चीनी उपराष्ट्रपति हान चेंग की UN महासचिव पद की उम्मीदवार मिशेल बैचलेट से बीजिंग में मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
चीन के उपराष्ट्रपति हान चेंग ने बुधवार, 3 जून को राजधानी बीजिंग में संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की उम्मीदवार मिशेल बैचलेट से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को सशक्त करने और बहुपक्षवाद को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
हान चेंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया भर के लोगों की स्थायी शांति और साझा समृद्धि की आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने जोड़ा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग की ‘मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय’ की अवधारणा और चार वैश्विक पहलें संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के अनुरूप हैं।
चीन का रुख
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र को केंद्रीय भूमिका निभाने में दृढ़ता से समर्थन देना चाहता है, और अधिक न्यायपूर्ण व समान वैश्विक शासन प्रणाली के निर्माण को बढ़ावा देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में चीन पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों को पूरा करेगा, निष्पक्ष रुख बनाए रखेगा, संयुक्त राष्ट्र के अधिकार की रक्षा करेगा और वैश्विक दक्षिण के साझा हितों की हिफ़ाज़त करेगा।
बैचलेट की प्रतिक्रिया
मिशेल बैचलेट ने प्रशंसा करते हुए कहा कि चीन लंबे समय से बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि चीन ‘शांति, विकास और मानवाधिकार’ — संयुक्त राष्ट्र के तीन स्तंभों — की संतुलित उन्नति का समर्थन करता है, सदस्य देशों के नेतृत्व के सिद्धांत का पालन करता है और सुधारों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की गुणवत्ता व दक्षता में निरंतर सुधार में सहयोग करता है।
क्यों मायने रखती है यह मुलाक़ात
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उत्तराधिकारी की दौड़ अनौपचारिक रूप से गति पकड़ रही है, और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों का समर्थन इस चयन में निर्णायक माना जाता है। चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकीं बैचलेट को वैश्विक दक्षिण का चेहरा माना जा रहा है, और बीजिंग की यह उच्च-स्तरीय आगवानी कूटनीतिक रूप से अहम संकेत मानी जा रही है।
आगे क्या
बैचलेट की उम्मीदवारी पर औपचारिक मतदान की प्रक्रिया आने वाले महीनों में सुरक्षा परिषद के स्तर पर तय होगी। चीन का यह आरंभिक संपर्क संकेत देता है कि P5 देशों के बीच परदे के पीछे की कूटनीति अब तेज़ होने वाली है।