12 जुलाई 2026
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बांग्लादेश में खसरे से 560 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 1,056 नए मामले; ईद पर फैलाव का खतरा

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बांग्लादेश में खसरे से 560 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 1,056 नए मामले; ईद पर फैलाव का खतरा

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 560 बच्चों की जान ले चुका है और रोज़ाना 1,000 से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। ईद की भीड़ और यात्रा के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण और तेज़ी से फैलने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

15 मार्च 2026 से अब तक बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से 560 बच्चों की मौत हो चुकी है।
पिछले 24 घंटों में 1,056 नए संदिग्ध मामले, कुल संदिग्ध मामले 67,079 तक पहुँचे।
88 मौतें सीधे खसरे से और 472 खसरे जैसे लक्षणों के कारण दर्ज।
ढाका डिवीजन में सर्वाधिक मौतें; सरकारी खसरा-रूबेला टीकाकरण मुहिम का पहला चरण 20 मई को पूरा।
स्वास्थ्य मंत्री सखावत हुसैन और डॉक्टरों ने ईद के दौरान भीड़भाड़ से बचने की अपील की।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, 27 मई 2026 की सुबह तक पाँच और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई, जिससे 15 मार्च 2026 से अब तक कुल मृतक संख्या 560 हो गई है। इनमें से 88 मौतें सीधे खसरे से और 472 मौतें खसरे जैसे लक्षणों के कारण हुई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

डीजीएचएस के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,056 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे 15 मार्च 2026 से दर्ज कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 67,079 तक पहुँच गई है। इसी अवधि में खसरे के 62 पुष्ट मामले भी सामने आए।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, ढाका डिवीजन में सर्वाधिक 2 बच्चों की मौत दर्ज की गई। गौरतलब है कि इस महीने लगभग हर दिन 1,000 से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं — केवल 9, 16 और 23 मई को यह आंकड़ा इससे कम रहा।

टीकाकरण अभियान और मौजूदा स्थिति

सरकार की विशेष खसरा-रूबेला टीकाकरण मुहिम का पहला चरण 20 मई 2026 को पूरा हो चुका है। स्वास्थ्य मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने कहा कि टीकाकरण अभियान के प्रभाव से आने वाले कुछ हफ्तों में मरीजों की संख्या में गिरावट आने की उम्मीद है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैक्सीन संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम करती है, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।

ईद पर संक्रमण फैलाव की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ईद की छुट्टियों के दौरान जमावड़े, लंबी यात्राओं और रिश्तेदारों से मुलाकात के कारण संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है। उन्होंने छोटे बच्चों वाले परिवारों को अनावश्यक यात्रा और भीड़भाड़ से बचने की सलाह दी है।

संक्रामक रोग अस्पताल की निदेशक डॉ. एफए असमा खानम ने कहा, 'मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोगों के लिए जहाँ हैं, वहीं रहना बेहतर होगा और उन्हें बेवजह आवाजाही कम करनी चाहिए।' स्वास्थ्य मंत्री हुसैन ने भी अपील की कि संक्रमित या हाल ही में ठीक हुए बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर न ले जाया जाए।

आम जनता पर असर

डॉक्टरों का कहना है कि गर्म मौसम में यह वायरस और तेज़ी से फैलता है, क्योंकि दूरदराज़ के इलाकों में चिकित्सा सुविधाएँ अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान बच्चों के बीमार पड़ने का जोखिम अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य तंत्र पहले से ही दबाव में है।

आगे क्या

स्वास्थ्य मंत्रालय को उम्मीद है कि टीकाकरण अभियान के असर से आने वाले हफ्तों में मामलों में कमी आएगी। फिलहाल सावधानी, सामाजिक दूरी और जागरूकता को ही सबसे प्रभावी उपाय बताया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितने बच्चों की मौत हुई है?
डीजीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से 27 मई 2026 तक कुल 560 बच्चों की मौत हुई है। इनमें 88 मौतें सीधे खसरे से और 472 खसरे जैसे लक्षणों के कारण हुई हैं।
बांग्लादेश में खसरे के कुल कितने मामले सामने आए हैं?
15 मार्च 2026 से अब तक कुल 67,079 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। केवल पिछले 24 घंटों में 1,056 नए संदिग्ध और 62 पुष्ट मामले सामने आए।
बांग्लादेश सरकार ने खसरे से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने एक विशेष खसरा-रूबेला टीकाकरण मुहिम चलाई, जिसका पहला चरण 20 मई 2026 को पूरा हुआ। स्वास्थ्य मंत्री सखावत हुसैन के अनुसार, आने वाले हफ्तों में मामलों में गिरावट की उम्मीद है।
ईद के दौरान खसरे का खतरा क्यों बढ़ सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईद की भीड़, लंबी यात्राएँ और रिश्तेदारों से मुलाकात संक्रमण को तेज़ी से फैलाने में सहायक हो सकते हैं। संक्रामक रोग अस्पताल की निदेशक डॉ. एफए असमा खानम ने लोगों से अनावश्यक आवाजाही कम करने की अपील की है।
क्या खसरे की वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है?
स्वास्थ्य मंत्री हुसैन के अनुसार, वैक्सीन संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम करती है, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। इसलिए टीकाकरण के साथ-साथ सावधानी और सामाजिक दूरी भी ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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