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बांग्लादेश में खसरे से 922 बच्चों की मौत, मंत्री बोले — नियंत्रण में दो से तीन महीने लगेंगे

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बांग्लादेश में खसरे से 922 बच्चों की मौत, मंत्री बोले — नियंत्रण में दो से तीन महीने लगेंगे

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — इस साल 922 बच्चों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री ने माना कि राहत मिलने में दो से तीन महीने और लगेंगे। शोध बताता है कि मृत बच्चों में 82% को जन्म के बाद स्तनपान नहीं मिला था।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में 19 अगस्त 2025 तक खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से 922 बच्चों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री एम.
मुहित ने कहा — प्रकोप नियंत्रण में दो से तीन महीने लग सकते हैं।
शोध के अनुसार, खसरे से मरने वाले 82% बच्चों को जीवन के पहले छह महीनों में स्तनपान नहीं मिला था।
अस्पताल में भर्ती 43% बच्चे तीन से नौ महीने की उम्र के थे।
सरकार 5,000 डॉक्टर , 1,000 नर्स और 1,00,000 फील्ड वर्कर भर्ती करने की योजना बना रही है।
देश की 80% आबादी सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर है, जो वर्षों से कुप्रबंधन का शिकार है।

बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से इस वर्ष अब तक 922 बच्चों की मौत हो चुकी है और यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एम. ए. मुहित ने बुधवार, 19 अगस्त को स्पष्ट किया कि इस प्रकोप पर काबू पाने में कम से कम दो से तीन महीने और लग सकते हैं। उन्होंने मौजूदा संकट के लिए पिछली सरकारों की नीतियों और स्वास्थ्य तंत्र में वर्षों से चले आ रहे कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।

मुख्य घटनाक्रम

ढाका स्थित बांग्लादेश शिशु अस्पताल और संस्थान के ऑडिटोरियम में खसरे पर केंद्रित एक शोध-बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य मंत्री मुहित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा, "हमें इस दौरान काम करना होगा, मौतों की संख्या कम करनी होगी और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।" बुधवार सुबह 8 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में चार और बच्चों की मौत हुई, जिससे कुल संख्या 922 तक पहुँच गई।

स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियाँ

राज्य मंत्री मुहित ने कहा, "यह उम्मीद करना अव्यावहारिक होगा कि लंबे समय से चली आ रही समस्या को एक दिन या अगले हफ्ते में हल किया जा सकता है।" उन्होंने बताया कि देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर है, जो वर्षों से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और लापरवाही की मार झेल रहा है। निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों के बड़े नेटवर्क में भी गुणवत्ता नियंत्रण और मुनाफे से जुड़ी चिंताएँ बनी हुई हैं।

शोध के अहम निष्कर्ष

बैठक में प्रस्तुत शोध के अनुसार, खसरे के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले 43 प्रतिशत बच्चे तीन से नौ महीने की उम्र के थे। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 38 प्रतिशत बच्चों को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध नहीं मिला था। चिंताजनक बात यह है कि खसरे से जान गँवाने वाले बच्चों में यह आँकड़ा 82 प्रतिशत था — जो स्तनपान और शिशु मृत्यु दर के बीच गहरे संबंध को उजागर करता है।

सरकार की आगामी योजनाएँ

राज्य मंत्री ने बताया कि मौजूदा सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने के लिए सरकार जल्द ही 5,000 नए डॉक्टर, 1,000 नर्स और 1,00,000 फील्ड-स्तरीय कार्यकर्ता भर्ती करेगी। यह कदम प्रकोप से प्रभावित ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि स्तनपान दर में सुधार, टीकाकरण अभियान की गति और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता में वृद्धि — ये तीनों मिलकर ही इस संकट से उबरने की राह खोल सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल से गुज़र रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मातृ स्वास्थ्य और ग्रामीण जागरूकता की एक साथ हुई विफलता का प्रमाण है। पिछली सरकारों पर दोषारोपण राजनीतिक दृष्टि से सुविधाजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि नई भर्तियों का यह वादा कितनी तेजी से ज़मीन पर उतरेगा — क्योंकि खसरे का वायरस राजनीतिक समयसीमा नहीं मानता।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से कितने बच्चों की मौत हुई है?
19 अगस्त 2025 तक बांग्लादेश में खसरे की पुष्टि और खसरे जैसे लक्षणों से कुल 922 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में चार और बच्चों की जान गई, जिससे यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप कब तक नियंत्रण में आएगा?
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एम. ए. मुहित के अनुसार, खसरे को काबू में लाने में कम से कम दो से तीन महीने और लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान एक-दो दिन में संभव नहीं है।
खसरे से मरने वाले बच्चों में स्तनपान का क्या संबंध पाया गया?
बैठक में प्रस्तुत शोध के अनुसार, खसरे से मरने वाले 82% बच्चों को जीवन के पहले छह महीनों में केवल माँ का दूध नहीं मिला था। यह आँकड़ा स्तनपान और शिशु मृत्यु दर के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
बांग्लादेश सरकार खसरे के संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार जल्द ही 5,000 नए डॉक्टर, 1,000 नर्स और 1,00,000 फील्ड-स्तरीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता भर्ती करने की योजना बना रही है। इसके अलावा बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी ऐलान किया गया है।
बांग्लादेश का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र इतना कमज़ोर क्यों है?
मंत्री मुहित के अनुसार, देश की लगभग 80% आबादी सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर निर्भर है, जो वर्षों से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और लापरवाही का शिकार रहा है। निजी अस्पतालों में भी गुणवत्ता नियंत्रण की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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