पीट हेगसेथ: अमेरिका-चीन रणनीतिक स्थिरता एशिया-प्रशांत और विश्व शांति के लिए अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 31 मई 2025 को सिंगापुर में आयोजित 23वें शांगरी-ला संवाद में स्पष्ट किया कि अमेरिका-चीन संबंधों की नई परिभाषा 'वास्तविक, सारगर्भित और अर्थपूर्ण' है। उन्होंने कहा कि बीजिंग शिखर बैठक में दोनों देशों के नेताओं द्वारा सहमत 'अमेरिका-चीन रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता संबंध' को प्रभावी रूप से लागू करना एशिया-प्रशांत क्षेत्र और विश्व शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शांगरी-ला संवाद में क्या कहा हेगसेथ ने
हेगसेथ ने चीनी जन मुक्ति सेना के विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल के सदस्य एवं चीनी सैन्य विज्ञान अकादमी के शोधकर्ता चाओ वेपिन के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि वे इस विषय पर हुई चर्चाओं में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के नेताओं ने इस संबंध की भविष्य की दिशा और आपसी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है।
हेगसेथ ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं तथा सामर्थ्य को स्वीकार करते हैं। उनका मानना है कि इसी पारस्परिक स्वीकृति के आधार पर दोनों देशों के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
शांगरी-ला संवाद: पृष्ठभूमि और महत्व
गौरतलब है कि 23वाँ शांगरी-ला संवाद शुक्रवार शाम सिंगापुर में शुरू हुआ। यह सम्मेलन एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित रक्षा और सुरक्षा नीति मंच माना जाता है। इस वर्ष के संवाद में 40 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 550 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और सैन्य मोर्चों पर तनाव के बावजूद कूटनीतिक संवाद के नए रास्ते खुलते दिख रहे हैं। बीजिंग शिखर बैठक के बाद से दोनों देशों के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के बीच संपर्क में वृद्धि देखी गई है।
रणनीतिक स्थिरता: क्यों मायने रखती है यह अवधारणा
'रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता' की अवधारणा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है — इसका सीधा असर ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा संरचना पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों महाशक्तियाँ इस ढाँचे को व्यवहार में लागू कर सकीं, तो क्षेत्रीय देशों — जिनमें भारत भी शामिल है — को कूटनीतिक दबाव से कुछ राहत मिल सकती है।
आगे क्या
शांगरी-ला संवाद के दौरान हेगसेथ की अन्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। यह देखना अहम होगा कि बीजिंग शिखर बैठक में तय की गई 'रणनीतिक स्थिरता' की रूपरेखा को व्यावहारिक नीतिगत कदमों में कैसे बदला जाता है।