काला सागर में 4 जहाजों पर हमला: भारत की कड़ी निंदा, 3 भारतीय घायल; जायसवाल बोले — कूटनीति ही रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 7 अक्टूबर 2026 को काला सागर (ब्लैक सी) में एक के बाद एक चार वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन हमलों में कई भारतीय नाविक घायल हुए हैं और दर्जनों को बचाया गया है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित पाक्षिक प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।
मुख्य घटनाक्रम
जायसवाल ने बताया कि मंगलवार से बुधवार के बीच काला सागर में एक के बाद एक चार वाणिज्यिक जहाजों पर हमले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा, 'वाणिज्यिक नौ-परिवहन और नाविक समुदाय को खतरे के दायरे में लाया जा रहा है। हम इसकी घोर निंदा करते हैं।'
पहला जहाज एमवी रायोद मम्मदोव था, जिस पर काला सागर में सीधा हमला हुआ। इसमें सवार तीन भारतीय नागरिकों में से एक घायल हो गए, जिनका उपचार जारी है। रोमानिया स्थित भारतीय दूतावास घायल नागरिक के सम्पर्क में है और उनकी देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।
चारों जहाजों का विवरण
दूसरा जहाज टोगो-ध्वज वाहक अल्फावतन था, जिस पर मंगलवार को हमला हुआ। जायसवाल ने बताया कि इस जहाज के चालक दल के बारे में अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है और संबंधित सरकार से संपर्क जारी है।
तीसरा जहाज एमबी केबल था, जो पलाऊ देश के ध्वज तले चल रहा था। इस पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके बाद बुल्गारियाई नौका ने तत्परता दिखाते हुए सभी 18 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। इनमें से 7 भारतीय नागरिक थे और एक भारतीय घायल अवस्था में है, जिसका इलाज चल रहा है। भारत ने इस बचाव कार्य के लिए बुल्गारिया का आभार व्यक्त किया।
चौथा जहाज लाइबेरिया-ध्वज वाहक अफ्रामैक्स रियो था — एक ऑयल टैंकर, जिसमें 23 भारतीय नागरिक सवार थे। सभी को सुरक्षित बचा लिया गया है, हालाँकि एक घायल भारतीय का उपचार जारी है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
MEA प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने कहा, 'हम आह्वान करते हैं कि कूटनीति और संवाद का रास्ता अपनाया जाए ताकि शांति लौटे। हमारे नाविक समुदाय को टारगेट करना ठीक नहीं है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नौ-परिवहन निर्बाध चलना भारत की प्राथमिकता है।
आम जनता और नाविकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण काला सागर पहले से ही व्यापारिक जहाजों के लिए अत्यंत जोखिम भरा क्षेत्र बना हुआ है। भारतीय नाविक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हैं, और इस क्षेत्र में बार-बार हो रहे हमले उनकी सुरक्षा पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। गौरतलब है कि भारत इससे पहले भी लाल सागर में भारतीय नाविकों को निशाना बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कर चुका है।
क्या होगा आगे
भारतीय दूतावास प्रभावित नाविकों के परिजनों और संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सभी घायल भारतीय नागरिकों को चिकित्सा सहायता मिल रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कूटनीतिक रास्ता अपनाने और काला सागर में शांति बहाली के प्रयास तेज करने का आग्रह किया है।