23 अक्टूबर 2026
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बीएपीएस संत ब्रह्मविहारी स्वामी बोले — एफिल टावर विवाद 'गलतफहमी' थी, प्रबंधन पर नहीं डाला दोष

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बीएपीएस संत ब्रह्मविहारी स्वामी बोले — एफिल टावर विवाद 'गलतफहमी' थी, प्रबंधन पर नहीं डाला दोष

सारांश

बीएपीएस संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने पेरिस के एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को अलग किए जाने के विवाद को 'गलतफहमी' बताकर प्रबंधन का बचाव किया। जाँच में कोई लिखित माँग नहीं मिली। यह सफाई भारतीय धार्मिक संस्थाओं और पश्चिमी देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद की ज़रूरत को नए सिरे से रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

बीएपीएस संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने 23 अक्टूबर 2026 को एफिल टावर विवाद को 'गलतफहमी' बताया।
5 सितंबर को बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अलग रखने की खबरों के बाद एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।
पेरिस महानिरीक्षण विभाग की जाँच में महिलाओं को अलग रखने की कोई लिखित माँग नहीं मिली; 'ले पेरिसियन' के अनुसार संचार की कमी मुख्य कारण रही।
स्वामी ने स्पष्ट किया कि ब्रह्मचर्य एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प है, महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव नहीं।
बीएपीएस ने फ्रांस में मंदिर निर्माण की अनुमति के लिए करीब दस वर्षों तक स्थानीय अधिकारियों से संवाद किया था।
सीन नदी की शोभायात्रा में 5,500 लोगों ने 11 नौकाओं पर भाग लिया था।

बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने 5 सितंबर 2026 को पेरिस के एफिल टावर में बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अलग किए जाने से जुड़े विवाद को 'गलतफहमी' करार दिया है। उन्होंने नई दिल्ली में 23 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि इस घटना के लिए वे एफिल टावर प्रबंधन को ज़िम्मेदार नहीं ठहराते।

क्या था पूरा विवाद

विवाद उस समय सुर्खियों में आया जब रिपोर्टें सामने आईं कि 5 सितंबर को बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान एफिल टावर की कुछ महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से हटाया गया या उन्हें प्रतिनिधिमंडल की नज़रों से दूर रखा गया। इसके बाद कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण एफिल टावर को एक दिन के लिए बंद करना पड़ा।

यह ऐसे समय में आया जब फ्रांस में धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता को सर्वोच्च सामाजिक मूल्य माना जाता है, और इस घटना ने वहाँ व्यापक आलोचना को जन्म दिया।

जाँच में क्या निकला

फ्रांसीसी अखबार 'ले पेरिसियन' के अनुसार, पेरिस शहर के महानिरीक्षण विभाग की जाँच में कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला कि बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल ने पूरे आयोजन के दौरान महिलाओं को अलग रखने की स्पष्ट माँग की थी। जाँच में संचार की कमी और सामूहिक स्तर पर हुई गड़बड़ी को मुख्य कारण बताया गया।

ब्रह्मविहारी स्वामी ने इसी निष्कर्ष की पुष्टि करते हुए कहा, "यह एफिल टावर की तरफ से हुई एक गलतफहमी थी। मैं उन्हें भी इसके लिए दोष नहीं देता।"

स्वामी की सफाई और बीएपीएस का पक्ष

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में 'बियॉन्ड इंटेलिजेंस: एआई, फेथ एंड द मीनिंग ऑफ बीइंग ह्यूमन' सत्र के दौरान बोलते हुए ब्रह्मविहारी स्वामी ने स्पष्ट किया कि बीएपीएस संतों द्वारा पालन किया जाने वाला ब्रह्मचर्य एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प है — इसका अर्थ महिलाओं का विरोध या उनके साथ भेदभाव करना नहीं है। उन्होंने कहा, "हम संत अपने आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हैं, लेकिन उन्हें किसी और पर लागू नहीं करते।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि किसी महिला की जान खतरे में हो तो संतों को अपने व्यक्तिगत नियम एक तरफ रखकर सबसे पहले उसकी सहायता करनी चाहिए — यह टिप्पणी बीएपीएस की प्राथमिकताओं की सार्वजनिक पुनर्स्थापना के रूप में देखी जा रही है।

बीएपीएस और फ्रांस का दीर्घकालिक सम्बंध

ब्रह्मविहारी स्वामी ने बताया कि फ्रांस में मंदिर निर्माण की अनुमति पाने से पहले बीएपीएस ने करीब दस वर्षों तक वहाँ के अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा। उन्होंने सीन नदी पर आयोजित एक सांस्कृतिक शोभायात्रा का भी उल्लेख किया जिसमें लगभग 5,500 लोगों ने 11 नौकाओं पर भाग लिया था।

गौरतलब है कि एफिल टावर प्रबंधन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था और यात्रा सामान्य खुलने के समय में ही की गई थी, ताकि अन्य पर्यटकों को कोई असुविधा न हो।

आगे की राह

इस घटनाक्रम ने भारतीय धार्मिक संस्थाओं और पश्चिमी देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। ब्रह्मविहारी स्वामी की इस सार्वजनिक सफाई से दोनों पक्षों के बीच जमी बर्फ पिघलने और आपसी समझ बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अलगाव की घटना को नकारा नहीं। फ्रांस जैसे देश में, जहाँ लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता संवैधानिक मूल्य हैं, धार्मिक अनुशासन और सार्वजनिक स्थान के बीच की रेखा को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल की अनुपस्थिति ही असली खामी है — और यह खामी केवल बीएपीएस की नहीं, एफिल टावर प्रबंधन की भी है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएपीएस और एफिल टावर विवाद क्या है?
5 सितंबर 2026 को पेरिस के एफिल टावर में बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर उनकी ड्यूटी से हटाया गया या प्रतिनिधिमंडल से दूर रखा गया। इसके बाद कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के कारण एफिल टावर एक दिन के लिए बंद करना पड़ा।
ब्रह्मविहारी स्वामी ने इस विवाद पर क्या कहा?
ब्रह्मविहारी स्वामी ने इसे 'गलतफहमी' करार दिया और एफिल टावर प्रबंधन को दोषी नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि बीएपीएस ने महिलाओं को अलग रखने की कोई स्पष्ट माँग नहीं की थी।
पेरिस की आधिकारिक जाँच में क्या सामने आया?
पेरिस शहर के महानिरीक्षण विभाग की जाँच में कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला कि बीएपीएस ने महिलाओं को अलग रखने की माँग की हो। फ्रांसीसी अखबार 'ले पेरिसियन' के अनुसार जाँच में संचार की कमी और सामूहिक स्तर पर हुई गड़बड़ी की बात सामने आई।
बीएपीएस संतों का ब्रह्मचर्य नियम क्या है और क्या यह महिलाओं के खिलाफ है?
ब्रह्मविहारी स्वामी के अनुसार ब्रह्मचर्य एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प है, जिसका अर्थ महिलाओं का विरोध या उनके साथ भेदभाव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत अपने नियम किसी और पर लागू नहीं करते।
इस विवाद का फ्रांस में बीएपीएस की गतिविधियों पर क्या असर पड़ा?
फ्रांस में इस विवाद की व्यापक आलोचना हुई, क्योंकि वहाँ धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता को बहुत महत्व दिया जाता है। हालाँकि बीएपीएस ने बताया कि मंदिर निर्माण की अनुमति के लिए उन्होंने करीब दस वर्षों तक फ्रांसीसी अधिकारियों से निरंतर संवाद किया है, जो उनके दीर्घकालिक सम्बंध को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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