16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीपीईसी की विफलता: $62 अरब का गलियारा अधूरे बुनियादी ढाँचे और बढ़ते कर्ज में फँसा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीपीईसी की विफलता: $62 अरब का गलियारा अधूरे बुनियादी ढाँचे और बढ़ते कर्ज में फँसा

सारांश

करीब एक दशक तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का 'गेमचेंजर' कहा गया $62 अरब का सीपीईसी अब अधूरे बुनियादी ढाँचे, $7 अरब से अधिक के बकाया बिजली भुगतान और बलूचिस्तान में बढ़ते उग्रवाद के बोझ तले दब गया है। 'सीपीईसी 2.0' की ब्रांडिंग एक नाकाम परियोजना को राजनीतिक जीवन देने की कोशिश मात्र है।

मुख्य बातें

सीपीईसी का मूल्य करीब $62 अरब था और इसमें राजमार्ग, बिजली संयंत्र, रेल नेटवर्क और ग्वादर बंदरगाह शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक चीनी स्वतंत्र बिजली उत्पादकों का बकाया $7 अरब से अधिक हो गया।
पाकिस्तान को IMF के साथ बार-बार बातचीत करनी पड़ी; विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दबाव में रहा।
ग्वादर बंदरगाह दुबई-सिंगापुर जैसा वैश्विक व्यापार केंद्र बनने के लक्ष्य से कोसों दूर रहा।
बलूचिस्तान में चीनी कर्मचारियों पर उग्रवादी हमले बढ़े; विद्रोही समूह सीपीईसी को बाहरी संसाधन दोहन मानते हैं।
' सीपीईसी 2.0 ' की ब्रांडिंग को रिपोर्ट में नई शुरुआत नहीं, बल्कि विफल परियोजना को राजनीतिक रूप से बचाने का प्रयास बताया गया है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी), जिसे लगभग एक दशक तक पाकिस्तान की आर्थिक तकदीर बदलने वाली परियोजना के रूप में प्रचारित किया गया, अब अधूरे बुनियादी ढाँचे, बेकाबू कर्ज और ठहरे हुए औद्योगिक विकास की तस्वीर पेश कर रहा है। यूरोपियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज 'सीपीईसी 2.0' की ब्रांडिंग किसी नई शुरुआत का संकेत नहीं, बल्कि एक ऐसी परियोजना को राजनीतिक रूप से जीवित रखने का प्रयास है जो अपने मूल रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रही है।

सीपीईसी का मूल ढाँचा और महत्वाकांक्षाएँ

करीब $62 अरब मूल्य की इस परियोजना में पाकिस्तान भर में राजमार्ग, बिजली संयंत्र, रेल नेटवर्क, बंदरगाह विकास और विशेष आर्थिक क्षेत्र शामिल थे। चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) की यह प्रमुख कड़ी थी, जिसका उद्देश्य पश्चिमी चीन को ग्वादर बंदरगाह के ज़रिये अरब सागर से जोड़ना और पाकिस्तान में औद्योगिक क्रांति लाना था। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत से ही इस मॉडल में खामियाँ थीं — इसमें दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की बजाय दृश्यमान बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई।

कर्ज का जाल और ऊर्जा क्षेत्र की विफलता

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर चीनी वित्तपोषण और निर्माण क्षमता तो हासिल की, लेकिन ऐसा औद्योगिक ढाँचा नहीं बना सका जो दीर्घकालिक आर्थिक लाभ दे सके। चीन-समर्थित कई कोयला और बिजली परियोजनाएँ ऐसे समझौतों के तहत लागू हुईं, जिनमें चीनी कंपनियों को डॉलर में ऊँचा रिटर्न सुनिश्चित किया गया था। जैसे-जैसे पाकिस्तानी मुद्रा कमजोर होती गई, ये समझौते और महँगे साबित होने लगे।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक पाकिस्तान के सर्कुलर डेट संकट के कारण चीनी बिजली उत्पादक कंपनियों का $7 अरब से अधिक का भुगतान बकाया हो गया। पाकिस्तान के बिजली क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं को सुलझाने के बजाय सीपीईसी ने पहले से कमजोर व्यवस्था पर वित्तीय बोझ और बढ़ा दिया। गौरतलब है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बार-बार बातचीत करनी पड़ी और विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दबाव में रहा।

ग्वादर बंदरगाह: सपना जो पूरा न हो सका

रिपोर्ट में ग्वादर बंदरगाह की विफलता को सीपीईसी की सबसे प्रतीकात्मक नाकामी बताया गया है। मूल योजना में ग्वादर को दुबई या सिंगापुर की तर्ज पर वैश्विक व्यापार का बड़ा केंद्र बनाना था, लेकिन यह लक्ष्य अधूरा रह गया। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण और वास्तविक आर्थिक उत्पादकता के बीच की यही खाई सीपीईसी की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई — केवल सड़कें और बंदरगाह विकास नहीं ला सकते, जब तक वे उत्पादक उद्योगों, स्थिर निर्यात और प्रभावी प्रशासन से नहीं जुड़े हों।

बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट और स्थानीय असंतोष

सीपीईसी के आसपास की सुरक्षा स्थिति में भी तेजी से गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, विशेष रूप से बलूचिस्तान में चीनी इंजीनियर और कर्मचारी लगातार उग्रवादी हमलों का निशाना बन रहे हैं। बलूचिस्तान के विद्रोही समूह कथित तौर पर इस गलियारे को स्थानीय आबादी को वास्तविक आर्थिक लाभ दिए बिना बाहरी संसाधन दोहन की परियोजना के रूप में देखते हैं, जिससे क्षेत्र में विरोध और सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं।

आगे क्या

'सीपीईसी 2.0' के नाम पर पुनर्जीवित करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार जब तक पाकिस्तान अपने बिजली क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं को नहीं सुलझाता, औद्योगिक उत्पादकता नहीं बढ़ाता और ग्वादर को वास्तविक व्यापारिक केंद्र नहीं बनाता, तब तक यह गलियारा एक महँगे वादे से ज़्यादा कुछ नहीं बन पाएगा। दोनों देशों के बीच बढ़ती निराशा इस बात का संकेत है कि 'गेमचेंजर' की कहानी को नए सिरे से लिखना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्पादकता का अभाव। असली सवाल यह है कि पाकिस्तान ने $62 अरब के समझौते पर हस्ताक्षर करते समय ऊर्जा समझौतों की डॉलर-आधारित गारंटी की शर्तों की बारीकी से जाँच क्यों नहीं की। 'सीपीईसी 2.0' की ब्रांडिंग उन संरचनात्मक खामियों को नहीं सुधारती जो पहले दौर में थीं — जब तक ग्वादर को वास्तविक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र नहीं मिलता और बलूचिस्तान का असंतोष नहीं थमता, तब तक यह गलियारा एक महँगे राजनीतिक प्रतीक से आगे नहीं बढ़ेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीईसी क्या है और यह क्यों विफल हुआ?
सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, चीन की बेल्ट एंड रोड पहल की प्रमुख परियोजना है जिसका मूल्य करीब $62 अरब है। यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना इसलिए विफल हुई क्योंकि इसमें दृश्यमान बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई, न कि उत्पादक उद्योगों और निर्यात क्षमता को।
पाकिस्तान पर सीपीईसी का कर्ज कितना है?
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक केवल चीनी स्वतंत्र बिजली उत्पादकों का बकाया $7 अरब से अधिक हो गया था। पाकिस्तान के सर्कुलर डेट संकट और कमजोर होती मुद्रा ने डॉलर-आधारित ऊर्जा समझौतों को और महँगा बना दिया।
ग्वादर बंदरगाह सीपीईसी का केंद्र क्यों नहीं बन सका?
मूल योजना में ग्वादर को दुबई या सिंगापुर की तर्ज पर वैश्विक व्यापार केंद्र बनाना था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। बंदरगाह का निर्माण तो हुआ, लेकिन उसे उत्पादक उद्योगों और स्थिर निर्यात से जोड़ने में विफलता रही।
बलूचिस्तान में सीपीईसी का विरोध क्यों हो रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान के विद्रोही समूह सीपीईसी को स्थानीय आबादी को वास्तविक आर्थिक लाभ दिए बिना बाहरी संसाधन दोहन की परियोजना मानते हैं। इसी कारण चीनी इंजीनियर और कर्मचारी कथित तौर पर उग्रवादी हमलों का निशाना बनते रहे हैं।
'सीपीईसी 2.0' क्या है और क्या यह कारगर होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, 'सीपीईसी 2.0' की ब्रांडिंग किसी नई शुरुआत का संकेत नहीं, बल्कि एक विफल परियोजना को राजनीतिक रूप से बचाने का प्रयास है। जब तक बिजली क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याएँ, औद्योगिक उत्पादकता की कमी और बलूचिस्तान का असंतोष नहीं सुलझता, इसके सफल होने की संभावना सीमित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 घंटे पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले