28 जुलाई 2026
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कोडाई मुराता अभियोग पर चीनी दूतावास का जापान को कड़ा जवाब, 'अति दक्षिणपंथी ताकतों' पर उठाई उंगली

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कोडाई मुराता अभियोग पर चीनी दूतावास का जापान को कड़ा जवाब, 'अति दक्षिणपंथी ताकतों' पर उठाई उंगली

सारांश

जापानी आत्मरक्षा बल के एक अधिकारी द्वारा टोक्यो स्थित चीनी दूतावास पर 24 मार्च को किए गए चाकू हमले के मामले में चीन ने जापान को कड़ी चेतावनी दी है — अति दक्षिणपंथी विचारधारा और 'नए सैन्यवाद' को जिम्मेदार ठहराते हुए गहन जाँच और सख्त सजा की माँग की है।

मुख्य बातें

24 मार्च को जापानी आत्मरक्षा बलों के अधिकारी कोडाई मुराता ने चाकू लेकर टोक्यो स्थित चीनी दूतावास पर हमला किया और चीन को धमकियाँ दीं।
चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने इसे वियना कन्वेंशन का गंभीर उल्लंघन और चीन की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया।
चीन ने जापान में अति दक्षिणपंथी विचारधारा और ताइवान व इतिहास पर जापानी नीतियों को इस मानसिकता की जड़ बताया।
चीन ने जापान से गहन जाँच, दोषियों को कड़ी सजा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्टीकरण देने की माँग की।
28 जुलाई 2026 को चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कोडाई मुराता पर जापान के अभियोग के बाद यह प्रतिक्रिया दी।

जापान में स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने 28 जुलाई 2026 को पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि कोडाई मुराता पर जापान द्वारा लगाया गया अभियोग देश में व्याप्त अति दक्षिणपंथी विचारधारा और ताकतों को उजागर करता है। दूतावास ने स्पष्ट रूप से कहा कि जापान को इस मामले में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी और चीन सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक ठोस स्पष्टीकरण देना होगा।

घटना का पूरा विवरण

24 मार्च को जापानी आत्मरक्षा बलों के एक अधिकारी ने चाकू लेकर टोक्यो स्थित चीनी दूतावास पर हमला किया और चीन को हिंसक धमकियाँ दीं। चीनी दूतावास के प्रवक्ता के अनुसार, इस घटना के तथ्य स्पष्ट हैं और सबूत अकाट्य हैं। प्रवक्ता ने इसे राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया

चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि यह घटना चीन की संप्रभुता और गरिमा का घोर उल्लंघन है तथा चीनी राजनयिक कर्मियों की व्यक्तिगत सुरक्षा एवं राजनयिक सुविधाओं को गंभीर रूप से खतरे में डालती है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस घटना की प्रकृति और प्रभाव अत्यंत गंभीर हैं।

जापान की नीतियों पर सवाल

प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह घटना आत्मरक्षा बल के कर्मियों में प्रबंधन और शिक्षा की कमी को उजागर करती है। साथ ही, उन्होंने चीन-जापान संबंधों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों — विशेष रूप से इतिहास और ताइवान पर जापानी सरकार की नीतियों — को इस मानसिकता की पृष्ठभूमि बताया। चीनी पक्ष का कहना है कि इन नीतियों के कारण 'नए प्रकार के सैन्यवाद' के उदय के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है।

चीन की माँगें

चीन ने जापान से आग्रह किया है कि वह अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाए, जल्द से जल्द गहन जाँच करे, मूल कारणों का पता लगाए और इसमें शामिल लोगों को कड़ी सजा दे। दूतावास ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जानी चाहिए।

व्यापक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब चीन-जापान संबंध पहले से ही कई मोर्चों पर तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि ताइवान जलसंधि में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ऐतिहासिक मतभेदों के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद सीमित रहा है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा होने की आशंका जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि जापान ने अभियोग चलाकर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है — जिसे चीन की प्रतिक्रिया में पर्याप्त श्रेय नहीं मिला। इस घटना से चीन-जापान संबंधों में पहले से मौजूद दरारें और चौड़ी होने की आशंका है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोडाई मुराता कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
कोडाई मुराता जापानी आत्मरक्षा बलों के एक अधिकारी हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 24 मार्च को चाकू लेकर टोक्यो स्थित चीनी दूतावास पर हमला किया और चीन को हिंसक धमकियाँ दीं। जापान ने उनके खिलाफ अभियोग दायर किया है, जिस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
चीन ने इस घटना को वियना कन्वेंशन का उल्लंघन क्यों बताया?
राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन के तहत मेज़बान देश की यह जिम्मेदारी है कि वह विदेशी दूतावासों और राजनयिक कर्मियों को सुरक्षा प्रदान करे। चीनी दूतावास का कहना है कि एक सक्रिय सैन्य अधिकारी द्वारा दूतावास पर हमला इस दायित्व का सीधा उल्लंघन है।
चीन ने जापान से क्या माँगें रखी हैं?
चीन ने जापान से गहन और त्वरित जाँच, मूल कारणों की पड़ताल, दोषियों को कड़ी सजा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की माँग की है। साथ ही, चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक जिम्मेदार स्पष्टीकरण देने का भी आग्रह किया गया है।
इस घटना का चीन-जापान संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच ताइवान और ऐतिहासिक मुद्दों पर पहले से तनाव है। चीन ने इसे जापान की नीतियों और 'नए सैन्यवाद' से जोड़कर द्विपक्षीय संबंधों पर और दबाव बढ़ा दिया है।
चीन ने 'नए सैन्यवाद' का उल्लेख क्यों किया?
चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान और इतिहास पर जापानी सरकार की नीतियाँ अति दक्षिणपंथी विचारधारा को पनपने का अवसर देती हैं, जिसे उन्होंने 'नए सैन्यवाद' का उभार बताया। यह चीन की उस व्यापक आलोचना का हिस्सा है जिसमें जापान की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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