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दक्षिण चीन सागर विवाद: CGTN सर्वे में 84.6% लोगों ने शांतिपूर्ण संवाद को दिया समर्थन, बाहरी हस्तक्षेप पर चिंता

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दक्षिण चीन सागर विवाद: CGTN सर्वे में 84.6% लोगों ने शांतिपूर्ण संवाद को दिया समर्थन, बाहरी हस्तक्षेप पर चिंता

सारांश

सीजीटीएन के सर्वे में छह आसियान देशों के 2,664 लोगों में से 84.6% ने दक्षिण चीन सागर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया। 74.4% ने बाहरी हस्तक्षेप को क्षेत्रीय तनाव का मुख्य कारण बताया। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी क्षेत्रीय स्वायत्तता पर ज़ोर दिया।

मुख्य बातें

सीजीटीएन ने जून-जुलाई 2026 के बीच छह आसियान देशों में 2,664 उत्तरदाताओं के बीच सर्वे किया।
84.6% उत्तरदाताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण संवाद और परामर्श को विवाद-समाधान का सही तरीका माना।
64.3% का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप से दावेदार देश क्षेत्रीय संवाद की बजाय बाहरी समर्थन पर निर्भर हो गए हैं।
74.4% ने चेतावनी दी कि निरंतर बाहरी हस्तक्षेप वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने चीन-आसियान बैठक में क्षेत्रीय देशों की स्वायत्त क्षमता पर भरोसा जताया।
जुलाई 1992 में हस्ताक्षरित डीओसी को क्षेत्रीय स्थिरता का आधार माना जाता है।

दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने की पहल क्षेत्रीय देशों के हाथों में होनी चाहिए — यह निष्कर्ष चाइना मीडिया ग्रुप के सीजीटीएन द्वारा जून-जुलाई 2026 के बीच छह आसियान देशों में कराए गए एक व्यापक सर्वेक्षण से सामने आया है। इस सर्वे में 2,664 उत्तरदाताओं ने भाग लिया और बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को क्षेत्रीय तनाव का प्रमुख कारण बताया।

सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष

सर्वे में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और सिंगापुर के नागरिकों से प्रश्नावली के माध्यम से राय ली गई। इसके अनुसार, 84.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि दक्षिण चीन सागर के विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप शांतिपूर्ण संवाद और परामर्श के ज़रिए होना चाहिए। वहीं, 64.3 प्रतिशत का कहना है कि बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप के चलते कुछ दावेदार देश क्षेत्रीय संवाद की बजाय बाहरी समर्थन पर निर्भर हो गए हैं, जिससे स्वायत्त समाधान की क्षेत्रीय क्षमता कमज़ोर पड़ी है।

74.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने चेतावनी दी कि यदि बाहरी हस्तक्षेप जारी रहा, तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

वांग यी का आसियान बैठक में बयान

हाल ही में आयोजित चीन-आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दक्षिण चीन सागर पर चीन का सैद्धांतिक रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि चीन और आसियान देशों के पास इस मुद्दे को उचित तरीके से संभालने और शांति, स्थिरता, सहयोग तथा मित्रता को इस जलक्षेत्र का मुख्य विषय बनाने की आवश्यक क्षमता और ज्ञान है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और डीओसी की भूमिका

गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर का विवाद चीन और कुछ आसियान देशों के बीच क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री सीमांकन से जुड़ा है। जुलाई 1992 में अपनाई गई दक्षिण चीन सागर पर आसियान घोषणा के आधार पर सभी पक्षों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में मैत्री और सहयोग संधि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांतों पर आधारित दक्षिण चीन सागर में विभिन्न पक्षों के आचरण पर घोषणापत्र (डीओसी) पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके बाद डीओसी के कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें और संयुक्त कार्य समूह स्थापित किए गए, जिन्होंने इस जलक्षेत्र में समग्र स्थिति को शांत रखने में अहम भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक शक्तियों की इस क्षेत्र में सक्रियता लगातार बढ़ रही है।

आगे की दिशा

सर्वे के नतीजे और वांग यी के बयान मिलकर यह संकेत देते हैं कि आसियान देशों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर गहरी चिंता है और क्षेत्रीय स्तर पर स्वायत्त समाधान की माँग बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में स्थायी शांति के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सीधे संवाद और बहुपक्षीय ढाँचे को मज़बूत करना अनिवार्य होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसके निष्कर्षों को एक विशेष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है; स्वतंत्र सत्यापन की अनुपस्थिति में इन आँकड़ों को सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए। यह भी उल्लेखनीय है कि 'बाहरी हस्तक्षेप' की परिभाषा सर्वे में अस्पष्ट है — फिलीपींस और वियतनाम जैसे देश अमेरिकी उपस्थिति को संतुलन-कारक मानते हैं, न कि उकसावे का स्रोत। डीओसी के बावजूद दक्षिण चीन सागर में तनाव पिछले एक दशक में बढ़ा है, जो यह प्रश्न उठाता है कि क्या मौजूदा क्षेत्रीय ढाँचे पर्याप्त हैं। असली कसौटी यह है कि क्षेत्रीय देश 'स्वायत्त समाधान' की इस अवधारणा को व्यवहार में किस हद तक अपनाते हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजीटीएन के दक्षिण चीन सागर सर्वे में क्या पाया गया?
सीजीटीएन के सर्वे में छह आसियान देशों के 2,664 उत्तरदाताओं में से 84.6% ने शांतिपूर्ण संवाद और परामर्श को विवाद-समाधान का सही तरीका बताया। 74.4% ने कहा कि बाहरी हस्तक्षेप जारी रहने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा होगा।
दक्षिण चीन सागर विवाद में बाहरी हस्तक्षेप क्यों चिंता का विषय है?
सर्वे के अनुसार, 64.3% उत्तरदाताओं का मानना है कि बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप से कुछ दावेदार देश क्षेत्रीय संवाद की बजाय बाहरी समर्थन पर निर्भर हो गए हैं। इससे विवादों को स्वायत्त रूप से सुलझाने की क्षेत्रीय क्षमता कमज़ोर हुई है।
दक्षिण चीन सागर में डीओसी क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
डीओसी यानी 'दक्षिण चीन सागर में विभिन्न पक्षों के आचरण पर घोषणापत्र' एक बहुपक्षीय दस्तावेज़ है, जिस पर जुलाई 1992 की आसियान घोषणा के आधार पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांतों पर आधारित है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने आसियान बैठक में क्या कहा?
वांग यी ने कहा कि चीन और आसियान देशों के पास दक्षिण चीन सागर के मुद्दे को उचित तरीके से संभालने और शांति, स्थिरता, सहयोग तथा मित्रता को इस जलक्षेत्र का मुख्य विषय बनाने की ज़रूरी क्षमता और ज्ञान है। उन्होंने क्षेत्रीय स्वायत्तता पर विशेष ज़ोर दिया।
दक्षिण चीन सागर विवाद किन देशों के बीच है?
यह विवाद मुख्य रूप से चीन और कुछ आसियान सदस्य देशों — जैसे फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई — के बीच क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री सीमांकन को लेकर है। इस जलक्षेत्र का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व है।
राष्ट्र प्रेस
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