ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने गुटेरेस से की मुलाकात, अमेरिकी हमलों को बताया 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 29 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की और ईरान के विरुद्ध अमेरिका तथा इजरायल के सैन्य हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया। ईरानी सरकारी मीडिया आईआरएनए के अनुसार, इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और कूटनीतिक समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक के दौरान अराघची ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों को अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कथित उल्लंघनों को लेकर उदासीन नहीं रहना चाहिए।' उन्होंने अमेरिका की कथित गैरकानूनी कार्रवाइयों और धमकियों की निंदा किए जाने की माँग भी रखी।
अराघची ने यह भी रेखांकित किया कि वार्ता के दौरान और उसके बाद भी आक्रामक कार्रवाइयाँ जारी रहीं। इस संदर्भ में उन्होंने ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति अपने संकल्प को दोहराया।
संयुक्त राष्ट्र का रुख
महासचिव गुटेरेस ने बैठक में सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने विवादों के निपटारे के लिए कूटनीति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता भी रेखांकित की और मतभेदों को बातचीत के ज़रिए सुलझाने का आह्वान किया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने संयुक्त राष्ट्र से इन घटनाओं पर अपनी जिम्मेदारी निभाने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध स्पष्ट रुख अपनाने का आग्रह किया।
ट्रंप का खंडन
इसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 'ठोस' कदमों के बदले प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज़ फंड जारी करने को तैयार हैं। ट्रंप ने अपने मंच 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'यह सच नहीं है। मैंने उन्हें कुछ भी ऑफर नहीं किया।'
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इर्द-गिर्द हुई, जब विश्व के प्रमुख नेता और राजनयिक न्यूयॉर्क में एकत्रित थे।
व्यापक संदर्भ
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव का यह सिलसिला नया नहीं है। 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है।
क्या होगा आगे
कूटनीतिक हलकों में यह देखा जा रहा है कि क्या संयुक्त राष्ट्र मंच पर इस तरह की बैठकें किसी ठोस वार्ता की ज़मीन तैयार कर सकती हैं। ट्रंप के खंडन के बाद ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता की संभावनाएँ फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अगली बैठकों पर टिकी हैं।