18 जुलाई 2026
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बीएलए-टीटीपी गठबंधन का सीपीईसी और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान, चीनी निवेश निशाने पर

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बीएलए-टीटीपी गठबंधन का सीपीईसी और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान, चीनी निवेश निशाने पर

सारांश

बीएलए, टीटीपी और सहयोगी संगठनों ने सीपीईसी को सीधे निशाना बनाने का फैसला किया है — यह केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की लड़ाई नहीं, बल्कि चीन के सबसे बड़े विदेशी निवेश पर खुली चुनौती है। बलूचिस्तान और केपी में एक साथ हमलों की रणनीति पाकिस्तानी सेना को दो मोर्चों पर उलझाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

बीएलए , टीटीपी , बीएलएफ और हाफिज गुल बहादुर गुट ने सीपीईसी और पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने का फैसला किया।
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में एक साथ समन्वित हमलों की रणनीति तैयार की गई है ताकि सुरक्षा बलों पर एक साथ दबाव बनाया जा सके।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अनुसार, गठबंधन का लक्ष्य सीपीईसी परियोजना पर नियंत्रण स्थापित करना और चीनी निवेशकों को मुनाफे में हिस्सेदारी देने पर मजबूर करना है।
पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कदम के तौर पर लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद और आईएसकेपी को एकजुट किया है।
चीन ने पहले बलूचिस्तान में अपनी सेना भेजने का प्रस्ताव दिया था, जिसे इस्लामाबाद ने अस्वीकार कर दिया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय समर्थन और भौगोलिक ज्ञान बीएलए-टीटीपी गठबंधन को रणनीतिक बढ़त देते हैं।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) सहित कई सशस्त्र संगठनों ने 18 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को एक साथ निशाना बनाने के लिए साझा मोर्चा बनाने का फैसला किया है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) दोनों प्रांतों में आने वाले दिनों में हिंसा में तीव्र वृद्धि की गंभीर आशंका जताई जा रही है।

नए गठबंधन की संरचना और उद्देश्य

सूत्रों के मुताबिक, टीटीपी, उसका धड़ा हाफिज गुल बहादुर, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और बीएलए ने मिलकर एक समन्वित रणनीति पर सहमति जताई है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के अनुसार, इस नए गठबंधन का प्राथमिक लक्ष्य सीपीईसी परियोजना पर नियंत्रण स्थापित करना और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को एक साथ कई मोर्चों पर उलझाना है।

योजना के अनुसार, बलूचिस्तान और केपी में हमले एक साथ अंजाम दिए जाएंगे, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के संसाधनों पर एक साथ दबाव बढ़ेगा और सेना को रक्षात्मक स्थिति में धकेला जा सकेगा।

पाकिस्तान की जवाबी रणनीति

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने बीएलए और टीटीपी का मुकाबला करने के लिए एक समन्वित व्यवस्था के तहत लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसकेपी) को एक साथ लाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गठजोड़ पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान के करीबी संगठनों पर आधारित है, इसलिए इन्हें स्थानीय स्तर पर समर्थन मिलने की संभावना बेहद सीमित है।

सीपीईसी और चीनी निवेश पर मंडराता खतरा

अधिकारियों के अनुसार, बलूचिस्तान में सक्रिय समूहों ने कथित तौर पर चीनी निवेशकों से सुरक्षा की गारंटी के बदले परियोजना के मुनाफे में हिस्सेदारी की माँग शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने बताया कि समूहों ने यह भी चेतावनी दी है कि जब तक मुनाफे का एक हिस्सा बलूच लोगों की भलाई और विकास के लिए सुनिश्चित नहीं किया जाता, चीनी कंपनियों को इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति कम कर लेनी चाहिए।

गौरतलब है कि बीजिंग ने इससे पहले इस्लामाबाद को सीपीईसी और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बलूचिस्तान में चीनी सेना भेजने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, पाकिस्तान ने यह प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए कहा था कि वह स्थिति को स्वयं संभालने में सक्षम है।

बलूच असंतोष की जड़ें

बलूच समुदाय वर्षों से सीपीईसी परियोजना का विरोध करता आया है। उनका आरोप है कि इस परियोजना से प्राप्त राजस्व केवल पाकिस्तान के बड़े शहरों तक पहुँचता है और स्थानीय आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। बीएलए को बलूचिस्तान में आम जनता द्वारा क्षेत्रीय हितों के लिए लड़ने वाले संगठन के रूप में देखा जाता है, न कि दुश्मन के रूप में — यही स्थानीय समर्थन उसे रणनीतिक बढ़त देता है।

विशेषज्ञों का आकलन

पाकिस्तान मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि यह नया गठबंधन औपचारिक रूप ले लेता है, तो पाकिस्तानी सेना के लिए इसका मुकाबला करना बेहद कठिन होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, बीएलए और टीटीपी को स्थानीय खुफिया नेटवर्क और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों की गहरी जानकारी है, जो उन्हें रसद और संचालन के स्तर पर महत्वपूर्ण बढ़त देती है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

आने वाले दिनों में इस गठबंधन की वास्तविक क्षमता और समन्वय की परीक्षा मैदान में होगी — और उसका परिणाम सीपीईसी के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि वास्तव में संगठित रूप लेता है, तो यह पाकिस्तान के लिए दोहरी मार होगी — एक ओर सुरक्षा संकट, दूसरी ओर चीन के साथ कूटनीतिक दबाव। इस्लामाबाद ने बीजिंग की सेना भेजने की पेशकश ठुकराई थी, लेकिन अब अगर सीपीईसी पर हमले बढ़े तो यह 'ना' टिकाए रखना मुश्किल होगा। असली सवाल यह है कि बीएलए और टीटीपी — जिनकी विचारधाराएँ मूलतः विरोधाभासी हैं — कितने समय तक एकजुट रह सकते हैं; इतिहास में ऐसे 'सुविधाजनक गठबंधन' अल्पकालिक साबित हुए हैं। फिर भी, अल्पकाल में भी समन्वित हमले पाकिस्तान के पहले से दबाव में चल रहे सुरक्षा तंत्र को गंभीर रूप से परख सकते हैं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएलए-टीटीपी गठबंधन क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और हाफिज गुल बहादुर गुट के बीच बना कथित साझा मोर्चा है। इसका उद्देश्य पाकिस्तानी सेना के गठबंधन का मुकाबला करना और सीपीईसी परियोजना को निशाना बनाना है।
सीपीईसी को इस गठबंधन से क्या खतरा है?
इंटेलिजेंस ब्यूरो के अनुसार, गठबंधन का एक प्रमुख लक्ष्य चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर नियंत्रण स्थापित करना है। बलूचिस्तान में समूहों ने कथित तौर पर चीनी निवेशकों से सुरक्षा के बदले मुनाफे में हिस्सेदारी माँगी है और चेतावनी दी है कि अन्यथा चीनी कंपनियाँ अपनी उपस्थिति कम करें।
पाकिस्तानी सेना ने इस खतरे से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत को एक समन्वित व्यवस्था के तहत एकजुट किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन संगठनों को स्थानीय स्तर पर समर्थन मिलने की संभावना सीमित है।
बलूच लोग सीपीईसी का विरोध क्यों करते हैं?
बलूच समुदाय का आरोप है कि सीपीईसी से मिलने वाला राजस्व केवल पाकिस्तान के बड़े शहरों तक पहुँचता है और स्थानीय आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। उनका यह भी कहना है कि पाकिस्तानी सरकार बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन कर रही है।
चीन ने बलूचिस्तान में अपनी सेना भेजने का प्रस्ताव क्यों दिया था?
चीन ने सीपीईसी परियोजना और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह प्रस्ताव दिया था। हालांकि, पाकिस्तान ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया और कहा कि वह स्वयं स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम है।
राष्ट्र प्रेस
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