2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के 50 साल: पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर माफी से बचने के आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के 50 साल: पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर माफी से बचने के आरोप

सारांश

बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के 50 साल बाद भी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर युद्ध अपराधों के आरोप हैं। क्या वे अपनी जिम्मेदारी से बचते रहेंगे?

मुख्य बातें

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के 50 वर्ष पूरे हो गए हैं।
पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर माफी से बचने के आरोप।
जमात ने अपने अतीत का सामना करने के बजाय छवि बदलने की कोशिश की है।
रिपोर्ट ने सत्यता को छुपाने का आरोप लगाया है।
पाकिस्तान को अस्पष्ट बयानों को बंद करना चाहिए।

ढाका, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के पांच दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर युद्ध अपराधों के लिए स्पष्ट और बिना शर्त माफी से बचने के आरोप लगाए गए हैं।

‘टाइम्स ऑफ बांग्लादेश’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल एक ऐतिहासिक विफलता नहीं है, बल्कि सच्चाई को छिपाने का एक सुनियोजित प्रयास है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लंबे समय से “माफी” की जगह “खेद” जैसे शब्दों का उपयोग कर जिम्मेदारी से बचने की रणनीति अपनाता आया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि “खेद” व्यक्त करना आसान होता है, क्योंकि इससे जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना दुख व्यक्त किया जा सकता है और ‘नरसंहार’ जैसे गंभीर शब्दों से बचा जा सकता है। इसे “योजनाबद्ध अस्पष्टता” बताया गया है।

जमात-ए-इस्लामी की भूमिका को और अधिक गंभीर बताते हुए कहा गया है कि यह कोई बाहरी देश नहीं, बल्कि बांग्लादेश के भीतर सक्रिय एक राजनीतिक दल है, जिसने 1971 में न केवल स्वतंत्रता का विरोध किया बल्कि पाकिस्तानी सैन्य शासन का समर्थन किया और नागरिकों पर हुए अत्याचारों में भाग लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने अपने अतीत का सामना करने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि को बदलने की रणनीति अपनाई है। उनके बयान ऐसे होते हैं जो माफी जैसे प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में यह जिम्मेदारी से बचने का प्रयास होते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में ढाका स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जमात द्वारा दी गई श्रद्धांजलि “सच्ची श्रद्धांजलि” नहीं बल्कि “प्रतीकात्मक दिखावा” है, क्योंकि वह इतिहास में उस समय गलत पक्ष में थी जब ये शहीद हुए थे।

रिपोर्ट के अंत में कहा गया कि पाकिस्तान को अस्पष्ट बयानों के पीछे छिपना बंद करना चाहिए और जमात-ए-इस्लामी को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उनके सभी बयान और कदम सिर्फ दिखावटी ही माने जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम कब हुआ?
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 1971 में हुआ था।
जमात-ए-इस्लामी का मुक्ति संग्राम में क्या रोल था?
जमात-ए-इस्लामी ने स्वतंत्रता का विरोध किया और पाकिस्तानी सैन्य शासन का समर्थन किया।
पाकिस्तान ने माफी क्यों नहीं मांगी?
पाकिस्तान ने माफी की बजाय 'खेद' जैसे शब्दों का उपयोग करके जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है।
क्या जमात-ए-इस्लामी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगी?
रिपोर्ट के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने अपने अतीत का सामना करने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि बदलने की रणनीति अपनाई है।
राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जमात का श्रद्धांजलि क्या है?
जमात द्वारा दी गई श्रद्धांजलि को 'प्रतीकात्मक दिखावा' माना गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले