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मोहन भागवत का न्यूयॉर्क संबोधन आरएसएस का असली संदेश अमेरिकियों तक पहुंचाने का मौका: मैरी मिलबेन

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मोहन भागवत का न्यूयॉर्क संबोधन आरएसएस का असली संदेश अमेरिकियों तक पहुंचाने का मौका: मैरी मिलबेन

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का 29 अगस्त का न्यूयॉर्क संबोधन विवादों के बीच चर्चा में है। अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने इसे संगठन का असली संदेश अमेरिकी जनता तक पहुंचाने का सुनहरा मौका बताया और न्यूयॉर्क मेयर ममदानी की आलोचनाओं को कट्टर विचारधारा से प्रेरित करार दिया।

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में एकता और आपसी जुड़ाव विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने इस संबोधन को विवादों से परे जाकर आरएसएस का सकारात्मक संदेश अमेरिकी जनता तक पहुंचाने का अवसर बताया।
मिलबेन ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय से बाहर अधिकांश अमेरिकी आरएसएस के बारे में बहुत कम जानते हैं।
न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणियों की मिलबेन ने आलोचना की और उन्हें डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका की कट्टर विचारधारा से प्रभावित बताया।
मिलबेन ने आयोजकों से अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों को भी कार्यक्रम में शामिल करने की अपील की।
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी; मोहन भागवत 2009 से सरसंघचालक हैं।

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में प्रस्तावित संबोधन विवादों की परछाईं से निकलकर संगठन के वास्तविक कार्यों और संदेश को सीधे अमेरिकी जनता तक पहुंचाने का एक दुर्लभ अवसर है। मिलबेन ने यह भी कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय से बाहर अधिकांश अमेरिकी नागरिक आरएसएस के बारे में लगभग कुछ नहीं जानते।

स्वागत और संवाद की अपील

मिलबेन ने कहा, 'सबसे पहले मैं आरएसएस प्रमुख का अमेरिका में स्वागत करती हूं। मुझे लगता है कि जब ऐसे विवाद शुरू होते हैं तो हम किसी का अपने देश में स्वागत करने की मूल भावना को भूल जाते हैं।' उनका कहना था कि भागवत और संगठन के अन्य नेताओं को इस कार्यक्रम का उपयोग आज के संदर्भ में आरएसएस के संदेश को स्पष्ट करने के लिए करना चाहिए।

29 अगस्त को आयोजित यह कार्यक्रम एकता और आपसी जुड़ाव के विषय पर केंद्रित है, लेकिन इसे लेकर न्यूयॉर्क में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। मिलबेन ने आयोजकों से अपील की कि यदि कार्यक्रम का विषय एकता और समरसता है, तो अन्य धर्मों और समुदायों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाए।

अमेरिकी जनता में आरएसएस की पहचान

मिलबेन ने रेखांकित किया कि भारतीय प्रवासी समुदाय से बाहर अधिकांश अमेरिकी आरएसएस के बारे में बहुत कम जानते हैं। उनके अनुसार, न्यूयॉर्क की सड़कों पर किसी आम अमेरिकी से पूछें तो शायद उसे यह भी पता न हो कि आरएसएस क्या है। उन्होंने माना कि संगठन अतीत में कुछ विवादों का हिस्सा रहा है, लेकिन उनका जोर इस बात पर था कि भागवत इस मंच का उपयोग संगठन के सकारात्मक पहलुओं — विशेष रूप से हिंदू समुदाय के समर्थन से जुड़े कार्यों — को उजागर करने के लिए करें।

न्यूयॉर्क मेयर की टिप्पणियों पर आपत्ति

मिलबेन ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की भागवत की यात्रा को लेकर की गई टिप्पणियों की आलोचना की। उनका कहना था कि ममदानी का रुख डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका से उनकी निकटता से प्रभावित दिखता है, जिसे उन्होंने एक कट्टर विचारधारा बताया। मिलबेन ने कहा, 'मुझे उम्मीद थी कि वे भारत से आने वाली उन बातों का विरोध करेंगे जो लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से जुड़ी हों।'

उनके अनुसार, ममदानी की टिप्पणियाँ केवल भागवत तक सीमित नहीं थीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके प्रतिनिधित्व वाले विचारों की ओर भी इशारा करती थीं। मिलबेन ने ममदानी को एक प्रतिभाशाली युवा राजनेता बताया, लेकिन कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के भीतर कुछ लोगों का गलत मार्गदर्शन मिल रहा है।

आरएसएस: संक्षिप्त परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में हुई थी। संगठन स्वयं को स्वयंसेवकों पर आधारित एक सांस्कृतिक संगठन बताता है और इसे भारत के व्यापक हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन में एक प्रभावशाली संस्था माना जाता है। मोहन भागवत 2009 से इसके सरसंघचालक के रूप में कार्यरत हैं।

क्या होगा आगे

मिलबेन ने उम्मीद जताई कि भागवत इस कार्यक्रम का उपयोग राजनीतिक टकराव की बजाय सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए करेंगे। उनके शब्दों में, यह ममदानी और अन्य आलोचकों की ओर से पैदा किए गए 'शोर-शराबे' को शांत करने का एक अच्छा अवसर है। यह देखना अहम होगा कि 29 अगस्त का यह संबोधन अमेरिका में आरएसएस की छवि को नया आयाम दे पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भागवत का यह दौरा भर सकता है या और गहरा कर सकता है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि 'एकता और समरसता' जैसे विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अन्य धर्मों की अनुपस्थिति — जिसकी ओर मिलबेन ने खुद इशारा किया — संदेश की विश्वसनीयता को कमज़ोर कर सकती है। ममदानी की आलोचना को केवल वैचारिक पूर्वाग्रह कहकर खारिज करना भी उस वास्तविक राजनीतिक संवेदनशीलता को नज़रअंदाज़ करता है जो अमेरिकी मुख्यधारा में हिंदू राष्ट्रवाद को लेकर मौजूद है। असली परीक्षा यह होगी कि भागवत का संबोधन केवल समर्थकों की सभा बनकर रह जाता है या वास्तव में व्यापक अमेरिकी दर्शकों तक पहुंचता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत न्यूयॉर्क में कब और किस विषय पर संबोधन देंगे?
मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में एकता और आपसी जुड़ाव विषय पर केंद्रित एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम उनकी अमेरिका यात्रा का प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम है।
मैरी मिलबेन कौन हैं और उन्होंने भागवत के संबोधन पर क्या कहा?
मैरी मिलबेन एक अमेरिकी गायिका हैं जो भारत में 'जन गण मन' और 'ॐ जय जगदीश हरे' की प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि भागवत को इस संबोधन का उपयोग विवादों से आगे बढ़कर आरएसएस के सकारात्मक संदेश को अमेरिकी जनता तक पहुंचाने के लिए करना चाहिए।
न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत की यात्रा पर क्या रुख अपनाया?
मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत की यात्रा को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ कीं। मैरी मिलबेन ने इन टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि ममदानी का रुख डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका की विचारधारा से प्रभावित दिखता है।
आरएसएस क्या है और मोहन भागवत कब से इसके प्रमुख हैं?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में हुई थी और यह खुद को एक सांस्कृतिक स्वयंसेवी संगठन बताता है। मोहन भागवत 2009 से इसके सरसंघचालक के रूप में कार्यरत हैं और इसे भारत के हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन में एक प्रभावशाली संगठन माना जाता है।
मिलबेन ने कार्यक्रम के आयोजकों से क्या अपील की?
मिलबेन ने आयोजकों से अपील की कि यदि कार्यक्रम का विषय एकता और समरसता है, तो अन्य धर्मों और समुदायों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाए। उनका मानना था कि इससे आरएसएस और धार्मिक स्वतंत्रता के संदेश को व्यापक समर्थन मिलता दिखेगा।
राष्ट्र प्रेस
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