बांग्लादेश में खसरे से 922 बच्चों की मौत, मंत्री बोले — नियंत्रण में दो से तीन महीने लगेंगे
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से इस वर्ष अब तक 922 बच्चों की मौत हो चुकी है और यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एम. ए. मुहित ने बुधवार, 19 अगस्त को स्पष्ट किया कि इस प्रकोप पर काबू पाने में कम से कम दो से तीन महीने और लग सकते हैं। उन्होंने मौजूदा संकट के लिए पिछली सरकारों की नीतियों और स्वास्थ्य तंत्र में वर्षों से चले आ रहे कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।
मुख्य घटनाक्रम
ढाका स्थित बांग्लादेश शिशु अस्पताल और संस्थान के ऑडिटोरियम में खसरे पर केंद्रित एक शोध-बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य मंत्री मुहित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा, "हमें इस दौरान काम करना होगा, मौतों की संख्या कम करनी होगी और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।" बुधवार सुबह 8 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में चार और बच्चों की मौत हुई, जिससे कुल संख्या 922 तक पहुँच गई।
स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियाँ
राज्य मंत्री मुहित ने कहा, "यह उम्मीद करना अव्यावहारिक होगा कि लंबे समय से चली आ रही समस्या को एक दिन या अगले हफ्ते में हल किया जा सकता है।" उन्होंने बताया कि देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर है, जो वर्षों से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और लापरवाही की मार झेल रहा है। निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों के बड़े नेटवर्क में भी गुणवत्ता नियंत्रण और मुनाफे से जुड़ी चिंताएँ बनी हुई हैं।
शोध के अहम निष्कर्ष
बैठक में प्रस्तुत शोध के अनुसार, खसरे के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले 43 प्रतिशत बच्चे तीन से नौ महीने की उम्र के थे। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 38 प्रतिशत बच्चों को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध नहीं मिला था। चिंताजनक बात यह है कि खसरे से जान गँवाने वाले बच्चों में यह आँकड़ा 82 प्रतिशत था — जो स्तनपान और शिशु मृत्यु दर के बीच गहरे संबंध को उजागर करता है।
सरकार की आगामी योजनाएँ
राज्य मंत्री ने बताया कि मौजूदा सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने के लिए सरकार जल्द ही 5,000 नए डॉक्टर, 1,000 नर्स और 1,00,000 फील्ड-स्तरीय कार्यकर्ता भर्ती करेगी। यह कदम प्रकोप से प्रभावित ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि स्तनपान दर में सुधार, टीकाकरण अभियान की गति और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता में वृद्धि — ये तीनों मिलकर ही इस संकट से उबरने की राह खोल सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल से गुज़र रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ा है।