नई दिल्ली में 'एक्वा पैराडिसो' कोरियन कला प्रदर्शनी शुरू, राजदूत ली सियोंग हो बोले — भारत-कोरिया रिश्ते नई ऊंचाई पर
सारांश
मुख्य बातें
कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में समकालीन कोरियन कला प्रदर्शनी 'एक्वा पैराडिसो' का उद्घाटन किया, जो 19 अगस्त 2026 तक चलेगी। इस प्रदर्शनी में जल को जीवन, स्मृति और मानव-प्रकृति संबंधों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और यह भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच गहरे होते सांस्कृतिक संबंधों की एक सशक्त अभिव्यक्ति मानी जा रही है।
प्रदर्शनी का विषय और स्वरूप
'एक्वा पैराडिसो' — जिसका अर्थ है 'जल ही जन्नत' — में जल को केवल एक भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और अस्तित्व की कहानियों का वाहक बताया गया है। प्रदर्शनी में कोरियाई समकालीन कलाकार बू जियुन, क्वोन ह्यीवोन और इको ओरोत की कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। ये कृतियाँ जल के विभिन्न पहलुओं — उसकी सुंदरता, शक्ति और गहरे अर्थ — को अलग-अलग दृश्य कथाओं के माध्यम से सामने लाती हैं।
कलाकार क्वोन ह्यीवोन ने अपनी कृति के बारे में कहा, 'मेरा काम जल से जुड़ा हुआ है। यह कृति केवल बाहरी जल-पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव शरीर के अंदर मौजूद पानी और शरीर की ऊर्जा से भी जुड़ती है। यह कार्य दर्शकों को शरीर के साथ जुड़ने और उसे समझने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कला और दर्शक के बीच एक सीधा संवाद स्थापित होता है।'
राजदूत की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय संदर्भ
उद्घाटन समारोह में दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग हो विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, 'भारत में यह कोरियन प्रदर्शनी आयोजित होते देख मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज के समय में भारत-कोरिया संबंध बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।' राजदूत ने अप्रैल 2026 में कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके बाद से दोनों देशों के संबंध तेज़ी से मज़बूत हो रहे हैं और सहयोग के नए अवसर उभर रहे हैं।
यह प्रदर्शनी ऐसे समय में आई है जब भारत और दक्षिण कोरिया के बीच न केवल कूटनीतिक, बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी संबंध नई गहराई हासिल कर रहे हैं।
भारतीय कला जगत की प्रतिक्रिया
नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने इस आयोजन को ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए कोरिया के साथ संबंध बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक हैं। कला और संस्कृति हमेशा से देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।' गौतम ने यह भी रेखांकित किया कि प्रदर्शनी का 'जल' विषय भारत की पाँच मूलभूत तत्वों की अवधारणा से गहराई से जुड़ता है और पर्यावरणीय मुद्दों तथा जल संकट जैसे समसामयिक विषयों को भी उजागर करता है।
आम जनता और दर्शकों पर असर
यह प्रदर्शनी 16 जून से 19 अगस्त 2026 तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसका उद्देश्य भारतीय दर्शकों को कोरियाई समकालीन कला की दृष्टि से परिचित कराना और दोनों देशों के बीच जन-स्तर पर सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। गौरतलब है कि कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया नियमित रूप से ऐसे आयोजनों के ज़रिए भारत में कोरियाई संस्कृति, भाषा और कला को लोकप्रिय बनाने का काम करता है।
इस प्रदर्शनी के साथ भारत-कोरिया सांस्कृतिक कूटनीति एक नए अध्याय में प्रवेश करती दिख रही है।