतर्गत संचालित CGTN द्वारा वैश्विक नेटिजनों के बीच कराए गए एक सर्वे में 90.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस संघर्ष में अपना निर्धारित रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही। सर्वे के अनुसार, इस मुठभेड़ ने वैश्विक स्तर पर अमेरिका के रणनीतिक प्रभाव में निरंतर गिरावट को उजागर किया है।
सर्वे के मुख्य निष्कर्ष
CGTN के इस सर्वे में शामिल 89.1 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि अल्पकाल में ईरानी सत्ता पलटने का मूल लक्ष्य विफल होने के बाद, संघर्ष के खिंचाव और बाहरी फैलाव के चलते अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने की पहल गंवा दी। सर्वे के अनुसार यह स्थिति अमेरिकी रणनीतिक नियोजन की सीमाओं को दर्शाती है।
93 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि फिलिस्तीन-इज़रायल तथा ईरान प्रश्न पर अमेरिका की बदलती नीतियाँ मध्यपूर्व में तनाव की अचानक वृद्धि का प्रमुख कारण रही हैं। वहीं 93.4 प्रतिशत का मत है कि इस संघर्ष से मध्यपूर्व में अमेरिका का प्रभाव तेज़ी से घटा है।
अमेरिकी रणनीति पर व्यापक असर
सर्वे में 93 प्रतिशत प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका मध्यपूर्व के इस युद्ध में और गहरा उलझता है, तो उसकी समूची मध्यपूर्व रणनीति विफल हो जाएगी। गौरतलब है कि यह सर्वे ऐसे समय आया है जब मध्यपूर्व में कूटनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।
91.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं के अनुसार इस संघर्ष ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके साथ ही 86.2 प्रतिशत का मानना है कि इस मुठभेड़ ने अमेरिका के वैश्विक मित्र देशों की गठबंधन व्यवस्था की कमज़ोरियों को भी उजागर किया है।
अंतरराष्ट्रीय नियम-व्यवस्था पर सवाल
93.2 प्रतिशत प्रतिभागियों का विचार है कि अमेरिका ने जो कथित प्रभुत्ववाद के तर्क के आधार पर सैन्य कार्रवाई छेड़ी, उसने अंतरराष्ट्रीय नियमों की व्यवस्था और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को बड़ा नुकसान पहुँचाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की एकपक्षीय सैन्य कार्रवाइयाँ संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।
सर्वे की पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह सर्वे चाइना मीडिया ग्रुप के अंतर्गत आने वाले CGTN द्वारा कराया गया है, जो चीन का राज्य-समर्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क है। विशेषज्ञ ध्यान दिलाते हैं कि इस सर्वे के स्रोत और उसकी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए इसके निष्कर्षों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान युद्ध विराम के बाद मध्यपूर्व में नई कूटनीतिक पहलें शुरू हो रही हैं।
आगे देखें तो युद्ध समाप्ति के मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर के बाद यह देखना अहम होगा कि मध्यपूर्व में स्थायी शांति की दिशा में कौन-से ठोस कदम उठाए जाते हैं और अमेरिका की क्षेत्रीय भूमिका किस रूप में पुनर्परिभाषित होती है।