इबोला खतरे पर कनाडा का बड़ा फैसला: 90 दिन के लिए वीजा निलंबित, 21-दिवसीय क्वारंटीन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा सरकार ने 27 मई 2026 को इबोला वायरस के देश में प्रवेश और प्रसार को रोकने के लिए अस्थायी सीमा प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसके तहत डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और साउथ सूडान के निवासियों के आव्रजन दस्तावेज 90 दिनों के लिए निलंबित किए जाएंगे। पब्लिक हेल्थ एजेंसी ऑफ कनाडा की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह प्रतिबंध बुधवार रात 11:59 बजे ईस्टर्न टाइम से प्रभावी हो गया।
प्रतिबंध में क्या-क्या शामिल है
घोषणा के अनुसार, इन तीन प्रभावित देशों के वे नागरिक जिनके पास पहले से अस्थायी निवासी वीजा, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन या स्थायी निवासी वीजा है, उन्हें भी कनाडा की यात्रा की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही, इन देशों के निवासियों के नए आवेदनों की प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
एक अतिरिक्त उपाय के तहत 30 मई की रात 11:59 बजे ईस्टर्न टाइम से 29 अगस्त 2026 तक, उन सभी कनाडाई नागरिकों, स्थायी निवासियों, इंडियन एक्ट के तहत पंजीकृत व्यक्तियों और विदेशी नागरिकों के लिए अनिवार्य 21-दिवसीय क्वारंटीन लागू किया जाएगा, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा की हो और जिनमें बीमारी के लक्षण न हों।
जिन यात्रियों में लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें क्वारंटीन एक्ट के तहत आगे की जांच के लिए अस्पताल में अलग रखा जाएगा।
फीफा वर्ल्ड कप की भूमिका
कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में अभी इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और उत्तर अमेरिका में जोखिम फिलहाल कम है। हालांकि, बीमारी की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति में हो रहे बदलावों — जिनमें आगामी फीफा वर्ल्ड कप भी शामिल है — को देखते हुए ये एहतियाती कदम उठाए गए हैं। गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप के दौरान दुनियाभर से लाखों यात्री कनाडा आने वाले हैं, जिससे संक्रमण के अप्रत्यक्ष मार्गों का खतरा बढ़ जाता है।
इबोला वायरस: क्या है यह बीमारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है, जो मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है। यह वायरस जंगली जानवरों — जैसे फल खाने वाले चमगादड़, साही और गैर-मानव प्राइमेट्स — से इंसानों में फैलता है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के खून, शारीरिक स्राव, अंगों या अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क तथा इनसे दूषित वस्तुओं (जैसे बिस्तर व कपड़े) के माध्यम से यह मानव-से-मानव में फैलती है।
इबोला की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत होती है, हालांकि पिछले प्रकोपों में यह दर 25 से 90 प्रतिशत तक रही है।
इबोला का इतिहास और पिछले प्रकोप
इबोला के शुरुआती प्रकोप मध्य अफ्रीका के दूरदराज के गांवों में, उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के पास हुए थे। 2014–2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला प्रकोप 1976 में वायरस की खोज के बाद से अब तक का सबसे बड़ा और सबसे जटिल प्रकोप माना गया, जिसमें पहले के सभी प्रकोपों की तुलना में अधिक मामले और मौतें दर्ज की गईं। यह संक्रमण गिनी से शुरू होकर जमीनी सीमाओं के जरिए सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था। वर्तमान प्रकोप DRC में सक्रिय है और युगांडा व साउथ सूडान में खतरे की आशंका जताई जा रही है।
आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर इन प्रतिबंधों का प्रभाव और WHO की प्रतिक्रिया, इस स्थिति की दिशा तय करेगी।