3 अगस्त 2026
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हेगसेथ की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'शर्तें तोड़ीं तो फिर होगा हमला, नाकेबंदी भी लागू होगी'

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हेगसेथ की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'शर्तें तोड़ीं तो फिर होगा हमला, नाकेबंदी भी लागू होगी'

सारांश

शांति समझौते की स्याही सूखी नहीं और अमेरिका ने ईरान को पहले ही अल्टीमेटम दे दिया। हेगसेथ का ब्रसेल्स में बयान साफ संदेश है — अनुपालन नहीं तो हमला तय। साथ ही नाटो सहयोगियों पर 'शर्मनाक' का ठप्पा लगाकर अमेरिका ने अटलांटिक गठबंधन की दरारों को भी उघाड़ दिया।

मुख्य बातें

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 18 जून 2026 को ब्रसेल्स में नाटो बैठक के दौरान ईरान को चेतावनी दी।
हेगसेथ के अनुसार शर्तों का उल्लंघन हुआ तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई और पूर्ण नाकेबंदी लागू कर सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर की चर्चा वैश्विक स्तर पर जारी है, लेकिन शर्तों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं।
हेगसेथ ने नाटो सहयोगियों पर निशाना साधते हुए उनके रवैये को 'शर्मनाक' करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देशों ने हवाई मार्ग और पहुँच देने से इनकार कर अमेरिकी सैनिकों को अनावश्यक जोखिम में डाला।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 18 जून 2026 को ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वह अमेरिका-ईरान शांति समझौते की तय शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी लागू करने से नहीं हिचकेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर की चर्चा वैश्विक स्तर पर तेज़ है।

हेगसेथ की सीधी चेतावनी

अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा साझा की गई एक क्लिप में हेगसेथ ने कहा, 'अगर ईरान अपने समझौते के तहत तय शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है और नाकेबंदी भी दोबारा लागू कर सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ईरान नियमों से विचलित हुआ, तो अमेरिका 'एक सख्त और पूरी तरह लागू होने वाली नाकेबंदी' फिर से लगाने में पूरी तरह सक्षम है।

बैठक के बाद हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा के भीतर यदि ईरान अपने वादों पर खरा नहीं उतरा, तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा।

नाटो सहयोगियों पर निशाना

हेगसेथ ने ईरान संघर्ष के दौरान कई नाटो सदस्य देशों के रवैये पर तीखी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दशकों से यूरोप की रक्षा की है, परंतु हाल के हालात में सहयोगी देशों का व्यवहार 'निराशाजनक' रहा।

उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी लड़ाकू विमान यूरोपीय ठिकानों से उड़ान भरकर और अमेरिकी जहाज बंदरगाहों से निकलकर मध्य पूर्व में उन ईरानी ठिकानों पर हमला करते, जो यूरोपीय हितों के लिए भी खतरा हैं। हेगसेथ ने आरोप लगाया, 'कई सहयोगी देशों ने या तो इस पर सहमति नहीं दी, या फिर इसे जटिल कानूनी बहसों में उलझा दिया, या सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना की — जबकि वे खुद ऐसा करने में सक्षम या तैयार नहीं हैं। यह रवैया शर्मनाक है।'

अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर चिंता

हेगसेथ ने यह भी कहा कि कुछ देशों द्वारा ज़रूरी हवाई मार्ग और पहुँच देने से इनकार करने के कारण अमेरिकी सैनिकों को अनावश्यक जोखिम में डाला जाता है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया पहले से ही सहज होनी चाहिए थी, लेकिन सहयोगियों के असहयोग ने इसे कठिन बना दिया।

क्या होगा आगे

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की शर्तों का सार्वजनिक विवरण अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन हेगसेथ के बयान से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन ने तेहरान को अनुपालन के लिए एक कड़ी समयसीमा दी है। यह बयान नाटो के भीतर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ती खाई को भी उजागर करता है, जो मध्य पूर्व नीति पर लंबे समय से मतभेद रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या गठबंधन को और कमज़ोर करेगी — जो ईरान और रूस दोनों के लिए रणनीतिक लाभ होगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीट हेगसेथ ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
हेगसेथ ने कहा कि यदि ईरान अमेरिका-ईरान शांति समझौते की तय शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है और पूर्ण नाकेबंदी भी लागू कर सकता है। यह चेतावनी 18 जून 2026 को ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान दी गई।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?
समझौते की विस्तृत शर्तें अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई हैं। हेगसेथ के बयान से यह स्पष्ट है कि ईरान के लिए एक तय समयसीमा निर्धारित की गई है, जिसके भीतर उसे अपने वादे पूरे करने होंगे।
हेगसेथ ने नाटो सहयोगियों की आलोचना क्यों की?
हेगसेथ ने आरोप लगाया कि कई नाटो सदस्य देशों ने ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिकी अभियानों के लिए हवाई मार्ग और पहुँच देने से इनकार किया, या अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना की। उन्होंने इस रवैये को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ती है।
क्या अमेरिका वाकई ईरान पर दोबारा हमला कर सकता है?
हेगसेथ के बयान के अनुसार अमेरिका इसके लिए तैयार है, बशर्ते ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करे। हालाँकि यह एक चेतावनी है और अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के हाथ में होगा।
इस घटनाक्रम का मध्य पूर्व पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि ईरान शर्तें पूरी नहीं करता तो क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है। साथ ही नाटो के भीतर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ती दूरी मध्य पूर्व में पश्चिमी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्र प्रेस
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