सीनेटर टॉम कॉटन की माँग: अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी फंडिंग की हो सख्त जाँच
सारांश
मुख्य बातें
रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन (अर्कांसस) ने 28 जुलाई 2026 को शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन को पत्र लिखकर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी निवेश की गहन जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि प्रतिबंधित चीनी संस्थाओं के साथ अघोषित वित्तीय संबंध अमेरिकी नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कॉटन ने अपने पत्र में लिखा, 'मैं अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रतिबंधित चीनी संस्थाओं के निवेश को लेकर चिंता जाहिर करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। ये निवेश चीन को अपने हितों को आगे बढ़ाने का मौका देते हैं, जबकि अमेरिकी नवाचार और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर करते हैं।'
सीनेटर ने 2 जनवरी को अमेरिकी शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए एक ऑनलाइन पोर्टल के आँकड़ों का हवाला दिया, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों को मिलने वाले विदेशी चंदे की जानकारी सार्वजनिक करता है।
आँकड़ों की तस्वीर
पोर्टल के डेटा के अनुसार, 31 जनवरी तक संघीय वित्त पोषित विश्वविद्यालयों ने चीन से 6.8 अरब डॉलर से अधिक की राशि प्राप्त की थी। इसमें प्रतिबंधित संस्थाओं से मिली 30 करोड़ डॉलर से अधिक की रकम भी शामिल है।
कॉटन ने विशेष रूप से हार्वर्ड विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए बताया कि उसे चीनी संस्थाओं से 63 करोड़ डॉलर से अधिक प्राप्त हुए हैं। इसमें विदेशी प्रतिभा कार्यक्रमों से जुड़े संगठनों से लगभग 4,18,000 डॉलर और अनधिकृत सैन्य उन्नति में सहायक संस्थाओं से लगभग 4,20,000 डॉलर की राशि शामिल है।
नियमों की खामी पर चिंता
कॉटन ने मौजूदा प्रकटीकरण नियमों की एक अहम कमज़ोरी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने लिखा, 'संघीय वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के लिए एक वर्ष में किसी एक विदेशी स्रोत से 2,50,000 डॉलर से कम के लेन-देन की जानकारी देना अनिवार्य नहीं है।' उनकी आशंका है कि प्रतिबंधित चीनी संस्थाओं के साथ लाखों डॉलर के अतिरिक्त लेन-देन इसी सीमा के नीचे रहकर जाँच से बच गए होंगे।
उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा वित्तीय रिपोर्टिंग में चूकने वाले विश्वविद्यालयों के खिलाफ की गई कार्रवाई की सराहना की, लेकिन साथ ही और अधिक कठोर निगरानी की माँग दोहराई।
व्यापक संदर्भ
यह पत्र वाशिंगटन में विश्वविद्यालयों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग — विशेषकर चीन से — की बढ़ती जाँच-पड़ताल के बीच आया है। अमेरिकी सांसद अब शैक्षणिक अनुसंधान और उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुँच को राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से देखने लगे हैं। गौरतलब है कि संघीय सहायता प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालयों को लंबे समय से कुछ विदेशी उपहारों और अनुबंधों का खुलासा करना अनिवार्य रहा है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह ढाँचा पर्याप्त नहीं है।
यह ध्यान देने योग्य है कि कॉटन के पत्र में हार्वर्ड या किसी अन्य संस्थान पर अमेरिकी कानून तोड़ने का कोई आरोप नहीं लगाया गया है, और न ही विभाग से उठाए जाने वाले ठोस कदमों का विस्तृत ब्यौरा माँगा गया है।
आगे क्या
शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रकटीकरण सीमा को घटाया गया, तो दर्जनों विश्वविद्यालयों की रिपोर्टिंग बाध्यताएँ बदल सकती हैं और चीन-अमेरिका शैक्षणिक सहयोग पर नई बहस छिड़ सकती है।