दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य कमान (ओपकॉन) हस्तांतरण पर अमेरिका सतर्क, बदलते खतरों का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण (ओपकॉन) सौंपने की प्रक्रिया पर सतर्कता बरतते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच पहले से तय शर्तें यथावत हैं, लेकिन कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा खतरों का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। 21 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह स्थिति स्पष्ट की, जो दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की ओर से ओपकॉन जल्द वापस लेने की मांग दोहराए जाने के ठीक बाद आई है।
अमेरिकी अधिकारियों का रुख
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा, 'युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण के हस्तांतरण की बुनियादी शर्तें पहले जैसी ही हैं, लेकिन क्षेत्र में खतरे का माहौल तेज़ी से बदल रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया को गठबंधन के सामने मौजूद सभी क्षेत्रीय खतरों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अन्य अधिकारी ने भी रेखांकित किया कि ओपकॉन हस्तांतरण पूरी तरह से पूर्व-सहमत शर्तों पर आधारित है और तब तक नहीं होगा जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं। अमेरिका इस प्रक्रिया के किसी भी अंतिम फैसले को लेकर अभी से कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहता।
दक्षिण कोरिया की मांग और ली सरकार की प्राथमिकता
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को कहा, 'युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण जल्द दक्षिण कोरिया को वापस मिलना चाहिए। सोल इसके लिए क्षमतावान है और इस दिशा में अमेरिका के साथ बातचीत भी आगे बढ़ रही है।' ली प्रशासन की कोशिश है कि 2030 में राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाए।
हालाँकि, हस्तांतरण की समयसीमा और ज़रूरी मानकों को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं।
उत्तर कोरिया का बदलता खतरा और नए मानकों की ज़रूरत
अमेरिकी सेना की दक्षिण कोरिया में तैनात कमान के प्रमुख जनरल जेवियर ब्रनसन ने पिछले सप्ताह वाशिंगटन में कहा था कि परिस्थितियाँ बदल गई हैं। उन्होंने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि सैन्य कमान हस्तांतरण के लिए नए मानकों की ज़रूरत पड़ सकती है।
यह टिप्पणी उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में तेज़ी से हो रही प्रगति को लेकर अमेरिकी चिंताओं के बीच आई है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता में इज़ाफा इस पूरी प्रक्रिया को जटिल बनाने वाला सबसे बड़ा कारक बन गया है।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता चुंग बिन-ना ने कहा कि यदि हस्तांतरण की शर्तें लगातार बदलती रहेंगी, तो यह लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाएगा। उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देश पहले से तय शर्तों के आधार पर इस मुद्दे पर समन्वय बनाए हुए हैं।
ओपकॉन का ऐतिहासिक संदर्भ
कोरियाई युद्ध (1950–1953) के दौरान दक्षिण कोरिया ने युद्धकालीन अभियान नियंत्रण अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान को सौंप दिया था। 1978 में इसे अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सेनाओं की कमान के अधीन कर दिया गया। 1994 में दक्षिण कोरिया ने शांतिकालीन सैन्य नियंत्रण वापस पा लिया, लेकिन युद्धकालीन नियंत्रण अब भी जनरल ब्रनसन के नेतृत्व वाली संयुक्त सेनाओं के पास बना हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन के भीतर रणनीतिक स्वायत्तता बनाम साझा सुरक्षा ढाँचे की बहस नई ऊँचाई पर है। दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है कि ओपकॉन कब और किन शर्तों के तहत सौंपा जाए।