बीएपीएस विवाद: एफिल टावर जांच में पुष्टि, संस्था ने महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी
सारांश
मुख्य बातें
बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) को एफिल टावर विवाद में बड़ी राहत मिली है — 2 अक्टूबर 2026 को सामने आए आधिकारिक जांच के नतीजों में यह स्पष्ट हो गया कि संस्था ने पेरिस के एफिल टावर पर अपनी निजी यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को परिसर से हटाने या वहाँ उपस्थित न रहने देने की कोई माँग नहीं की थी। यह जांच उन आरोपों के मद्देनज़र कराई गई थी, जिनके चलते एफिल टावर के कर्मचारियों ने हड़ताल तक कर दी थी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला सितंबर 2026 में उस समय सामने आया जब बीएपीएस से जुड़े लगभग 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल फ्रांस आया था। यह दल पेरिस के बाहरी इलाके में एक नए मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए वहाँ पहुँचा था। इसी दौरे के तहत प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर की निजी यात्रा भी की।
एफिल टावर के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को परिसर से हटाया गया, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल की और यह विवाद अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।
बीएपीएस का पक्ष और आधिकारिक सफाई
बीएपीएस ने शुरू से ही इन आरोपों को नकारा था। संस्था ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया था कि यात्रा की व्यवस्था एफिल टावर प्रबंधन के सहयोग से की गई थी और इसे सामान्य खुलने के समय से ठीक पहले इसलिए रखा गया ताकि अन्य पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो।
बीएपीएस के बयान में कहा गया था, 'हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को भी एफिल टावर में प्रवेश से नहीं रोका गया। फिर भी, अगर किसी को दुख पहुँचा है या किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो हम इसके लिए दिल से माफी माँगते हैं।' संस्था ने यह भी कहा कि वह 'आपसी सम्मान और सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों में विश्वास रखती है।'
जांच के नतीजे
अब आधिकारिक जांच में भी बीएपीएस के इस दावे की पुष्टि हो गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की ओर से महिला कर्मचारियों को विजिट के रास्ते से हटाने या उन्हें वहाँ मौजूद न रहने देने की कोई माँग नहीं की गई थी। जांच के नतीजे आने के बाद बीएपीएस ने इस घटना से प्रभावित कर्मचारियों के प्रति अपनी चिंता जताई।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया था जब भारतीय धार्मिक संस्थाओं की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ वैश्विक मीडिया की नज़र में थीं। जांच के नतीजों ने संस्था की स्थिति को मज़बूत किया है।
बीएपीएस की प्रतिक्रिया और आगे की राह
बीएपीएस ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि इस सफाई से घटना से जुड़े हालात को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी और इसमें शामिल सभी लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए आगे बढ़ सकेंगे।' संस्था ने यह भी दोहराया कि उसने न तो कभी महिला कर्मचारियों को छिपाने की माँग की, न हटाने की, और न ही उन्हें दूर रखने की।
यह मामला अब आधिकारिक जाँच के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है — जहाँ तथ्य सामने आ जाने के बावजूद, प्रभावित पक्षों के बीच विश्वास और सम्मान बहाल करने की प्रक्रिया आने वाले समय में जारी रहेगी।