डीआरसी सरकार और एम23 के बीच शांति वार्ता रोडमैप पर सहमति, 24 अगस्त को पहला संघर्ष-विराम सत्यापन मिशन
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) की सरकार और विद्रोही गुट 'मार्च 23 मूवमेंट' (एम23) ने शांति वार्ता के लिए एक औपचारिक रोडमैप पर सहमति जता दी है, जिसमें आगे की बातचीत का क्रम और समय-सीमा दोनों निर्धारित की गई हैं। एक संयुक्त बयान के अनुसार, यह सहमति स्विट्जरलैंड में 17 से 21 अगस्त के बीच हुई बैठकों के बाद बनी।
बातचीत में क्या हुआ
दोनों पक्षों ने स्विट्जरलैंड में हुई इन बैठकों के दौरान दोहा शांति प्रक्रिया में अब तक हुई प्रगति और सामने आई चुनौतियों का विस्तृत आकलन किया। इसके बाद उन्होंने मौजूदा वादों को लागू करने और दोहा फ्रेमवर्क समझौते के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने के ठोस तरीकों पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्ष फ्रेमवर्क समझौते के तहत दायित्वों की पूर्ति में हुई प्रगति की नियमित समीक्षा और चुनौतियों के समाधान के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करने पर भी सहमत हुए।
संघर्ष-विराम सत्यापन की दिशा में कदम
दोनों पक्षों ने संघर्ष-विराम सत्यापन तंत्र को सक्रिय करने में हुई प्रगति का स्वागत किया। बयान के अनुसार, इस तंत्र का पहला सत्यापन मिशन 24 अगस्त को पूर्वी डीआरसी के साउथ किवु प्रांत के मिनेंब्वे में निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, संघर्ष-विराम के कथित उल्लंघनों की रिपोर्टिंग के लिए एक मानक प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
मानवीय सहायता और कैदियों की रिहाई
इससे पहले अप्रैल में स्विट्जरलैंड के मोंट्रोक्स में 13 से 17 अप्रैल तक हुई बैठकों में दोनों पक्षों ने मानवीय सहायता की पहुँच और न्यायिक सुरक्षा पर एक प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने की दिशा में 'काफी प्रगति' की थी। उन्होंने नागरिकों के जीवित रहने के लिए आवश्यक संपत्ति को नष्ट करने या उस पर कब्जा करने से बचने का वचन दिया था। पूर्वी डीआरसी के संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित, सुरक्षित और निर्बाध मानवीय सहायता पहुँचाने तथा राहत काफिलों की आवाजाही को सुगम बनाने का वादा भी किया गया था। आपसी विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों पक्ष पूर्व-निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत 10 दिनों के भीतर कैदियों को रिहा करने पर भी राजी हुए थे।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जनवरी 2025 से एम23 ने पूर्वी डीआरसी के उत्तरी किवु और दक्षिणी किवु प्रांतों में अपने हमले तेज कर दिए हैं और कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया है। यह संघर्ष क्षेत्र में लाखों नागरिकों को विस्थापित कर चुका है और मानवीय संकट को गहरा बनाता जा रहा है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों ने व्यापक शांति और संघर्ष समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 24 अगस्त को मिनेंब्वे में होने वाला पहला संघर्ष-विराम सत्यापन मिशन इस पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक परीक्षा होगी — और यह तय करेगा कि रोडमैप कागज़ से ज़मीन पर उतर पाता है या नहीं।