फ्रांस में जून 2026 सबसे गर्म जून दर्ज, हीटवेव में 2,025 अतिरिक्त मौतें — 1947 के बाद सबसे भीषण
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस की मौसम एजेंसी मेटेओ-फ्रांस ने 4 जुलाई 2026 को जारी अपनी मासिक जलवायु रिपोर्ट में पुष्टि की कि जून 2026, वर्ष 1947 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से फ्रांस का सबसे गर्म जून रहा। इस महीने का औसत तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 1991–2020 के दीर्घकालिक औसत से 3.8 डिग्री सेल्सियस अधिक है। देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 22 से 28 जून के बीच हीटवेव के चलते सामान्य से 2,025 अतिरिक्त मौतें हुईं।
रिकॉर्ड तोड़ तापमान और हीटवेव की तीव्रता
17 जून को शुरू हुई हीटवेव ने 22 से 26 जून के बीच पूरे फ्रांस में तापमान को असाधारण स्तर तक पहुँचा दिया। मेटेओ-फ्रांस के अनुसार, 24 और 25 जून फ्रांस के इतिहास में अब तक के सबसे गर्म दिन रहे। 24 जून को पहली बार 1947 के बाद देश का 24 घंटे का राष्ट्रीय थर्मल संकेतक 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा। यह हीटवेव अपनी तीव्रता, लंबाई और व्यापकता तीनों में असाधारण रही और 30 जून तक जारी रही।
जून 2026 ने जून 2003 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया, जब तापमान 1991–2020 के औसत से 3.5 डिग्री सेल्सियस अधिक था। मेटेओ-फ्रांस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार का अंतर 0.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
अलर्ट सिस्टम का अब तक का सबसे बड़ा सक्रियण
मेटेओ-फ्रांस के अनुसार, फ्रांस के कुल 72 विभागों को रेड हीटवेव अलर्ट पर रखा गया — यह 2004 में अलर्ट प्रणाली की स्थापना के बाद से अब तक का सबसे व्यापक सक्रियण है। गौरतलब है कि यह प्रणाली 2003 की भीषण गर्मी के बाद बनाई गई थी, जब फ्रांस में हज़ारों लोगों की जान गई थी।
मौतों का आँकड़ा और सबसे अधिक प्रभावित वर्ग
देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने 4 जुलाई को जारी प्रारंभिक निगरानी डेटा में बताया कि 22 से 28 जून के बीच हीटवेव के दौरान सामान्य से 2,025 अतिरिक्त मौतें हुईं, जो पिछले सप्ताह की तुलना में 29.1 फीसदी अधिक हैं।
उम्र के आधार पर देखें तो 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में मौतों की बढ़ोतरी सर्वाधिक रही — इस आयु वर्ग में 2,001 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले सप्ताह से 29.7 फीसदी अधिक हैं। मृत्यु के स्थान के अनुसार, सबसे चौंकाने वाली बढ़ोतरी घरों में हुई, जहाँ मौतें 91 फीसदी बढ़ीं। नर्सिंग होम में 37 फीसदी और स्वास्थ्य सुविधाओं में 19.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि इलेक्ट्रॉनिक मृत्यु प्रमाणपत्र पर आधारित यह डेटा फिलहाल देश में होने वाली कुल मौतों का लगभग 60 फीसदी ही कवर करता है। अधिकारियों के अनुसार, वास्तविक मृत्यु संख्या इन प्रारंभिक आँकड़ों से अधिक हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप लगातार कई वर्षों से रिकॉर्ड गर्मी का सामना कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि बढ़ रही है। फ्रांस के लिए यह तीसरी बड़ी हीटवेव है — 2003, 2019 और अब 2026 — जिसने मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव डाला है।
आगे आने वाले हफ्तों में स्वास्थ्य एजेंसी के अंतिम आँकड़े और मेटेओ-फ्रांस की विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट जारी होने की उम्मीद है, जो इस हीटवेव के पूर्ण मानवीय और पर्यावरणीय प्रभाव को स्पष्ट करेगी।