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कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के लिए राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अपील, उत्तर कोरिया-अमेरिका वार्ता में मदद का संकल्प

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कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के लिए राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अपील, उत्तर कोरिया-अमेरिका वार्ता में मदद का संकल्प

सारांश

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 2018 की प्योंगयांग घोषणा की वर्षगाँठ पर कोरियाई प्रायद्वीप में युद्धविराम की जगह स्थायी शांति की माँग दोहराई और उत्तर कोरिया-अमेरिका वार्ता को आगे बढ़ाने में सोल की भूमिका का वचन दिया — ऐसे वक्त में जब ट्रंप प्रशासन प्योंगयांग के साथ फिर से संपर्क के संकेत दे रहा है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 18 सितंबर 2026 को नेशनल असेंबली में कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
समारोह 19 सितंबर 2018 की प्योंगयांग संयुक्त घोषणा की वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित था, जिस पर तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे-इन और किम जोंग-उन ने हस्ताक्षर किए थे।
राष्ट्रपति ली ने उत्तर कोरिया-अमेरिका वार्ता को शीघ्र शुरू कराने में दक्षिण कोरिया की मध्यस्थ भूमिका का वचन दिया; माना जाता है कि उनका इशारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल की ओर था।
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने 'बास्केट अप्रोच' का प्रस्ताव रखा — परमाणु निरस्त्रीकरण को पहली शर्त बनाने के बजाय कई मुद्दों पर एक साथ काम करना।
चुंग ने स्पष्ट कहा कि पहले परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त रखने पर उत्तर कोरिया के साथ बातचीत कभी संभव नहीं हो पाएगी।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 18 सितंबर 2026 को सोल स्थित नेशनल असेंबली में एक बार फिर यह संकल्प दोहराया कि वह 1950-53 के कोरियाई युद्ध को रोकने वाले युद्धविराम समझौते की जगह कोरियाई प्रायद्वीप में एक स्थायी शांति व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वार्ता दोबारा शुरू कराने में सक्रिय भूमिका निभाएगी।

किस अवसर पर दिया गया यह संबोधन

यह समारोह प्योंगयांग संयुक्त घोषणा की वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस ऐतिहासिक घोषणा पर 19 सितंबर 2018 को तत्कालीन दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने प्योंगयांग में अपनी शिखर बैठक के बाद हस्ताक्षर किए थे। उस घोषणा में दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य तनाव समाप्त करने और आपसी सहयोग बढ़ाने का वचन दिया था। राष्ट्रपति ली का लिखित भाषण उनके राजनीतिक मामलों के विशेष सलाहकार किम क्यूंग-सू ने पढ़कर सुनाया।

मौजूदा हालात और बढ़ता तनाव

राष्ट्रपति ली ने स्वीकार किया कि 2018 की घोषणा के बावजूद उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संवाद व सहयोग ठप पड़ गया है, जबकि तनाव पहले से कहीं अधिक बढ़ा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इसी अवधि में उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु हथियार क्षमता में तेज़ी से विस्तार किया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप में कूटनीतिक गतिविधियाँ एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

वार्ता में दक्षिण कोरिया की भूमिका

राष्ट्रपति ली ने कहा कि अब उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'हमारी सरकार पूरी कोशिश करेगी कि यह पहल उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने तक पहुंचे और आगे चलकर कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध खत्म करने तथा शांति व्यवस्था स्थापित करने पर बातचीत में बदले।' माना जाता है कि उनका यह इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पहल की ओर था, जिसके तहत वे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ कूटनीतिक संवाद फिर से स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं।

एकीकरण मंत्री का 'बास्केट अप्रोच' प्रस्ताव

इससे एक दिन पहले गुरुवार, 17 सितंबर को दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने एक अकादमिक फोरम में स्पष्ट कहा कि यदि उत्तर कोरिया से पहले परमाणु हथियार छोड़ने की शर्त रखी जाए, तो बातचीत दोबारा कभी संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'हम पुराने तरीके को दोहराकर कोई बातचीत शुरू नहीं कर सकते, जिसमें पहले कार्रवाई करने और बाद में बदले में कुछ देने की बात होती थी और परमाणु निरस्त्रीकरण को पहली शर्त बनाया जाता था।'

चुंग ने एक 'बास्केट अप्रोच' का प्रस्ताव रखा, जिसमें कई जुड़े हुए मुद्दों को एक साथ आगे बढ़ाने की बात है — कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करना, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को मज़बूत बनाना, उत्तर कोरिया-अमेरिका संबंधों को सामान्य करना, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना और उत्तर-दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग पुनः शुरू करना।

क्या होगा आगे

दक्षिण कोरिया की सरकार ने संकेत दिया है कि वह 2018 की प्योंगयांग घोषणा को एक मार्गदर्शक दस्तावेज़ मानते हुए अपनी कूटनीतिक कोशिशें जारी रखेगी। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन उत्तर कोरिया के साथ संपर्क के संकेत दे रहा है और सोल उस खिड़की का लाभ उठाने के लिए सक्रिय है। विश्लेषकों के अनुसार, असली चुनौती यह होगी कि प्योंगयांग इस पहल का कैसे जवाब देता है — खासकर तब जब उसने हाल के वर्षों में अंतर-कोरियाई संवाद के सभी चैनल बंद कर दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बुनियादी विरोधाभास भी है — दक्षिण कोरिया मध्यस्थ बनना चाहता है, जबकि प्योंगयांग ने पिछले कई वर्षों में सोल के साथ सभी संचार चैनल बंद कर दिए हैं। 'बास्केट अप्रोच' का विचार यथार्थवादी लगता है, किंतु उत्तर कोरिया ने आज तक किसी ऐसी व्यापक वार्ता में भाग नहीं लिया जहाँ उसके परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा हो। असली परीक्षण यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन सोल को एक सार्थक भूमिका देगा, या फिर एक बार और अमेरिका-उत्तर कोरिया संपर्क दक्षिण कोरिया को दरकिनार कर होगा — जैसा कि 2018-19 की शिखर वार्ताओं में कई बार हुआ था।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति ली ने 18 सितंबर 2026 को नेशनल असेंबली में कहा कि वे 1950-53 के कोरियाई युद्ध को रोकने वाले युद्धविराम समझौते की जगह एक स्थायी शांति व्यवस्था बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वार्ता दोबारा शुरू कराने में मदद करेगा।
प्योंगयांग संयुक्त घोषणा 2018 क्या थी?
19 सितंबर 2018 को तत्कालीन दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने प्योंगयांग में शिखर बैठक के बाद इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य तनाव समाप्त करने और आपसी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था। हालाँकि इसके बाद से बातचीत ठप रही और तनाव बढ़ता गया।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री का 'बास्केट अप्रोच' क्या है?
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने प्रस्तावित किया कि उत्तर कोरिया से परमाणु निरस्त्रीकरण को पहली शर्त बनाने के बजाय कई मुद्दों पर एक साथ काम किया जाए। इसमें कोरियाई युद्ध की औपचारिक समाप्ति, उत्तर कोरिया-अमेरिका संबंध सामान्यीकरण, परमाणु कार्यक्रम पर रोक और अंतर-कोरियाई आर्थिक सहयोग शामिल हैं।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वार्ता की संभावना कितनी है?
राष्ट्रपति ली के अनुसार उत्तर कोरिया-अमेरिका बातचीत दोबारा शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। माना जाता है कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पहल की ओर इशारा है, जिसके तहत वे किम जोंग-उन के साथ कूटनीतिक संवाद बहाल करने की कोशिश करते रहे हैं। दक्षिण कोरिया इस प्रक्रिया में मध्यस्थ भूमिका चाहता है।
क्या परमाणु निरस्त्रीकरण को बातचीत की शर्त बनाना सही है?
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने स्पष्ट कहा कि यदि उत्तर कोरिया से पहले परमाणु हथियार छोड़ने की शर्त रखी जाए, तो बातचीत कभी संभव नहीं होगी। उन्होंने पुराने 'पहले कार्रवाई, बाद में इनाम' के मॉडल को अव्यावहारिक बताया और बहु-मुद्दा एक साथ आगे बढ़ाने का रास्ता सुझाया।
राष्ट्र प्रेस
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