ग्रीष्मकालीन दावोस 2026: चीनी PM ली छ्यांग ने ताल्येन में नवाचार सहयोग का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 24 जून 2026 को ताल्येन, ल्याओनिंग प्रांत में आयोजित 2026 ग्रीष्मकालीन दावोस फोरम के उद्घाटन समारोह में मुख्य भाषण दिया। 'नवाचार का विस्तार' विषय पर केंद्रित इस फोरम में दुनिया भर से लगभग 1,800 प्रतिनिधि शामिल हुए।
उद्घाटन समारोह में उपस्थित वैश्विक नेता
इस प्रतिष्ठित मंच पर कई देशों के शीर्ष नेता उपस्थित रहे। इनमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, गिनी के प्रधानमंत्री अमादौ ओउरी बाह, कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओल्जहास बेक्टेनोव, दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री किम मिन-सेओक, मंगोलिया के प्रधानमंत्री न्यामोसोर उचराल और मोंटेनेग्रो के प्रधानमंत्री मिलोज्को स्पाजिक शामिल थे।
ली छ्यांग के भाषण के मुख्य बिंदु
ली छ्यांग ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि नवाचार पर ध्यान देना ही विकास पर ध्यान देना है और नवाचार की योजना बनाना भविष्य की योजना बनाना है। उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर अपने विचार रखे।
पहले बिंदु में उन्होंने 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2026 चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का पहला वर्ष है और लगातार बदलते अंतरराष्ट्रीय परिवेश के बावजूद, चीनी अर्थव्यवस्था ने स्थिरता, नवाचार और एकीकरण की दिशा में ठोस प्रगति की है।
नवाचार और आर्थिक विकास का संबंध
दूसरे बिंदु में ली छ्यांग ने कहा कि नवाचार-आधारित विकास चीनी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता की कुंजी है। उनके अनुसार, एक अनुकूल माहौल और नवाचार-प्रेरित विकास — ये दो कारक वर्षों से चीन की स्वस्थ आर्थिक प्रगति की नींव रहे हैं।
तीसरे बिंदु में उन्होंने वैश्विक नवाचार सहयोग पर जोर दिया। उनका कहना था कि तकनीकी प्रगति की गति अभूतपूर्व है, लेकिन साथ ही इसके अनियंत्रित होने की संभावना भी बढ़ी है। उन्होंने सभी देशों से कनेक्टिविटी और सहयोग को गहरा करने, एक खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता बनाए रखने का आग्रह किया।
वैश्विक संदर्भ में फोरम का महत्व
गौरतलब है कि ग्रीष्मकालीन दावोस फोरम, जिसे 'न्यू चैंपियंस की वार्षिक बैठक' भी कहा जाता है, वैश्विक व्यापार और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद का एक प्रमुख मंच है। यह ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब वैश्विक व्यापार तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। चीन का यह संदेश — कि नवाचार सहयोग ही आगे का रास्ता है — स्पष्ट रूप से उन देशों को संबोधित है जो तकनीकी अलगाव की नीतियों पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में फोरम के अन्य सत्रों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित ऊर्जा जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।