यूएई में पाकिस्तानियों से भेदभाव: असद कैसर ने संसद में उठाया मुद्दा, भारत-अमेरिका को तरजीह का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के पूर्व अध्यक्ष असद कैसर ने 18 अगस्त 2026 को संसद में यह गंभीर मुद्दा उठाया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पाकिस्तानी नागरिकों के साथ भारतीय और अमेरिकी नागरिकों की तुलना में दोयम दर्जे का व्यवहार किया गया। फ्लाइट रद्द होने की स्थिति में होटल और ठहरने की सुविधा से पाकिस्तानी यात्रियों को कथित तौर पर वंचित रखा गया, जबकि भारतीय और अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को प्राथमिकता दी गई।
संसद में क्या कहा असद कैसर ने
कैसर ने संसद सत्र में कहा, 'जंग शुरू हुई तो हमारे लोगों के साथ सुलूक अच्छा नहीं हुआ। मैंने महसूस किया रवैया मुनासिब नहीं था।' उन्होंने आगे बताया कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद भारतीय और अमेरिकी नागरिकों को होटल में कमरे दिए गए, जबकि पाकिस्तानी यात्रियों को ठहरने की कोई सुविधा नहीं मिली। उन्होंने कहा, 'अनाउंसमेंट हो रही थी कि सिर्फ भारत और अमेरिका के पासपोर्ट वालों को ही जगह मिलेगी।'
डिप्लोमैटिक चैनल से कार्रवाई की माँग
कैसर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वह इस मामले को यूएई के समक्ष औपचारिक रूप से उठाए। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि हमारे पास डिप्लोमैटिक चैनल हैं; उन्हें यह मामला उठाना चाहिए।' कैसर ने यह भी उल्लेख किया कि एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलकर इसी प्रकार के अनुभव साझा किए। उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान पाकिस्तान की सकारात्मक भूमिका का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तानी नागरिक यूएई सरकार का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके साथ हुआ व्यवहार 'इंसानियत के लिहाज से सही नहीं है।'
नेशनल असेंबली स्पीकर का संज्ञान
कैसर के बयान पर नेशनल असेंबली के स्पीकर ने संज्ञान लिया और निर्देश दिया कि इस मुद्दे को यूएई के सामने पूरी गंभीरता के साथ उठाया जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और यूएई के बीच आर्थिक और श्रम-संबंधी रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
यूएई में पाकिस्तानी प्रवासी और नियम की वास्तविकता
यूएई में लगभग 18 लाख पाकिस्तानी निवास करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या निर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्यरत है। गौरतलब है कि यूएई के जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) के पैसेंजर वेलफेयर प्रोग्राम के अनुसार, फ्लाइट रद्द या लंबे समय तक विलंब होने पर सभी यात्रियों को होटल, भोजन और अन्य सुविधाएँ दी जानी चाहिए। किसी यात्री के पासपोर्ट के आधार पर अलग-अलग सुविधा देने का कोई प्रावधान नहीं है — जिससे कैसर के आरोप और अधिक गंभीर हो जाते हैं।
आगे क्या होगा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय पर अब दबाव है कि वह इस मामले को यूएई के साथ द्विपक्षीय स्तर पर उठाए। यदि ये आरोप सत्यापित होते हैं, तो यह यूएई के अपने ही नागरिक उड्डयन नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय की बड़ी संख्या को देखते हुए यह मुद्दा दोनों देशों के श्रम और राजनयिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।