3 अगस्त 2026
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नई दिल्ली में 'एक्वा पैराडिसो' कोरियन कला प्रदर्शनी शुरू, राजदूत ली सियोंग हो बोले — भारत-कोरिया रिश्ते नई ऊंचाई पर

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नई दिल्ली में 'एक्वा पैराडिसो' कोरियन कला प्रदर्शनी शुरू, राजदूत ली सियोंग हो बोले — भारत-कोरिया रिश्ते नई ऊंचाई पर

सारांश

नई दिल्ली में 'एक्वा पैराडिसो' — जल को जीवन और अस्तित्व का प्रतीक बनाकर रची गई यह कोरियन कला प्रदर्शनी महज़ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अप्रैल 2026 की राष्ट्रपति यात्रा के बाद तेज़ी से गहरे हो रहे भारत-कोरिया संबंधों का दृश्य प्रमाण है।

मुख्य बातें

कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में 'एक्वा पैराडिसो' समकालीन कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
प्रदर्शनी 19 अगस्त 2026 तक चलेगी और इसमें कलाकार बू जियुन , क्वोन ह्यीवोन और इको ओरोत की कृतियाँ शामिल हैं।
दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग हो ने उद्घाटन में भाग लिया और अप्रैल 2026 की कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद संबंधों को और मज़बूत बताया।
नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने प्रदर्शनी के 'जल' विषय को भारत के पंचतत्व दर्शन से जोड़ा।
प्रदर्शनी जल संकट और पर्यावरणीय मुद्दों को भी कला के माध्यम से उजागर करती है।

कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में समकालीन कोरियन कला प्रदर्शनी 'एक्वा पैराडिसो' का उद्घाटन किया, जो 19 अगस्त 2026 तक चलेगी। इस प्रदर्शनी में जल को जीवन, स्मृति और मानव-प्रकृति संबंधों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और यह भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच गहरे होते सांस्कृतिक संबंधों की एक सशक्त अभिव्यक्ति मानी जा रही है।

प्रदर्शनी का विषय और स्वरूप

'एक्वा पैराडिसो' — जिसका अर्थ है 'जल ही जन्नत' — में जल को केवल एक भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और अस्तित्व की कहानियों का वाहक बताया गया है। प्रदर्शनी में कोरियाई समकालीन कलाकार बू जियुन, क्वोन ह्यीवोन और इको ओरोत की कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। ये कृतियाँ जल के विभिन्न पहलुओं — उसकी सुंदरता, शक्ति और गहरे अर्थ — को अलग-अलग दृश्य कथाओं के माध्यम से सामने लाती हैं।

कलाकार क्वोन ह्यीवोन ने अपनी कृति के बारे में कहा, 'मेरा काम जल से जुड़ा हुआ है। यह कृति केवल बाहरी जल-पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव शरीर के अंदर मौजूद पानी और शरीर की ऊर्जा से भी जुड़ती है। यह कार्य दर्शकों को शरीर के साथ जुड़ने और उसे समझने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कला और दर्शक के बीच एक सीधा संवाद स्थापित होता है।'

राजदूत की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय संदर्भ

उद्घाटन समारोह में दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग हो विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, 'भारत में यह कोरियन प्रदर्शनी आयोजित होते देख मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज के समय में भारत-कोरिया संबंध बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।' राजदूत ने अप्रैल 2026 में कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके बाद से दोनों देशों के संबंध तेज़ी से मज़बूत हो रहे हैं और सहयोग के नए अवसर उभर रहे हैं।

यह प्रदर्शनी ऐसे समय में आई है जब भारत और दक्षिण कोरिया के बीच न केवल कूटनीतिक, बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी संबंध नई गहराई हासिल कर रहे हैं।

भारतीय कला जगत की प्रतिक्रिया

नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने इस आयोजन को ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए कोरिया के साथ संबंध बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक हैं। कला और संस्कृति हमेशा से देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।' गौतम ने यह भी रेखांकित किया कि प्रदर्शनी का 'जल' विषय भारत की पाँच मूलभूत तत्वों की अवधारणा से गहराई से जुड़ता है और पर्यावरणीय मुद्दों तथा जल संकट जैसे समसामयिक विषयों को भी उजागर करता है।

आम जनता और दर्शकों पर असर

यह प्रदर्शनी 16 जून से 19 अगस्त 2026 तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसका उद्देश्य भारतीय दर्शकों को कोरियाई समकालीन कला की दृष्टि से परिचित कराना और दोनों देशों के बीच जन-स्तर पर सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। गौरतलब है कि कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया नियमित रूप से ऐसे आयोजनों के ज़रिए भारत में कोरियाई संस्कृति, भाषा और कला को लोकप्रिय बनाने का काम करता है।

इस प्रदर्शनी के साथ भारत-कोरिया सांस्कृतिक कूटनीति एक नए अध्याय में प्रवेश करती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सवाल यह है कि क्या इस तरह के आयोजन आम भारतीय दर्शकों तक पहुँचते हैं या केवल कूटनीतिक हलकों में सराहे जाते हैं। जल संकट जैसे गंभीर विषय को कला के ज़रिये उठाना सराहनीय है, लेकिन इसकी व्यापक सामाजिक पहुँच सुनिश्चित करना ही इस प्रदर्शनी की असली सफलता का पैमाना होगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक्वा पैराडिसो' प्रदर्शनी क्या है और यह कहाँ हो रही है?
'एक्वा पैराडिसो' कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया द्वारा आयोजित एक समकालीन कोरियन कला प्रदर्शनी है, जो नई दिल्ली में 16 जून से 19 अगस्त 2026 तक चलेगी। इसमें जल को जीवन, स्मृति और मानव-प्रकृति संबंधों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रदर्शनी में किन कलाकारों की कृतियाँ शामिल हैं?
प्रदर्शनी में कोरियाई समकालीन कलाकार बू जियुन, क्वोन ह्यीवोन और इको ओरोत की कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। ये कलाकार जल के विभिन्न पहलुओं — सुंदरता, शक्ति और गहरे अर्थ — को अलग-अलग दृश्य माध्यमों से सामने लाते हैं।
प्रदर्शनी का भारत-कोरिया संबंधों से क्या जुड़ाव है?
दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग हो ने इस प्रदर्शनी को भारत-कोरिया के मज़बूत होते सांस्कृतिक रिश्तों का प्रमाण बताया। अप्रैल 2026 में कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद से दोनों देशों के सहयोग में तेज़ी आई है और यह प्रदर्शनी उसी का विस्तार मानी जा रही है।
प्रदर्शनी का 'जल' विषय भारतीय संदर्भ में क्यों प्रासंगिक है?
नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम के अनुसार, जल भारत के पाँच मूलभूत तत्वों की अवधारणा से जुड़ा है और सभ्यता के विकास का आधार रहा है। साथ ही, यह प्रदर्शनी जल संकट और पर्यावरणीय मुद्दों को भी कला के माध्यम से उजागर करती है, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
यह प्रदर्शनी कब तक देखी जा सकती है?
'एक्वा पैराडिसो' प्रदर्शनी 16 जून 2026 से 19 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली में आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। यह कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया द्वारा आयोजित है।
राष्ट्र प्रेस
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