बांग्लादेश में खसरे से 560 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 1,056 नए मामले; ईद पर फैलाव का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, 27 मई 2026 की सुबह तक पाँच और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई, जिससे 15 मार्च 2026 से अब तक कुल मृतक संख्या 560 हो गई है। इनमें से 88 मौतें सीधे खसरे से और 472 मौतें खसरे जैसे लक्षणों के कारण हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
डीजीएचएस के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,056 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे 15 मार्च 2026 से दर्ज कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 67,079 तक पहुँच गई है। इसी अवधि में खसरे के 62 पुष्ट मामले भी सामने आए।
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, ढाका डिवीजन में सर्वाधिक 2 बच्चों की मौत दर्ज की गई। गौरतलब है कि इस महीने लगभग हर दिन 1,000 से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं — केवल 9, 16 और 23 मई को यह आंकड़ा इससे कम रहा।
टीकाकरण अभियान और मौजूदा स्थिति
सरकार की विशेष खसरा-रूबेला टीकाकरण मुहिम का पहला चरण 20 मई 2026 को पूरा हो चुका है। स्वास्थ्य मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने कहा कि टीकाकरण अभियान के प्रभाव से आने वाले कुछ हफ्तों में मरीजों की संख्या में गिरावट आने की उम्मीद है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैक्सीन संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम करती है, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।
ईद पर संक्रमण फैलाव की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ईद की छुट्टियों के दौरान जमावड़े, लंबी यात्राओं और रिश्तेदारों से मुलाकात के कारण संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है। उन्होंने छोटे बच्चों वाले परिवारों को अनावश्यक यात्रा और भीड़भाड़ से बचने की सलाह दी है।
संक्रामक रोग अस्पताल की निदेशक डॉ. एफए असमा खानम ने कहा, 'मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोगों के लिए जहाँ हैं, वहीं रहना बेहतर होगा और उन्हें बेवजह आवाजाही कम करनी चाहिए।' स्वास्थ्य मंत्री हुसैन ने भी अपील की कि संक्रमित या हाल ही में ठीक हुए बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर न ले जाया जाए।
आम जनता पर असर
डॉक्टरों का कहना है कि गर्म मौसम में यह वायरस और तेज़ी से फैलता है, क्योंकि दूरदराज़ के इलाकों में चिकित्सा सुविधाएँ अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान बच्चों के बीमार पड़ने का जोखिम अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य तंत्र पहले से ही दबाव में है।
आगे क्या
स्वास्थ्य मंत्रालय को उम्मीद है कि टीकाकरण अभियान के असर से आने वाले हफ्तों में मामलों में कमी आएगी। फिलहाल सावधानी, सामाजिक दूरी और जागरूकता को ही सबसे प्रभावी उपाय बताया जा रहा है।