अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में चीनी नागरिकों की पहुँच पर दो सीनेटरों ने उठाए सवाल, ट्रंप प्रशासन से माँगी सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में चीनी नागरिकों की मौजूदगी और उनकी पहुँच को लेकर वाशिंगटन में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी के दो वरिष्ठ सीनेटरों — अर्कांसस से टॉम कॉटन और यूटा से माइक ली — ने ट्रंप प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल सख्त कदम उठाने की माँग की है। उनका कहना है कि इससे संवेदनशील शोध, अत्याधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ चीन के हाथ लगने का खतरा बढ़ रहा है।
सीनेटरों का पत्र और मुख्य आरोप
दोनों सांसदों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को एक औपचारिक पत्र लिखकर गंभीर चिंताएँ जताई हैं। पत्र में कहा गया है कि ऊर्जा विभाग (डीओई) के अपने आँकड़े यह दर्शाते हैं कि बौद्धिक संपदा की चोरी और तकनीक हस्तांतरण को लेकर वर्षों से चेतावनियाँ मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में चीनी नागरिक अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में आते, काम करते और शोध करते रहे हैं।
पत्र में सीनेटरों ने लिखा कि वे इस बात को लेकर 'गंभीर रूप से चिंतित' हैं कि ऊर्जा विभाग अब भी चीनी नागरिकों को राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक पहुँच दे रहा है, जहाँ वे अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
आँकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
डीओई के आँकड़ों का हवाला देते हुए सीनेटरों ने बताया कि वित्त वर्ष 2025 में चीनी नागरिकों द्वारा लगभग 1,900 अल्पकालिक यात्राएँ की गईं। इसके अलावा करीब 1,300 दीर्घकालिक शोध नियुक्तियाँ और लगभग 2,100 औपचारिक रोज़गार पदों पर भी चीनी नागरिक जुड़े रहे। इसी अवधि में चीनी नागरिकों ने राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की विभिन्न सुविधाओं तक 5,000 से अधिक बार प्रत्यक्ष या दूरस्थ पहुँच हासिल की।
सीनेटरों के अनुसार ये आँकड़े 'न तो छोटे हैं और न ही सामान्य।' उनका कहना है कि यह स्थिति अमेरिका के शोध तंत्र को विदेशी खुफिया गतिविधियों और तकनीकी हस्तांतरण के जोखिम में डाल रही है।
चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून पर सवाल
सीनेटरों ने ऊर्जा विभाग से यह भी पूछा है कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून को किस तरह ध्यान में रखती है। उनका दावा है कि यह कानून चीनी नागरिकों को ज़रूरत पड़ने पर चीनी खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य करता है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या चीनी नागरिकों को नियंत्रित तकनीकों, निर्यात-नियंत्रित तकनीकों या अन्य संवेदनशील शोध क्षेत्रों तक पहुँच दी जा रही है।
सांसदों ने कई अहम सवाल उठाए — आखिर चीनी नागरिक अब भी अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ क्यों काम कर रहे हैं, रिमोट एक्सेस कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, और क्या विभिन्न प्रयोगशालाओं में चीनी शोधकर्ताओं की संख्या को लेकर कोई प्रतिखुफिया आकलन किया गया है।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में भी टॉम कॉटन, माइक ली और नौ अन्य सीनेटरों ने इसी मुद्दे पर ऊर्जा विभाग से कार्रवाई की माँग की थी। इसके बाद मार्च 2025 में उन्होंने अमेरिकी टेक्नोलॉजी को दुरुपयोग से बचाने वाला कानून (गेट एक्ट) नामक विधेयक भी पेश किया था, जो अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों के नागरिकों की डीओई प्रयोगशालाओं तक पहुँच को सीमित करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है।
राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का महत्व
अमेरिका की राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत कंप्यूटिंग, ऊर्जा प्रणालियों, सामग्री विज्ञान और परमाणु सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में शोध करती हैं। इन्हें अमेरिका की तकनीकी बढ़त और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। सीनेटरों ने निष्कर्ष में कहा कि जब तक हर साल हज़ारों चीनी नागरिक इन प्रयोगशालाओं तक पहुँच बनाते रहेंगे, तब तक ऊर्जा विभाग का राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों की रक्षा का मिशन अधूरा रहेगा।