बांग्लादेश में तीन महीने में 162 पत्रकारों पर हमले, 112 घटनाओं में धमकी और उत्पीड़न
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में जुलाई से सितंबर 2026 के बीच मात्र तीन महीनों में 162 पत्रकारों को 112 अलग-अलग घटनाओं में हमलों, जान से मारने की धमकियों और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। मीडिया इनिशिएटिव फॉर डेवलपमेंट (MID) की 3 अक्टूबर 2026 को जारी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य सामने आया है, जो देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर बढ़ते संकट का संकेत देता है।
महीनेवार घटनाक्रम
जुलाई 2026 में देशभर में 39 घटनाओं में 50 पत्रकार प्रभावित हुए। इसके बाद अगस्त में स्थिति और बिगड़ी — 44 घटनाओं में 67 पत्रकार हिंसा और उत्पीड़न के शिकार हुए, जो जुलाई की तुलना में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि थी। MID की रिपोर्ट के अनुसार, तीन महीनों की इस अवधि में अगस्त सबसे भयावह महीना साबित हुआ। सितंबर में 29 घटनाओं में 45 पत्रकारों को उत्पीड़न और हिंसा झेलनी पड़ी।
उत्पीड़न के तरीके और स्वरूप
रिपोर्ट के अनुसार पत्रकारों को डराने-धमकाने के सर्वाधिक प्रचलित तरीकों में जान से मारने की धमकियाँ शीर्ष पर रहीं। जुलाई में दर्ज घटनाओं में 48.7 प्रतिशत मामले जान से मारने की धमकियों से संबंधित थे, जबकि 28.2 प्रतिशत घटनाएँ शारीरिक हमलों की थीं।
इस अवधि के दौरान पत्रकारों को गोलीबारी, उनके घरों और दफ्तरों पर हमले, झूठे मुकदमे और अपहरण जैसी गंभीर घटनाओं का भी सामना करना पड़ा। अगस्त में शारीरिक हमलों का सिलसिला बिना रुके जारी रहा।
सबसे अधिक प्रभावित पत्रकार और क्षेत्र
निशाना बनाए गए 162 पत्रकारों में से 89 दैनिक समाचार पत्रों से, 53 टेलीविजन चैनलों से और 20 ऑनलाइन समाचार माध्यमों से जुड़े थे। प्रिंट मीडिया में काम करने वाले और ग्रामीण व छोटे शहरों में फील्ड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार सर्वाधिक असुरक्षित रहे।
ये घटनाएँ बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में दर्ज की गईं। ढाका, चटगांव, सिराजगंज, बारीसाल और सिलहट डिवीजनों में हमलों और उत्पीड़न की घटनाएँ अपेक्षाकृत अधिक रहीं।
विशेषज्ञ की चेतावनी
MID के कार्यकारी निदेशक राशदुल हसन ने कहा कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, प्रेस की स्वतंत्रता और लोगों के सूचना के अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से हर घटना की निष्पक्ष और त्वरित जाँच करने तथा जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दिलाने की माँग की।
रिपोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि हमलों और धमकियों के बावजूद ठोस कानूनी कार्रवाई का अभाव बना हुआ है, जो उत्पीड़कों को और साहस देता है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद मीडिया पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठन पहले भी बांग्लादेश में पत्रकारों की घटती सुरक्षा पर चिंता जता चुके हैं। MID की यह रिपोर्ट सरकार और नागरिक समाज दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है — यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में स्थिति और विकट हो सकती है।