फिनलैंड राष्ट्रपति स्टब ने भारत को बताया 'प्रभावशाली देश', जयशंकर संग कुलतारना में वैश्विक मुद्दों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने 12 जून 2026 को हेलसिंकी में आयोजित कुलतारना टॉक्स के दौरान भारत को वैश्विक मंच पर एक 'प्रभावशाली देश' करार दिया और कहा कि नई दिल्ली की राय को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई द्विपक्षीय मुलाकात के तुरंत बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
स्टब का बयान और मुलाकात का एजेंडा
राष्ट्रपति स्टब ने एक्स पर लिखा, 'आज हमने कुलतारना में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। हमने मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों और आने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन पर चर्चा की। भारत एक प्रभावशाली देश है, जिसकी राय सुनना बहुत महत्वपूर्ण है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश वैश्विक संघर्षों पर भारत की तटस्थ लेकिन सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को और करीब से समझना चाहते हैं।
जयशंकर की प्रतिक्रिया और भारत-फिनलैंड साझेदारी
विदेश मंत्री जयशंकर ने भी इस मुलाकात की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए कहा, 'कुलतारना वार्ता के मौके पर फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब से मिलकर खुशी हुई। हमने बदलती वैश्विक स्थिति पर विचार साझा किए और इस बात पर जोर दिया कि इस अनिश्चित दुनिया में कूटनीति कितनी जरूरी है।' उन्होंने आगे कहा कि भारत और फिनलैंड अपनी रणनीतिक साझेदारी को डिजिटल तकनीक और सतत विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।
भू-राजनीतिक चर्चा: उभरती शक्तियाँ और नई प्रतिस्पर्धा
जयशंकर ने फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और यूएई की विदेश राज्य मंत्री लाना नुसेबेह के साथ 'उभरती शक्तियाँ और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा' विषय पर एक सत्र में भी भाग लिया। इस चर्चा में उन्होंने रेखांकित किया कि दुनिया के किसी भी कोने में चल रहे संघर्षों का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी लहरें वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुँचती हैं।
ऊर्जा नीति और सप्लाई चेन पर भारत का रुख
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और देश अपनी जरूरत के अनुसार सस्ती व उपलब्ध ऊर्जा खरीदता है। उन्होंने सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और विविधतापूर्ण बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि विश्व किसी एक स्रोत पर निर्भर न रहे। गौरतलब है कि यह रुख रूस से भारत के तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचनाओं के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।
भारत-खाड़ी संबंध और आगे की राह
विदेश मंत्री ने भारत और खाड़ी देशों के बीच संबंधों की मजबूत नींव का भी उल्लेख किया, जो लोगों के आपसी संपर्क, ऊर्जा सहयोग और बढ़ते रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग पर टिकी है। कुलतारना टॉक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता यह संकेत देती है कि नई दिल्ली वैश्विक कूटनीतिक विमर्श में केंद्रीय भूमिका निभाने को तैयार है।