बांग्लादेश में खसरे से 844 मौतें: 24 घंटे में 4 और बच्चों की जान गई, 1.30 लाख संदिग्ध मामले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 2 अगस्त 2026 को भी जारी रहा, जब रविवार सुबह 8 बजे तक के पिछले 24 घंटों में खसरा जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष देश में खसरे से संबंधित पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या अब 844 हो गई है — और संक्रमण अभी भी नियंत्रण में नहीं आया है।
ताज़ा आंकड़े: मौतें और मामले
डीजीएचएस के अनुसार, ताज़ा चारों मौतें संदिग्ध खसरा श्रेणी में दर्ज की गई हैं। अब तक खसरा जैसे लक्षणों से हुई कुल मौतें 748 हो गई हैं, जबकि लैब परीक्षण से पुष्ट मौतों की संख्या 96 पर स्थिर है।
पिछले 24 घंटों में देशभर से 1,022 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे इस वर्ष संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,30,083 पहुँच गई। इसी अवधि में लैब-पुष्ट नए मामलों की संख्या 115 रही, और अब तक कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या 16,295 हो गई है।
अस्पताल में भर्ती और उपचार की स्थिति
डीजीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक 1,12,620 संदिग्ध खसरा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 1,08,283 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि शेष का इलाज अभी जारी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी, परीक्षण और टीकाकरण अभियान को तेज किया जा रहा है। बावजूद इसके, लगातार सामने आ रहे नए मामले यह संकेत दे रहे हैं कि प्रकोप अभी पूरी तरह काबू में नहीं है।
टीकाकरण की खामियाँ: संकट की जड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकोप टीकाकरण कवरेज में वर्षों से चली आ रही कमज़ोरियों का परिणाम है। खसरे के प्रकोप को रोकने के लिए पहली और दूसरी दोनों खुराकों में 95 प्रतिशत कवरेज आवश्यक मानी जाती है — जो बांग्लादेश कभी हासिल नहीं कर सका।
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर लगभग 57 प्रतिशत रह गया। गौरतलब है कि सरकारी प्रशासनिक आंकड़ों में कवरेज 100 प्रतिशत से अधिक दर्शाया जाता रहा, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के अनुमान बताते हैं कि 2010 से अब तक बांग्लादेश में खसरा टीकाकरण कवरेज 93 से 96 प्रतिशत के बीच ही रहा है।
डेटा की विफलता: चेतावनी जो अनसुनी रह गई
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी और अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के बीच यह अंतर पहले से ही एक चेतावनी संकेत था। रिपोर्टों में कहा गया है कि 'इन आंकड़ों में अंतर पहले से ही एक चेतावनी संकेत था, लेकिन समय रहते इसे पहचानने और संभावित संकट का अनुमान लगाने में विफलता रही।'
यह ऐसे समय में आया है जब टीकाकरण कवरेज, मौसमी बदलाव और संक्रमण के पुराने पैटर्न पर आधारित सांख्यिकीय मॉडल के ज़रिए अधिकांश खसरा प्रकोपों का पहले ही अनुमान लगाया जा सकता है। गुणवत्तापूर्ण डेटा को किसी भी प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की बुनियाद माना जाता है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीकाकरण अभियान में तेज़ी का संकेत दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ज़मीनी स्तर पर कवरेज में वास्तविक सुधार नहीं होता, नए मामलों का सिलसिला जारी रह सकता है। बांग्लादेश में इस प्रकोप की दिशा आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।