चीन की GDP वृद्धि दर Q2 में घटकर 4.3%, घरेलू मांग और रियल एस्टेट संकट ने तोड़ी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
चीन की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर इस वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2) में घटकर महज 4.3 प्रतिशत रह गई — जिसकी प्रमुख वजह घरेलू मांग में लगातार आ रही गिरावट और स्थिर परिसंपत्ति निवेश में तेज़ कमी है। मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज (MERICS) के विश्लेषण के अनुसार, यह गिरावट चीनी अर्थव्यवस्था में गहराते संरचनात्मक असंतुलन की स्पष्ट निशानी है।
रियल एस्टेट और निवेश में भारी गिरावट
MERICS के विश्लेषण के अनुसार, GDP वृद्धि को सबसे अधिक नुकसान स्थिर परिसंपत्ति निवेश (Fixed Asset Investment — FAI) में आई तीव्र गिरावट से पहुँचा है। रियल एस्टेट निवेश में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो किसी भी छह महीने की अवधि में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। इसके साथ ही सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निर्माण क्षेत्र में भी FAI में कमी आई है।
विश्लेषण में यह भी रेखांकित किया गया है कि पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रही स्थानीय सरकारों के पास बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर व्यय करने के लिए संसाधन लगभग समाप्त हो चुके हैं।
उपभोक्ता विश्वास में कमज़ोरी
घरेलू खपत के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। जून में घरेलू कारों की बिक्री सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत गिर गई, जो उपभोक्ता विश्वास में गहरी कमज़ोरी को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब बीजिंग घरेलू खपत बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता जता रहा है, लेकिन ठोस कदम अभी तक नज़र नहीं आ रहे।
निर्यात मज़बूत, पर असंतुलन गहरा
घरेलू सुस्ती के बावजूद चीन का अंतरराष्ट्रीय व्यापार अभी भी सशक्त बना हुआ है। जून में निर्यात मूल्य के आधार पर 27 प्रतिशत और आयात 36 प्रतिशत बढ़ा। हाई-टेक उत्पादों का प्रदर्शन विशेष रूप से बेहतर रहा। हालाँकि MERICS के अनुसार, आयात में मात्रा नहीं बल्कि कमोडिटी और हाई-टेक उत्पादों की बढ़ती कीमतों के कारण मूल्य में वृद्धि दिखी है — यानी चीन अधिक सामान नहीं खरीद रहा, बल्कि उन्हीं वस्तुओं के लिए अधिक भुगतान कर रहा है।
गौरतलब है कि निर्यात पर इस अत्यधिक निर्भरता ने चीन की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के प्रति और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
यूरोपीय संघ से व्यापार तनाव
चीनी वस्तुओं की यूरोप में बढ़ती आमद ने यूरोपीय संघ (EU) को अपने व्यापार सुरक्षा तंत्र की समीक्षा के लिए प्रेरित किया है। यहाँ तक कि जर्मनी की सरकार ने भी बीजिंग की औद्योगिक नीतियों से उत्पन्न बाज़ार विकृतियों पर पहले की तुलना में अधिक खुलकर आलोचना शुरू कर दी है। MERICS के अनुसार, यूरोपीय नीति-निर्माताओं को व्यापार वार्ताओं में बीजिंग से किसी बड़ी रियायत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि घरेलू आर्थिक दबावों के चलते चीन अपने निर्यात-केंद्रित रुख पर अडिग रह सकता है।
आगे की राह: संरचनात्मक सुधार अनिवार्य
MERICS के विश्लेषण के अनुसार, निर्यात की तेज़ी के बावजूद व्यापक आर्थिक सुस्ती से बचने और विकास लक्ष्य हासिल करने के लिए बीजिंग को उपभोग और निवेश में कम से कम मध्यम स्तर की वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। घरेलू खर्च बढ़ाने की प्रतिबद्धता एक दीर्घकालिक लक्ष्य है, जिसके लिए कठिन संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होगी — और ऐसे सुधार लागू होने के बाद भी उनका असर दिखने में कई वर्ष लग सकते हैं।