हेगसेथ की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'शर्तें तोड़ीं तो फिर होगा हमला, नाकेबंदी भी लागू होगी'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 18 जून 2026 को ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वह अमेरिका-ईरान शांति समझौते की तय शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी लागू करने से नहीं हिचकेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर की चर्चा वैश्विक स्तर पर तेज़ है।
हेगसेथ की सीधी चेतावनी
अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा साझा की गई एक क्लिप में हेगसेथ ने कहा, 'अगर ईरान अपने समझौते के तहत तय शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है और नाकेबंदी भी दोबारा लागू कर सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ईरान नियमों से विचलित हुआ, तो अमेरिका 'एक सख्त और पूरी तरह लागू होने वाली नाकेबंदी' फिर से लगाने में पूरी तरह सक्षम है।
बैठक के बाद हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा के भीतर यदि ईरान अपने वादों पर खरा नहीं उतरा, तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा।
नाटो सहयोगियों पर निशाना
हेगसेथ ने ईरान संघर्ष के दौरान कई नाटो सदस्य देशों के रवैये पर तीखी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दशकों से यूरोप की रक्षा की है, परंतु हाल के हालात में सहयोगी देशों का व्यवहार 'निराशाजनक' रहा।
उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी लड़ाकू विमान यूरोपीय ठिकानों से उड़ान भरकर और अमेरिकी जहाज बंदरगाहों से निकलकर मध्य पूर्व में उन ईरानी ठिकानों पर हमला करते, जो यूरोपीय हितों के लिए भी खतरा हैं। हेगसेथ ने आरोप लगाया, 'कई सहयोगी देशों ने या तो इस पर सहमति नहीं दी, या फिर इसे जटिल कानूनी बहसों में उलझा दिया, या सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना की — जबकि वे खुद ऐसा करने में सक्षम या तैयार नहीं हैं। यह रवैया शर्मनाक है।'
अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर चिंता
हेगसेथ ने यह भी कहा कि कुछ देशों द्वारा ज़रूरी हवाई मार्ग और पहुँच देने से इनकार करने के कारण अमेरिकी सैनिकों को अनावश्यक जोखिम में डाला जाता है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया पहले से ही सहज होनी चाहिए थी, लेकिन सहयोगियों के असहयोग ने इसे कठिन बना दिया।
क्या होगा आगे
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की शर्तों का सार्वजनिक विवरण अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन हेगसेथ के बयान से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन ने तेहरान को अनुपालन के लिए एक कड़ी समयसीमा दी है। यह बयान नाटो के भीतर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ती खाई को भी उजागर करता है, जो मध्य पूर्व नीति पर लंबे समय से मतभेद रखते हैं।