18 जुलाई 2026
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चीन-तुर्की सुरक्षा सहयोग पर ईटीजीई का विरोध, शिनजियांग में दमन को मिल रहा बल — आरोप

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चीन-तुर्की सुरक्षा सहयोग पर ईटीजीई का विरोध, शिनजियांग में दमन को मिल रहा बल — आरोप

सारांश

चीन-तुर्की के बीच 16 जुलाई को बीजिंग में हुई सुरक्षा वार्ता के बाद ईटीजीई ने इसे 'कूटनीति नहीं, मिलीभगत' करार दिया। निर्वासित सरकार का आरोप है कि तीन दशकों से तुर्किये उइगर आंदोलन को कुचलने में चीन का साथ दे रहा है और अब यह सहयोग और गहरा हो रहा है।

मुख्य बातें

ईटीजीई ने 18 जुलाई 2026 को चीन और तुर्की के बढ़ते सुरक्षा सहयोग की कड़ी निंदा की।
16 जुलाई को बीजिंग में चीनी उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरीस एकिनजी के बीच राजनीतिक वार्ता हुई।
तुर्की ने बैठक में 'वन चाइना' नीति के प्रति समर्थन दोहराया और कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने आरोप लगाया कि तीन दशकों से तुर्किये ईस्ट तुर्किस्तान आंदोलन को कमजोर करने में चीन का सहयोग कर रहा है।
संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने और उइगरों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करने की अपील की।

ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) ने 18 जुलाई 2026 को चीन और तुर्की के बीच गहराते कूटनीतिक व सुरक्षा सहयोग की कड़े शब्दों में निंदा की और आरोप लगाया कि यह बढ़ती नजदीकी शिनजियांग (जिसे ईटीजीई 'ईस्ट तुर्किस्तान' कहता है) में चीन के कथित दमनकारी अभियान को और प्रोत्साहन दे रही है। यह प्रतिक्रिया 16 जुलाई को बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय राजनयिक वार्ता के ठीक बाद सामने आई है।

बीजिंग वार्ता का घटनाक्रम

चीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरीस एकिनजी के बीच 16 जुलाई को बीजिंग में राजनीतिक परामर्श बैठक आयोजित हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों ने कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने पर चर्चा की। तुर्की ने इस अवसर पर 'वन चाइना' नीति के प्रति अपना समर्थन दोहराया और स्पष्ट किया कि वह अपनी भूमि का उपयोग चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध नहीं होने देगा।

ईटीजीई की तीखी प्रतिक्रिया

निर्वासित सरकार ने इस वार्ता को 'कूटनीति नहीं, बल्कि मिलीभगत' करार दिया। ईटीजीई का आरोप है कि पिछले लगभग तीन दशकों से तुर्किये चीन के साथ मिलकर ईस्ट तुर्किस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन की निगरानी करने, उसे कमजोर करने और उसके समर्थकों पर दबाव बनाने में सहयोग करता आ रहा है। संगठन ने शिनजियांग को 'कब्जे वाला क्षेत्र' बताते हुए कहा कि यह सहयोग उइगर, कजाख, किर्गिज और अन्य तुर्की समुदायों के साथ दशकों से जारी विश्वासघात का नया अध्याय है।

ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने कहा कि उन्होंने पहले तुर्की से ईस्ट तुर्किस्तान के लोगों के पक्ष में आवाज उठाने की अपील की थी, परंतु इसके बजाय अंकारा बीजिंग के साथ अपने सहयोग को और विस्तार दे रहा है।

प्रवासी समुदाय पर असर

ईटीजीई ने आरोप लगाया कि इस द्विपक्षीय सहयोग के चलते विदेशों में रह रहे ईस्ट तुर्किस्तानी शरणार्थियों और प्रवासी समुदाय पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि इससे उनके स्वतंत्रता आंदोलन को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन शिनजियांग में उइगरों की स्थिति को लेकर पहले से ही चिंता जता रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

ईटीजीई ने वैश्विक समुदाय से तीन ठोस माँगें रखी हैं — तुर्की की कथित भूमिका की निंदा करना, शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाना, और ईस्ट तुर्किस्तान के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करना। आलोचकों का कहना है कि चीन और तुर्की दोनों ने इन आरोपों को अब तक सार्वजनिक रूप से खारिज नहीं किया है, जो कि स्वयं में एक कूटनीतिक संकेत है।

आगे की राह

यह टकराव ऐसे समय में उभरा है जब तुर्की नाटो सदस्य होते हुए भी चीन के साथ अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करता जा रहा है। ईटीजीई की यह अपील पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संस्थाओं को एक बार फिर शिनजियांग मुद्दे पर ठोस नीतिगत प्रतिक्रिया देने के लिए दबाव में डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पश्चिमी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है। 'वन चाइना' नीति के प्रति तुर्की का सार्वजनिक समर्थन कोई नई बात नहीं, लेकिन कानून प्रवर्तन सहयोग का विस्तार ईटीजीई की चिंताओं को ठोस आधार देता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बिंदु को चूक जाती है कि तुर्किये की यह नीति आंतरिक आर्थिक दबावों और चीन के साथ व्यापारिक निर्भरता से भी प्रेरित है। जब तक पश्चिमी देश तुर्की को ठोस विकल्प नहीं देते, अंकारा का बीजिंग की ओर झुकाव जारी रहने की संभावना है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) क्या है?
ईटीजीई एक निर्वासित संगठन है जो शिनजियांग (जिसे वे 'ईस्ट तुर्किस्तान' कहते हैं) के उइगर और अन्य तुर्की समुदायों के अधिकारों की वकालत करता है। यह संगठन चीन पर शिनजियांग में दमनकारी नीतियाँ लागू करने का आरोप लगाता है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सक्रिय है।
16 जुलाई की चीन-तुर्की वार्ता में क्या हुआ?
16 जुलाई को बीजिंग में चीनी उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरीस एकिनजी के बीच राजनीतिक परामर्श बैठक हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने कानून प्रवर्तन व सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की और तुर्की ने 'वन चाइना' नीति के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
ईटीजीई ने चीन-तुर्की सहयोग पर आपत्ति क्यों जताई?
ईटीजीई का आरोप है कि यह सहयोग शिनजियांग में उइगरों पर चीन के कथित दमन को प्रोत्साहन देता है और विदेशों में रह रहे ईस्ट तुर्किस्तानी प्रवासियों पर दबाव बढ़ाता है। संगठन का कहना है कि तुर्किये लगभग तीन दशकों से ईस्ट तुर्किस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर करने में चीन का सहयोग करता आ रहा है।
इस विवाद से उइगर प्रवासी समुदाय पर क्या असर पड़ रहा है?
ईटीजीई के अनुसार, चीन-तुर्की सुरक्षा सहयोग के कारण विदेशों में रह रहे ईस्ट तुर्किस्तानी शरणार्थियों और प्रवासियों पर निगरानी व दबाव बढ़ रहा है। संगठन का आरोप है कि इससे उनके स्वतंत्रता आंदोलन को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है।
ईटीजीई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या माँगें रखी हैं?
ईटीजीई ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — तुर्की की कथित भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा, शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए ठोस कदम, और ईस्ट तुर्किस्तान के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन। ये माँगें पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संस्थाओं को संबोधित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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