दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड बारिश से तबाही: 2,574 घटनाएँ, 1 मौत; 306 संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही बंद
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में शनिवार, 16 अगस्त 2026 से जारी रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। केंद्रीय आपदा एवं सुरक्षा प्रतिरोध मुख्यालय के अनुसार, मंगलवार, 18 अगस्त की सुबह छह बजे तक कुल 2,574 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिनमें घरों-सड़कों पर जलभराव, पेड़ों का गिरना और भूस्खलन शामिल हैं। इस आपदा में अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है और चार लोग घायल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
दर्ज 2,574 मामलों में से 162 मामले बचाव अभियानों से सीधे जुड़े हैं। मृतक और दो घायलों का संबंध दक्षिणी शहर जियोझे में हुए भूस्खलन से है, जहाँ भारी बारिश के चलते एक अपार्टमेंट इमारत बुरी तरह प्रभावित हुई। दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत, पड़ोसी शहर बुसान और दक्षिणी द्वीप जेजू में 560 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। इनमें से 316 लोग अपने घर लौट चुके हैं, जबकि 248 लोग अभी भी राहत शिविरों में हैं।
वर्षा के आँकड़े
मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार आधी रात से मंगलवार सुबह 5 बजे तक के बीच दर्ज वर्षा के आँकड़े चौंकाने वाले हैं। जियोझे में सर्वाधिक 956.1 मिमी बारिश हुई। टोंगयोंग में 766.9 मिमी, बुसान के गाडेओक द्वीप पर 518 मिमी, जेजू के सेओगसान में 477 मिमी और साचेओन में 430.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यह आँकड़े इस क्षेत्र में सामान्य मौसमी औसत से कई गुना अधिक हैं।
बुनियादी ढाँचे पर असर
भारी बारिश से बिजली आपूर्ति और जलापूर्ति दोनों बाधित हुई हैं। सड़क संपर्क टूटने और पुलों के जलमग्न होने से कई इलाके अस्थायी रूप से कट गए। हालाँकि, विमान, रेल और फेरी सेवाएँ सामान्य रूप से जारी रही हैं।
प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय
भारी बारिश की चेतावनियाँ अब वापस ले ली गई हैं, लेकिन अधिकारियों ने सतर्कता बरकरार रखी है। तीन राष्ट्रीय उद्यानों के 255 हिस्सों और नदी किनारे के पैदल मार्गों तथा निचले पुलों समेत कुल 306 संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध अभी भी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया में मानसून का मौसम अपने चरम पर होता है और हर वर्ष भूस्खलन व बाढ़ की घटनाएँ सामने आती हैं।
आगे की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य जारी है। 248 विस्थापित लोगों की घर वापसी की प्रक्रिया इलाकों की सुरक्षा जाँच के बाद ही शुरू होगी। संवेदनशील क्षेत्रों में लगे प्रतिबंध तब तक बने रहेंगे जब तक भूस्खलन और जलभराव का खतरा पूरी तरह नहीं टल जाता।