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अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने 26 जुलाई को शुरू किया संचालन, 21 देश जुड़े

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अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने 26 जुलाई को शुरू किया संचालन, 21 देश जुड़े

सारांश

दुनिया के पहले अंतर-सरकारी मैंग्रोव संगठन ने 26 जुलाई को औपचारिक संचालन शुरू किया — 21 देश जुड़े। चीन में मैंग्रोव क्षेत्र 44% बढ़कर 31,700 हेक्टेयर पहुँचा। नीला कार्बन व्यापार और पारिस्थितिक निगरानी पर केंद्रित यह पहल वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को नई दिशा दे सकती है।

मुख्य बातें

अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने 26 जुलाई 2025 को औपचारिक रूप से संचालन शुरू किया — यह मैंग्रोव संरक्षण के लिए दुनिया का पहला अंतर-सरकारी संगठन है।
केंद्र में 8 सदस्य देश और 13 हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं, जो एशिया, अफ्रीका और अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैं।
केंद्र संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण, नीला कार्बन व्यापार और पारिस्थितिक निगरानी परियोजनाएँ चलाएगा।
चीन में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़कर 31,700 हेक्टेयर हुआ — इस सदी की शुरुआत की तुलना में 44% अधिक।
कंबोडिया सहित कई देशों ने चीन के संरक्षण मॉडल को अनुकरणीय बताया।

अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने 26 जुलाई 2025 को — मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर — औपचारिक रूप से अपना संचालन शुरू कर दिया। मैंग्रोव संरक्षण और सहयोग के लिए गठित यह दुनिया का पहला अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो अब वैश्विक पहल के स्तर से आगे बढ़कर वास्तविक क्रियान्वयन के चरण में प्रवेश कर चुका है।

संगठन की संरचना और सदस्यता

केंद्र में फिलहाल 8 सदस्य देश और 13 हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं — कुल 21 देश इससे जुड़े हैं। ये देश एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस व्यापक भौगोलिक विस्तार के साथ केंद्र का लक्ष्य है कि मैंग्रोव संरक्षण की दिशा में वैश्विक समन्वय को एक ठोस संस्थागत ढाँचा मिले।

केंद्र की कार्ययोजना

केंद्र के सचिवालय के महासचिव पाओ तामिंग ने कहा, 'हम सदस्य देशों में प्रदर्शन परियोजनाएँ शुरू करेंगे। इनमें मैंग्रोव संरक्षण और बहाली, पारिस्थितिक निगरानी तथा नीला कार्बन व्यापार जैसी परियोजनाएँ शामिल होंगी।' उन्होंने आगे कहा कि इन प्रयासों के ज़रिए दुनिया भर के मैंग्रोव क्षेत्रों वाले देशों को व्यावहारिक और दोहराए जा सकने वाले तकनीकी मॉडल उपलब्ध कराए जाएँगे, साथ ही सभी सदस्य देशों की तकनीकी क्षमता को भी मज़बूत किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में मैंग्रोव वनों का क्षरण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता बन चुका है। मैंग्रोव न केवल तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करते हैं, बल्कि कार्बन अवशोषण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सदस्य देशों की प्रतिक्रिया

कंबोडिया के पर्यावरण मंत्रालय के राष्ट्रीय उद्यान विभाग के आर्द्रभूमि संरक्षण प्रभाग के कार्यालय प्रमुख यांग वीसाल ने कहा, 'चीन ने मैंग्रोव संरक्षण और बहाली के लिए एक प्रभावी और व्यवस्थित योजना तैयार की है, जो इस दिशा में चीनी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चीन के व्यावहारिक अनुभव सीखने योग्य हैं और कंबोडिया सहित कई देश इससे लाभ उठा सकते हैं।'

चीन की मैंग्रोव सफलता

आंकड़ों के अनुसार, चीन में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़कर 31,700 हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जो इस सदी की शुरुआत की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ चीन उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहाँ मैंग्रोव क्षेत्र में निरंतर वृद्धि दर्ज हुई है। गौरतलब है कि मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता, जैव विविधता और नीले कार्बन के माध्यम से कार्बन अवशोषण क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।

आगे क्या होगा

केंद्र के संचालन में आने के बाद संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के ज़रिए वैश्विक मैंग्रोव संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्था वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि इसका सचिवालय चीन में स्थित है और केंद्र की सफलता की कहानी भी मुख्यतः चीन के आँकड़ों पर आधारित है — यह एक संरचनात्मक प्रश्न उठाता है कि क्या यह संस्था वास्तव में स्वतंत्र बहुपक्षीय निकाय के रूप में कार्य करेगी। नीला कार्बन व्यापार की संभावनाएँ आकर्षक हैं, परंतु इसके लिए पारदर्शी सत्यापन तंत्र अनिवार्य है। वैश्विक मैंग्रोव क्षरण की दर को देखते हुए इस केंद्र का समय पर आना ज़रूरी था — असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की होगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र क्या है?
यह मैंग्रोव संरक्षण और सहयोग के लिए गठित दुनिया का पहला अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसने 26 जुलाई 2025 को औपचारिक संचालन शुरू किया। इसमें 8 सदस्य देश और 13 हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
केंद्र में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के कुल 21 देश शामिल हैं — 8 सदस्य देश और 13 हस्ताक्षरकर्ता देश। ये देश दुनिया के प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
केंद्र मैंग्रोव संरक्षण के लिए क्या काम करेगा?
केंद्र संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण, पारिस्थितिक निगरानी और नीला कार्बन व्यापार जैसी परियोजनाएँ चलाएगा। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को व्यावहारिक और दोहराए जा सकने वाले तकनीकी मॉडल उपलब्ध कराना है।
चीन में मैंग्रोव संरक्षण की स्थिति कैसी है?
आंकड़ों के अनुसार, चीन में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़कर 31,700 हेक्टेयर हो गया है, जो इस सदी की शुरुआत की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है। चीन उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहाँ मैंग्रोव क्षेत्र में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
नीला कार्बन व्यापार क्या है और यह मैंग्रोव से कैसे जुड़ा है?
नीला कार्बन उस कार्बन को कहते हैं जिसे तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र — जैसे मैंग्रोव वन — अवशोषित करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र इसी कार्बन अवशोषण क्षमता को बाज़ार तंत्र से जोड़कर संरक्षण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की योजना पर काम करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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