3 अक्टूबर 2026
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पीयूष गोयल का शिकागो में ऐलान: भारत है ग्लोबल डेटा सेंटर के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य, 520 GW ग्रिड और सस्ती क्लीन एनर्जी बड़ा आधार

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पीयूष गोयल का शिकागो में ऐलान: भारत है ग्लोबल डेटा सेंटर के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य, 520 GW ग्रिड और सस्ती क्लीन एनर्जी बड़ा आधार

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शिकागो में भारत का नया पिच तैयार किया — सस्ती क्लीन एनर्जी, 520 GW का एकीकृत ग्रिड और अमेरिका से महज 5-8% डेटा लागत। तर्क सीधा है: जहाँ चीन अब 'भरोसेमंद' नहीं, वहाँ भारत सबसे किफायती और सुरक्षित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर डेस्टिनेशन है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 3 अक्टूबर 2026 को शिकागो में भारत को ग्लोबल डेटा सेंटरों के लिए 'दुनिया की सबसे अच्छी जगह' बताया।
भारत का एकीकृत राष्ट्रीय पावर ग्रिड अभी 520 गीगावाट क्षमता का है और 6-7 साल में 1,000 गीगावाट होगा; यह चीन के बाद दुनिका का दूसरा सबसे बड़ा ग्रिड है।
मौजूदा ग्रिड क्षमता का 60% क्लीन एनर्जी (सोलर, विंड, हाइड्रो, न्यूक्लियर) से है; 2033 तक यह 70% होगा।
24 घंटे 80% गारंटीड क्लीन एनर्जी की दर 7-8 सेंट प्रति यूनिट; डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर लागत अमेरिका-यूरोप से एक-चौथाई से एक-पाँचवें हिस्से तक।
भारत में डेटा की लागत अमेरिका के मुकाबले मात्र 5-8% ; हर साल 14 लाख STEM स्नातक।
भारत 2027 की पहली तिमाही में एक बड़ा मल्टी-सेक्टरल बिजनेस डेलिगेशन अमेरिका लाने की योजना बना रहा है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 3 अक्टूबर 2026 को शिकागो में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए भारत को वैश्विक डेटा सेंटरों के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि कम लागत वाली स्वच्छ ऊर्जा, एकीकृत राष्ट्रीय पावर ग्रिड, सस्ता डेटा और 14 लाख STEM स्नातकों का विशाल प्रतिभा-भंडार भारत को इस क्षेत्र में अजेय प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देते हैं। यह संबोधन मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के तुरंत बाद हुआ।

भारत को ग्लोबल डेटा हब क्यों बताया गोयल ने

यूएस इंडियन कम्युनिटी फाउंडेशन के कार्यक्रम में गोयल ने कहा, 'दुनिया के भरोसेमंद देशों में, जहां आप अपने डेटा को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं और मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं, भारत डेटा सेंटर बनाने के लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह है।' उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में भारत की विश्वसनीयता और स्थिरता को प्रमुख तर्क के रूप में पेश किया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियाँ चीन पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की तलाश में हैं।

पावर ग्रिड: चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा

गोयल ने बताया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारत के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर में आमूल बदलाव आया है। पहले देश में कई क्षेत्रीय ग्रिड थे जिनमें बिजली की कमी और अधिकता अलग-अलग हिस्सों में बनी रहती थी। अब इन्हें एकीकृत कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'आज, चीन के बाद, हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा ग्रिड है।' वर्तमान में 520 गीगावाट की स्थापित क्षमता वाले इस एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड को अगले 6-7 वर्षों में 1,000 गीगावाट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।

स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी: 60% क्षमता पहले से क्लीन

मंत्री ने बताया कि 520 गीगावाट की मौजूदा स्थापित क्षमता में से 60 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही क्लीन एनर्जी — जिसमें सोलर, विंड, हाइड्रो और न्यूक्लियर पावर शामिल हैं — से आता है। उन्होंने कहा, '2033 तक, जब हमारी क्षमता 1,000 गीगावाट होगी, तो इस स्थापित क्षमता का 70 प्रतिशत क्लीन एनर्जी से आएगा।' यह डेटा सेंटरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि तकनीकी कंपनियाँ अब 'नेट-ज़ीरो' लक्ष्यों की ओर बढ़ रही हैं और स्वच्छ ऊर्जा-संचालित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

लागत का फायदा: डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा — तीनों सस्ते

गोयल ने कहा कि कंपनियाँ अभी भारत में 7-8 सेंट प्रति यूनिट की दर से 24 घंटे 80 प्रतिशत गारंटीड क्लीन एनर्जी ले सकती हैं, जबकि 100 प्रतिशत क्लीन एनर्जी की कीमत लगभग 11-12 सेंट होगी। उन्होंने कहा, 'दुनिया में कहीं भी आपको इन डेटा पॉइंट्स पर इस स्तर की रिडंडेंसी और क्लीन एनर्जी एक साथ नहीं मिल सकती।' इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारत में डेटा की लागत अमेरिका के मुकाबले 5 से 8 प्रतिशत मात्र है और डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की लागत अमेरिका या यूरोप की तुलना में एक-चौथाई से एक-पाँचवें हिस्से तक हो सकती है।

STEM प्रतिभा और भारत-अमेरिका साझेदारी

गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में हर साल विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में लगभग 14 लाख छात्र स्नातक होते हैं, जो भारत को तकनीकी कार्यबल की दृष्टि से भी एक बेजोड़ गंतव्य बनाता है। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी उद्यमियों और अमेरिकी कंपनियों से उभरती प्रौद्योगिकी और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की अपील करते हुए कहा, 'अमेरिका के पास पूंजी और टेक्नोलॉजी की ताकत है। भारत के पास महत्वाकांक्षा है।' गौरतलब है कि भारत एक बड़े, मल्टी-सेक्टरल बिजनेस डेलिगेशन को संभवतः 2027 की पहली तिमाही में इस क्षेत्र में लाने की योजना बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सस्ती ऊर्जा और विशाल STEM प्रतिभा-भंडार वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हैं। लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या भारत की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, इंटर-मिनिस्ट्रियल मंजूरियाँ और डेटा प्राइवेसी कानून की अनिश्चितता वैश्विक टेक निवेशकों की गति से मेल खा पाएगी। अमेरिकी कंपनियाँ भारत में रुचि दिखाती रही हैं, पर बड़े पैमाने पर प्रतिबद्धता अभी भी सावधानीपूर्वक है। जब तक 'डेटा सेंटर-रेडी' ज़ोन, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और दीर्घकालिक पावर परचेज़ अग्रीमेंट (PPA) की स्पष्ट नीति नहीं आती, तब तक यह पिच आकर्षक भाषण तो है, पर क्रियान्वयन की कसौटी पर खरा उतरना बाकी है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने भारत को ग्लोबल डेटा हब क्यों बताया?
गोयल ने शिकागो में तर्क दिया कि भारत में कम लागत वाली क्लीन एनर्जी, 520 GW का एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड, अमेरिका से 92-95% सस्ता डेटा और 14 लाख STEM स्नातकों का प्रतिभा-भंडार इसे वैश्विक डेटा सेंटरों के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य बनाते हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में भारत की स्थिरता और विश्वसनीयता को उन्होंने अतिरिक्त लाभ बताया।
भारत का पावर ग्रिड कितना बड़ा है और इसकी भविष्य की योजना क्या है?
भारत का एकीकृत राष्ट्रीय पावर ग्रिड अभी 520 गीगावाट क्षमता का है, जो चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा है। अगले 6-7 साल में इसे 1,000 गीगावाट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है, जिसमें 70% क्लीन एनर्जी से आएगा।
भारत में डेटा सेंटर बनाना अमेरिका से कितना सस्ता है?
गोयल के अनुसार भारत में डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की लागत अमेरिका या यूरोप की तुलना में एक-चौथाई से एक-पाँचवें तक हो सकती है। इसके अलावा, डेटा की लागत अमेरिका में उपयोगकर्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत के मात्र 5 से 8 प्रतिशत के बराबर है।
शिकागो यात्रा से पहले गोयल कहाँ थे और क्या किया?
शिकागो से पहले गोयल मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए, जहाँ वैश्विक व्यापार चुनौतियों, विश्व व्यापार संगठन के भविष्य और जबरन श्रम व राज्य-समर्थित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने शिकागो में अमेरिकी व्यवसायों और निवेशकों के साथ कई बैठकें कीं।
भारत अमेरिकी निवेशकों के साथ अगली बड़ी पहल कब करेगा?
गोयल ने बताया कि भारत एक बड़ा, मल्टी-सेक्टरल बिजनेस डेलिगेशन संभवतः 2027 की पहली तिमाही में अमेरिका लाने की योजना बना रहा है, जो तकनीक, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरते क्षेत्रों में निवेश संबंधों को आगे बढ़ाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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