9 जुलाई 2026
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गगनयान मिशन को मिला ऑस्ट्रेलियाई सहारा, कोकोस द्वीप पर बनेगा स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल

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गगनयान मिशन को मिला ऑस्ट्रेलियाई सहारा, कोकोस द्वीप पर बनेगा स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल

सारांश

ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर गगनयान के लिए स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल की घोषणा भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक जमीन देती है। मोदी-अल्बनीज की मेलबर्न वार्ता में अंतरिक्ष से लेकर शिक्षा और त्रिपक्षीय तकनीकी साझेदारी तक — यह भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का अब तक का सबसे व्यापक एजेंडा है।

मुख्य बातें

ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में गगनयान के शुरुआती चार मिशनों की निगरानी के लिए अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित होगा।
PM मोदी और PM अल्बनीज ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में अंतरिक्ष, शिक्षा और प्रौद्योगिकी में बड़े समझौतों की घोषणा की।
ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत (ACITI) त्रिपक्षीय तकनीकी साझेदारी के लिए MoU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया।
पिछले वर्ष 1.40 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलिया में अध्ययन किया; फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय सहित 8 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय भारत में परिसर खोलेंगे।
वर्ष 2026 में 41 परियोजनाओं को 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मैत्री ग्रांट्स दी जाएंगी।
खनन क्षेत्र में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया TAFE और भारत के बीच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग बनाने पर सहमति।

भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बड़ी मजबूती मिली है। 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अंतरिक्ष, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई अहम घोषणाएँ कीं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली इन पहलों की संयुक्त रूप से घोषणा की।

गगनयान के लिए ट्रैकिंग टर्मिनल

ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र गगनयान के शुरुआती चार प्रमुख मिशनों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहयोग देगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है और ज़मीनी ट्रैकिंग नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर विस्तार देना उसकी प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री अल्बनीज ने गगनयान में सहयोग को दोनों देशों के मजबूत अंतरिक्ष संबंधों का प्रतीक बताया और कहा कि भारत व ऑस्ट्रेलिया विश्वास पर आधारित साझेदारी के साथ भविष्य की तकनीकों पर मिलकर काम कर रहे हैं।

त्रिपक्षीय तकनीकी साझेदारी

दोनों नेताओं ने ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (ACITI) साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस त्रिपक्षीय पहल के अंतर्गत कनाडा के साथ मिलकर महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। विज्ञान मंत्री टिम एयर्स ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के इस दौर में भारत जैसे समान विचार वाले साझेदारों के साथ विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक में सहयोग दोनों देशों की औद्योगिक क्षमता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा।

शिक्षा और कौशल विकास

वर्तमान में भारत, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। पिछले वर्ष 1.40 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया। ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने कहा कि शिक्षा दोनों देशों के बीच सबसे मजबूत पुल है और अब ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय भारत में ही विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रधानमंत्री अल्बनीज ने फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को भारत में परिसर खोलने की मंजूरी मिलने का स्वागत किया। इसके साथ ही भारत में परिसर स्थापित करने वाले ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के TAFE और भारत के बीच खनन तथा माइनिंग उपकरण, प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग स्थापित करने पर सहमति बनी है।

मैत्री ग्रांट्स और द्विपक्षीय सहयोग

दोनों पक्षों ने मैत्री ग्रांट्स कार्यक्रम की सराहना की। वर्ष 2026 में सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिलेशंस के ज़रिए 41 परियोजनाओं को 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (10 मिलियन डॉलर) की वित्तीय सहायता दी जाएगी। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम आर्थिक, सांस्कृतिक और शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने का माध्यम बनता जा रहा है।

आगे की राह

ऑस्ट्रेलिया में ट्रैकिंग टर्मिनल की स्थापना और ACITI साझेदारी के साथ भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहे — अंतरिक्ष, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में यह साझेदारी दोनों देशों की रणनीतिक निकटता की नई परिभाषा गढ़ रही है। गगनयान मिशन की सफलता के लिए यह वैश्विक नेटवर्क भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की परिपक्वता का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसका ठोस क्रियान्वयन ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। शिक्षा के मोर्चे पर 8 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों का भारत में विस्तार सकारात्मक संकेत है, किंतु गुणवत्ता नियमन और मान्यता की स्पष्ट रूपरेखा के बिना यह संख्या अधूरी कहानी है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑस्ट्रेलिया में गगनयान के लिए कौन सा ट्रैकिंग स्टेशन बनेगा?
ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जो गगनयान के शुरुआती चार प्रमुख मिशनों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहायता करेगा। यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक ट्रैकिंग नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।
ACITI साझेदारी क्या है और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं?
ACITI यानी ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी एक त्रिपक्षीय पहल है, जिसके लिए MoU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया है। इसके तहत तीनों देश महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।
भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा सहयोग में क्या नया हुआ है?
फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को भारत में परिसर खोलने की मंजूरी मिलने के साथ ही भारत में परिसर स्थापित करने वाले ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इसके अलावा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के TAFE और भारत के बीच खनन क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग बनाने पर भी सहमति बनी है।
मैत्री ग्रांट्स कार्यक्रम के तहत 2026 में कितनी सहायता दी जाएगी?
वर्ष 2026 में सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिलेशंस के ज़रिए 41 परियोजनाओं को 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (10 मिलियन डॉलर) की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह ग्रांट आर्थिक, सांस्कृतिक और शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए है।
ऑस्ट्रेलिया में कितने भारतीय छात्र पढ़ते हैं?
भारत, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। पिछले वर्ष 1.40 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया।
राष्ट्र प्रेस
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