ह्यूस्टन में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर भव्य सांस्कृतिक समारोह
सारांश
Key Takeaways
- वंदे मातरम का 150 वर्ष का जश्न
- 800 से अधिक लोगों की भागीदारी
- सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन
- भारतीय संगीत की परंपरा का सम्मान
- वाणिज्य दूतावास का सक्रिय योगदान
वॉशिंगटन, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के ह्यूस्टन में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। यह गीत बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया था।
कार्यक्रम का आयोजन ह्यूस्टन के भारतीय शास्त्रीय संगीत केंद्र (सीआईसीएमएच), वल्लभ प्रीति सेवा समाज (वीपीएसएस) और कई इंडो-अमेरिकी सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से हुआ।
इस कार्यक्रम में भारतीय प्रवासी समुदाय और भारत के मित्रों सहित 800 से अधिक लोगों ने भाग लिया। समारोह की शुरुआत मोरया ढोल ताशा पाथक की जीवंत प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे समारोह में उत्साह का संचार किया।
औपचारिक संगीत कार्यक्रम की शुरुआत मेट्रोप्लेक्स तमिल संघम के कलाकारों द्वारा वीणा वादन से हुई, जिसने एक भक्तिमय वातावरण का निर्माण किया।
इसके बाद, राजराजेश्वरी भट्ट की एक शिष्या ने कर्नाटक शास्त्रीय शैली में वंदे मातरम की प्रस्तुति दी, जो दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अद्भुत उदाहरण था।
सुमन घोष के विद्यार्थियों ने मराठी देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिसमें प्रसिद्ध देशभक्ति कविता "सागर प्राण तलमला" भी शामिल थी, जिसे विनायक दामोदर सावरकर ने लिखा था।
कार्यक्रम का अगला हिस्सा बंगाल की संगीत परंपरा की ओर बढ़ा, जहाँ ह्यूस्टन की टैगोर सोसायटी के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं जो उस क्षेत्र की साहित्यिक और संगीत धरोहर को दर्शाती हैं।
शाम का समापन सीआईसीएमएच के कलाकारों द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति से हुआ, जो पंडित सुमन घोष के मार्गदर्शन में हुई। कार्यक्रम का अंत देश राग में वंदे मातरम की प्रस्तुति के साथ हुआ।
पूरे कार्यक्रम का संचालन शशिकला घोष ने किया, जिन्होंने दर्शकों को विभिन्न संगीत परंपराओं से परिचित कराया।
अपने उद्घाटन भाषण में डीसी मंजूनाथ ने भाग लेने वाले संगठनों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और सामुदायिक नेताओं का धन्यवाद किया और वंदे मातरम की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम स्थल पर वंदे मातरम पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें इस गीत के इतिहास और भारत की राष्ट्रीय चेतना में उसके स्थान को दर्शाया गया।
इसके अतिरिक्त, वाणिज्य दूतावास ने एक काउंसलर सूचना डेस्क भी स्थापित किया, जहाँ अधिकारियों ने विभिन्न काउंसलर सेवाओं की जानकारी दी और भारतीय प्रवासी समुदाय के लोगों से बातचीत की।
वाणिज्य दूतावास ने कार्यक्रम के समर्थन के लिए आयोजकों और सभी सहभागी संगठनों व कलाकारों का आभार व्यक्त किया।