बांग्लादेश: विवादास्पद वन विकास परियोजना पर आदिवासी और कैथोलिक नेताओं का आंदोलन की चेतावनी

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बांग्लादेश: विवादास्पद वन विकास परियोजना पर आदिवासी और कैथोलिक नेताओं का आंदोलन की चेतावनी

सारांश

बांग्लादेश में आदिवासी और कैथोलिक नेताओं ने विवादित वन विकास परियोजना के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।

Key Takeaways

  • आदिवासी और कैथोलिक नेता विवादित वन विकास परियोजना के खिलाफ हैं।
  • सरकार को चेतावनी दी गई है कि इसे वापस लिया जाए।
  • यह परियोजना स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर आर्थिक खतरा है।
  • 2004 में इसी परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिंसा हुई थी।
  • आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता है।

वॉशिंगटन, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश के मध्य क्षेत्र में बसे विभिन्न आदिवासी और कैथोलिक नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि अगर विवादित वन विकास परियोजना को वापस नहीं लिया गया, तो वे बड़ा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

गेरो और कोच आदिवासी समुदायों का कहना है कि तांगाइल जिले के माधुपुर वन क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना, जिसमें कृत्रिम झील और इको-पार्क बनाने की योजना शामिल है, उनके पारंपरिक भूमि से उन्हें बेदखल करने का एक प्रयास है।

अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘इटरनल वर्ड टेलीविजन नेटवर्क’ की रिपोर्ट के अनुसार, 6 मार्च को माधुपुर में आयोजित एक विरोध रैली में बांग्लादेश इंडिजिनस यूथ फोरम के अध्यक्ष टोनी चिरान ने सैकड़ों छात्रों और समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आदिवासियों की कृषि भूमि छीन लेगी, प्राकृतिक वन को नष्ट करेगी और उनकी आजीविका को खतरे में डाल देगी।

चिरान ने कहा, “सरकार विकास के नाम पर जो कर रही है, वह असली विकास नहीं है, बल्कि गेरो और कोच आदिवासियों को इस क्षेत्र से हटाने की एक साजिश है।”

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 17.8 करोड़ की जनसंख्या वाले बांग्लादेश में करीब 4 लाख कैथोलिक हैं, जिनमें से आधे से अधिक आदिवासी समुदायों से आते हैं।

यह भी बताया गया कि सरकार ने सबसे पहले साल 2000 में माधुपुर वन में कृत्रिम झील और इको-पार्क की योजना प्रस्तावित की थी। 2004 में इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में एक गेरो व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे, जिसके बाद इस परियोजना को रोकना पड़ा। हालाँकि, 2026 में इसे फिर से शुरू किया गया है और खुदाई का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

आदिवासी नेताओं का कहना है कि यह परियोजना लंबे समय से उन्हें उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित करने की रणनीति का हिस्सा है।

गेरो इंडिजिनस स्टूडेंट यूनियन के सचिव जनोकी चिसिम ने कहा कि यह परियोजना न केवल जंगल के लिए बल्कि उससे जुड़े लोगों के लिए भी अन्याय है। उन्होंने कहा, “जंगल को उसके मूल स्वरूप में रहने दिया जाए। गेरो और कोच समुदाय सदियों से यहाँ निवास कर रहे हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

Point of View

NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश में यह विवादित वन परियोजना क्या है?
यह परियोजना माधुपुर वन क्षेत्र में कृत्रिम झील और इको-पार्क बनाने की योजना है, जिसे आदिवासी समुदायों ने अपने अधिकारों का हनन मानते हुए विरोध किया है।
आदिवासी नेताओं ने किस प्रकार की चेतावनी दी है?
आदिवासी और कैथोलिक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस परियोजना को वापस नहीं लिया, तो वे बड़ा आंदोलन प्रारंभ करेंगे।
इस परियोजना का स्थानीय समुदायों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह परियोजना स्थानीय आदिवासियों की कृषि भूमि छीन लेगी, प्राकृतिक वन को नष्ट करेगी और उनकी आजीविका को खतरे में डाल देगी।
क्या इस परियोजना के खिलाफ पहले भी विरोध हुआ है?
हाँ, 2004 में इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें एक गेरो व्यक्ति की मौत हो गई थी।
आदिवासी समुदायों की संख्या कितनी है?
बांग्लादेश में लगभग 4 लाख कैथोलिक हैं, जिनमें से आधे से अधिक आदिवासी समुदायों से आते हैं।
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