18 अगस्त 2026
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ओपीकॉन हस्तांतरण पर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग का बड़ा फैसला, 2030 तक अमेरिका से वापस लेंगे युद्धकालीन नियंत्रण

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ओपीकॉन हस्तांतरण पर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग का बड़ा फैसला, 2030 तक अमेरिका से वापस लेंगे युद्धकालीन नियंत्रण

सारांश

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने ओपीकॉन हस्तांतरण को 2030 तक पूरा करने का संकल्प लिया — यह दशकों पुरानी सैन्य व्यवस्था में बदलाव का सबसे स्पष्ट संकेत है। परमाणु पनडुब्बी परियोजना में तेजी और ट्रंप के संयुक्त अभ्यास कटौती के निर्देश के बीच, सोल एक नई सैन्य स्वायत्तता की राह पर है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 18 अगस्त 2026 को कैबिनेट बैठक में ओपीकॉन हस्तांतरण को अपने कार्यकाल ( 2030 तक) में पूरा करने का लक्ष्य घोषित किया।
उन्होंने अधिकारियों को परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियाँ हासिल करने की परियोजना में तेजी लाने का निर्देश दिया।
वार्षिक 'उलची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास 27 अगस्त तक जारी रहेगा, जिसमें संयुक्त बलों का नेतृत्व करने की दक्षिण कोरिया की क्षमता परखी जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का निर्देश दिया है; पेंटागन इसे लागू करने में जुटा है।
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और प्योंगयांग-मास्को सैन्य सहयोग के बीच दक्षिण कोरिया की रक्षा स्वायत्तता की माँग और तीव्र हुई है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को कैबिनेट बैठक में स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन दक्षिण कोरियाई सेना का युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण (ओपीकॉन) अमेरिका से वापस लेने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'ओपीकॉन का हस्तांतरण मेरे कार्यकाल के दौरान पूरा किया जाना चाहिए।' ली का वर्तमान कार्यकाल 2030 में समाप्त होगा।

राष्ट्रपति ली का रुख और मुख्य घोषणाएँ

राष्ट्रपति ली ने कैबिनेट बैठक में कहा कि दक्षिण कोरिया को अपनी आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता मजबूत करनी होगी, लेकिन यह प्रक्रिया अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य गठबंधन के समानांतर आगे बढ़नी चाहिए। उनके अनुसार, स्वतंत्र रक्षा क्षमता और द्विपक्षीय गठबंधन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

उन्होंने अधिकारियों को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियाँ हासिल करने की परियोजना में तेजी लाने का भी निर्देश दिया — जो देश की समुद्री रक्षा क्षमता को गुणात्मक रूप से बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओपीकॉन क्या है और इसका महत्त्व

युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण (ओपीकॉन) वह व्यवस्था है जिसके तहत युद्ध की स्थिति में दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी संयुक्त बलों का नेतृत्व अमेरिकी कमांडर के हाथ में रहता है। यह व्यवस्था कोरियाई युद्ध (1950-53) के बाद से चली आ रही है और दशकों से दोनों देशों के सैन्य गठबंधन की आधारशिला रही है। ओपीकॉन हस्तांतरण होने पर युद्धकाल में संयुक्त बलों का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दक्षिण कोरिया के पास आ जाएगी — जो देश की सैन्य संप्रभुता की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम होगा।

गौरतलब है कि ओपीकॉन हस्तांतरण की बात पहले भी कई बार उठी है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और अमेरिकी आपत्तियों के कारण इसे बार-बार टाला गया। ली की यह घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने इसे अपने कार्यकाल की समय-सीमा से जोड़ा है।

उलची फ्रीडम शील्ड अभ्यास और ट्रंप का निर्देश

राष्ट्रपति ली की यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका का वार्षिक 'उलची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास जारी है, जो 27 अगस्त तक चलेगा। इस अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य संभावित उत्तर कोरियाई हमले की स्थिति में संयुक्त सैन्य क्षमता को परखना और दक्षिण कोरिया की संयुक्त बलों का नेतृत्व करने की तैयारी को मजबूत करना है।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का निर्देश दिया है। पेंटागन ने पुष्टि की है कि वह इस निर्देश को लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि ट्रंप के इस निर्देश का ओपीकॉन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य

ली सरकार का यह जोर ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम लगातार क्षेत्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं। इसके साथ ही प्योंगयांग और मास्को के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग ने दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगियों की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है।

आगे क्या होगा

राष्ट्रपति ली ने ओपीकॉन हस्तांतरण को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परमाणु पनडुब्बी परियोजना में तेजी और स्वदेशी रक्षा क्षमता विस्तार के साथ, सोल एक ऐसी रणनीति अपना रहा है जो अमेरिकी गठबंधन को बनाए रखते हुए सैन्य स्वायत्तता की ओर बढ़ती है। अब देखना यह होगा कि वाशिंगटन इस पहल पर किस हद तक सहमति जताता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी राह में कई व्यावहारिक अड़चनें हैं — पिछले कई दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यही वादा कर चुके हैं और हर बार उत्तर कोरियाई खतरे या अमेरिकी आपत्तियों के कारण प्रक्रिया रुकी है। ट्रंप का संयुक्त अभ्यासों में कटौती का निर्देश एक विरोधाभास पैदा करता है: एक तरफ अमेरिका गठबंधन कमजोर कर रहा है, दूसरी तरफ ओपीकॉन हस्तांतरण के लिए दक्षिण कोरिया की 'तैयारी' का मूल्यांकन भी अमेरिकी मानकों पर होना है। परमाणु पनडुब्बी परियोजना में तेजी का निर्देश संकेत देता है कि सोल अब वाशिंगटन की सहमति का इंतजार किए बिना रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में बढ़ने को तैयार है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपीकॉन (OPCON) क्या है और यह दक्षिण कोरिया के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
ओपीकॉन यानी युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण वह अधिकार है जो युद्ध की स्थिति में दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी संयुक्त बलों का नेतृत्व करने का अधिकार देता है — फिलहाल यह अमेरिकी कमांडर के पास है। कोरियाई युद्ध के बाद से चली आ रही इस व्यवस्था को वापस लेना दक्षिण कोरिया की पूर्ण सैन्य संप्रभुता की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम होगा।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने ओपीकॉन हस्तांतरण कब तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है?
राष्ट्रपति ली ने 18 अगस्त 2026 को कैबिनेट बैठक में कहा कि ओपीकॉन हस्तांतरण उनके कार्यकाल के दौरान पूरा होना चाहिए। उनका कार्यकाल 2030 में समाप्त होगा, इसलिए यह समय-सीमा 2030 तक मानी जा रही है।
ट्रंप के संयुक्त सैन्य अभ्यास कटौती के निर्देश का ओपीकॉन हस्तांतरण पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का निर्देश दिया है और पेंटागन इसे लागू करने में जुटा है। चूँकि ओपीकॉन हस्तांतरण के लिए दक्षिण कोरिया की 'युद्धकालीन तैयारी' का मूल्यांकन इन्हीं संयुक्त अभ्यासों के जरिए होता है, इसलिए कटौती से हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
दक्षिण कोरिया परमाणु पनडुब्बी क्यों हासिल करना चाहता है?
राष्ट्रपति ली ने अधिकारियों को परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियाँ हासिल करने की परियोजना में तेजी लाने का निर्देश दिया है। उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम तथा प्योंगयांग-मास्को सैन्य सहयोग के मद्देनजर यह दक्षिण कोरिया की समुद्री रक्षा क्षमता को गुणात्मक रूप से मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
'उलची फ्रीडम शील्ड' अभ्यास क्या है और यह कब तक चलेगा?
'उलची फ्रीडम शील्ड' दक्षिण कोरिया और अमेरिका का वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जो 27 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा। इसका उद्देश्य संभावित उत्तर कोरियाई हमले की स्थिति में संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना और दक्षिण कोरिया की संयुक्त बलों का नेतृत्व करने की तैयारी को परखना है।
राष्ट्र प्रेस
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