जेलेंस्की के UPA नामकरण फैसले पर यूरोपीय संसद ने जताई नाराजगी, पोलैंड से बढ़ा तनाव
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संसद ने 9 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस विवादास्पद निर्णय की आलोचना की गई है जिसके तहत एक यूक्रेनी सैन्य यूनिट का नाम द्वितीय विश्व युद्ध कालीन संगठन 'यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी' (UPA) के नाम पर रखा गया। इस कदम ने पोलैंड और यूक्रेन के बीच गहरे कूटनीतिक तनाव को जन्म दिया है।
यूरोपीय संसद का संशोधन और उसकी भाषा
यूरोपीय संसद के बहुमत सदस्यों ने इस संशोधन के पक्ष में मतदान किया। संशोधन में जेलेंस्की के इस कदम को 'हाल का अनावश्यक और बिना वजह किया गया तनाव बढ़ाने वाला फैसला' करार दिया गया। प्रस्ताव में यह भी रेखांकित किया गया कि रूस के सैन्य हमले के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में पोलैंड ने महत्वपूर्ण समर्थन दिया है।
यह संशोधन यूरोपीय पीपुल्स पार्टी से जुड़े पोलिश सांसद आंद्रेज हालिकी और उनके जर्मन सहयोगी माइकल गेहलर ने पेश किया था। इसे यूक्रेन के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने की प्रक्रिया पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में सम्मिलित किया गया।
UPA को लेकर दो देशों की अलग-अलग स्मृति
यूक्रेन में UPA को सोवियत शासन के विरुद्ध प्रतिरोध और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसके विपरीत, पोलैंड में इस संगठन को 1943-45 के वोलिन नरसंहार से जोड़ा जाता है, जिसमें नाजी कब्जे के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों की मौत हुई थी। पोलैंड इसे नरसंहार मानता है, जबकि यूक्रेन इस वर्गीकरण से असहमत है — यह ऐतिहासिक विवाद दशकों से दोनों देशों के संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि जेलेंस्की के फैसले से UPA से जुड़े हजारों पीड़ितों और उनके परिजनों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया है, जिनका पोलैंड में गहरा सम्मान है।
पोलैंड की कड़ी प्रतिक्रिया
जेलेंस्की के इस निर्णय के बाद पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉवरोकी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल' वापस ले लिया। यह सम्मान जेलेंस्की को 2023 में प्रदान किया गया था। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव का प्रतीक है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यह कदम पड़ोसी देशों के संबंधों को प्रभावित करता है और यूरोपीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है। यूक्रेन और पोलैंड दोनों से तनाव कम करने और आपसी सुलह की दिशा में प्रयास करने की अपील की गई।
यूक्रेन के EU प्रवेश पर असर
गौरतलब है कि इस संशोधन के बावजूद यूरोपीय संसद के समग्र प्रस्ताव में यूक्रेन के प्रति समर्थन दोहराया गया और EU में शामिल होने की दिशा में उसकी प्रगति को मान्यता दी गई। 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से EU देशों ने यूक्रेन को सैन्य, आर्थिक और मानवीय सहायता प्रदान की है। EU ने रूस पर व्यापक प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिनमें राजनीतिक नेताओं, सैन्य आपूर्ति, ऊर्जा राजस्व और वित्तीय प्रणाली को निशाना बनाया गया है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब यूक्रेन EU सदस्यता वार्ता में महत्वपूर्ण चरण में है और पोलैंड जैसे सहयोगी देशों का समर्थन उसके लिए अनिवार्य है।