दक्षिण कोरिया का अमेरिकी सैन्य प्रमुख की OPCON टिप्पणी पर विरोध, रक्षा मंत्री कांग ने जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि सोल ने यूएस फोर्सेज कोरिया (यूएसएफके) प्रमुख की उस टिप्पणी पर अमेरिका के सामने आधिकारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें कहा गया था कि युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीसीओएन) हस्तांतरण की शर्तें बदल गई हैं। यह बयान सैन्य अदालतों की संसदीय जांच के दौरान सामने आया और दोनों सहयोगी देशों के बीच एक संवेदनशील रक्षा-कूटनीतिक विवाद की ओर इशारा करता है।
मूल विवाद: ब्रूनसन की टिप्पणी ने उठाया विवाद
इससे एक दिन पहले, यूएसएफके कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने कहा था कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के मद्देनज़र अमेरिका से दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन ओपीसीओएन सौंपने की शर्तें बदल गई हैं। ब्रूनसन ने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों सहयोगियों के पास अब ओपीसीओएन हस्तांतरण के लिए 'कुछ नए मानक' हैं जिनका पालन करना होगा।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को प्योंगयांग ने ईस्ट सी (पूर्वी सागर) की दिशा में टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया केसीएनए ने इन परीक्षणों को अपनी हथियार प्रणालियों के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से को अपग्रेड करने की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया।
कांग का रुख: शर्तें वही, आकलन अलग
जब कांग से पूछा गया कि क्या दक्षिण कोरिया भी इस बात से सहमत है कि शर्तें बदल गई हैं, तो उन्होंने कहा कि ओपीसीओएन हस्तांतरण की बुनियादी आवश्यकताएँ वही हैं, हालांकि इन शर्तों की पूर्ति का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोण से भिन्न हो सकता है। उन्होंने कहा, 'ओपीसीओएन का हस्तांतरण आपसी भरोसे और दक्षिण कोरिया-अमेरिका गठबंधन के ढाँचे के भीतर होता है।'
प्रगतिशील जिनबो पार्टी की प्रतिनिधि सोन सोल द्वारा पूछे जाने पर कि क्या सोल को ब्रूनसन की टिप्पणियों का कड़ा विरोध करना चाहिए, कांग ने कहा, 'हम इस मामले पर अपना रुख पहले ही बता चुके हैं।' उन्होंने जोड़ा, 'हालांकि यह टिप्पणियाँ सैन्य दृष्टिकोण से की गई थीं, लेकिन हमें उनके व्यापक प्रभावों को लेकर चिंता है।'
सोल और वाशिंगटन में मतभेद
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सोल और वाशिंगटन के बीच ओपीसीओएन हस्तांतरण के समय को लेकर खींचतान चल रही है। सोल चाहता है कि 2030 में राष्ट्रपति ली जे म्युंग का पाँच साल का कार्यकाल समाप्त होने से पहले — संभवतः अगले साल तक — युद्धकालीन ओपीसीओएन का नियंत्रण वाशिंगटन से वापस ले लिया जाए।
वहीं, वाशिंगटन ने राजनीतिक कारणों से इस हस्तांतरण प्रक्रिया में जल्दबाज़ी को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। कांग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि अभी ट्रांसफर हो जाता है तो 'कोई दिक्कत नहीं होगी', क्योंकि इससे मौजूदा ढाँचे की तुलना में 'एक मज़बूत कमांड स्ट्रक्चर' तैयार होगा। उन्होंने बताया कि हस्तांतरण के बाद दक्षिण कोरिया का एक कमांडर संयुक्त बलों का नेतृत्व करेगा, जबकि अमेरिकी सेना सहयोगी भूमिका में रहेगी।
एससीएम बैठक टलने की आशंका
दोनों देशों के रक्षा प्रमुखों के बीच होने वाली वार्षिक सिक्योरिटी कंसल्टेटिव मीटिंग (एससीएम) के टलने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर कांग ने सतर्क जवाब देते हुए कहा, 'एससीएम आयोजित करने वाले अकेले मैं ही नहीं हूँ।' रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में होने वाली यह बैठक दिसंबर तक टल सकती है। इसके पीछे 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, वाशिंगटन के कुछ आंतरिक कारण और ओपीसीओएन को लेकर दोनों देशों के बीच जारी मतभेद बताए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि ओपीसीओएन हस्तांतरण का मुद्दा दशकों पुराना है और कई बार इसकी तारीख आगे खिसकती रही है — यह नवीनतम घटनाक्रम उस लंबे विवाद की एक और कड़ी है। दोनों देश अगले कदम के रूप में एससीएम के आयोजन और द्विपक्षीय वार्ता की ओर देख रहे हैं।