बांग्लादेश में महिला पत्रकारों को यौन उत्पीड़न का खतरा पुरुषों से 6 गुना अधिक: अंतरराष्ट्रीय अध्ययन
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थाओं द्वारा किए गए एक बहु-देशीय अध्ययन में सामने आया है कि बांग्लादेश में महिला पत्रकारों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करने की संभावना उनके पुरुष सहयोगियों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है। 25 मई 2026 को सामने आए इस अध्ययन के निष्कर्ष बांग्लादेश के मीडिया उद्योग में कार्यस्थल सुरक्षा की गहरी खामियों को उजागर करते हैं। रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि अधिकांश पीड़िताएँ करियर पर पड़ने वाले असर के डर से इन घटनाओं की शिकायत नहीं करतीं।
अध्ययन की पृष्ठभूमि और दायरा
यह अध्ययन WAN-IFRA विमेन इन न्यूज, सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और BBC मीडिया एक्शन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया। इसमें 21 देशों के 2,800 से अधिक मीडिया पेशेवरों का सर्वेक्षण किया गया। बांग्लादेश से 339 मीडिया पेशेवरों को इस सर्वे में शामिल किया गया।
मुख्य आँकड़े और निष्कर्ष
अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश में 60 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं ने मौखिक यौन उत्पीड़न का अनुभव बताया, जबकि पुरुष उत्तरदाताओं में यह आँकड़ा केवल 9 प्रतिशत रहा। कुल मिलाकर 17 प्रतिशत महिला मीडिया पेशेवरों ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की।
ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के मामले में भी असमानता स्पष्ट है — 48 प्रतिशत महिलाओं ने कार्य-संबंधी ऑनलाइन उत्पीड़न झेला, जबकि पुरुषों में यह दर 15 प्रतिशत रही। शारीरिक यौन उत्पीड़न के मामले में 24 प्रतिशत महिलाओं ने और 4 प्रतिशत पुरुषों ने ऐसे अनुभव साझा किए।
शिकायत न करने की संस्कृति
अध्ययन में यह भी उजागर हुआ कि उत्पीड़न की शिकायत न करना एक व्यापक प्रवृत्ति बन चुकी है। मौखिक उत्पीड़न झेलने वाली 52 प्रतिशत महिला पत्रकारों ने इसकी रिपोर्ट नहीं की। जिन मामलों में शिकायत की गई, उनमें से 43 प्रतिशत में नियोक्ताओं ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। करियर पर पड़ने वाले नकारात्मक असर की आशंका इस चुप्पी की सबसे बड़ी वजह बताई गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सिटी, सेंट जॉर्ज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की शोधकर्ता लिंडसे ब्लूमेल ने कहा, 'यौन उत्पीड़न का उन लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है जो इसे महसूस करते हैं और न्यूजरूम में काम करने के आम माहौल पर भी। शोध से पता चलता है कि उत्पीड़न चाहे किसी भी तरह का हो, इसे महसूस करने से कार्य संतुष्टि कम होती है और उद्योग छोड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।'
WAN-IFRA विमेन इन न्यूज की मैनेजिंग डायरेक्टर सुसान माकोरे ने कहा, 'जब अधिकांश यौन उत्पीड़न के मामले रिपोर्ट नहीं होते, तो यह कार्यस्थल संस्कृति, भरोसे और जवाबदेही की गहरी नाकामी का संकेत है। मीडिया में यौन उत्पीड़न कोई अकेला कार्यस्थल का मुद्दा नहीं है; यह एक संरचनात्मक बाधा है जो यह तय करती है कि पत्रकारिता में कौन हिस्सा लेने, बने रहने और नेतृत्व करने में सुरक्षित महसूस करता है।'
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
वैश्विक स्तर पर देखें तो यौन उत्पीड़न की दरें अफ्रीका में सबसे अधिक 33 प्रतिशत रहीं, इसके बाद अरब क्षेत्र में 31 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 19 प्रतिशत दर्ज की गईं। यूक्रेन में यह दर 12 प्रतिशत रही। बांग्लादेश के आँकड़े इस क्षेत्रीय औसत से काफी ऊपर हैं, जो देश में तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की ज़रूरत को रेखांकित करते हैं।