इमरान खान की कैद के 1,000 दिन: पीटीआई ने हिरासत को बताया राजनीतिक बदला, तत्काल रिहाई की माँग
सारांश
Key Takeaways
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 3 मई 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत के 1,000 दिन पूरे होने पर कड़ी निंदा करते हुए इसे "साफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई" करार दिया और उनकी तत्काल रिहाई की माँग की। पार्टी का कहना है कि इस हिरासत का कोई संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं है।
पीटीआई का आरोप: राजनीतिक दमन
गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, PTI के केंद्रीय सूचना सचिव वकास अकरम ने बयान में कहा कि पीटीआई संस्थापक इमरान खान को उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्र सोच के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार उन्हें जानबूझकर साइडलाइन करने की कोशिश कर रही है।
अकरम ने यह भी कहा कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उनके अनुसार, इमरान खान को एकांत कारावास में रखा गया है और परिवार, वकीलों तथा पार्टी नेतृत्व को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा — जो कि बुनियादी मानव और कानूनी अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
अदालत में सुनवाई और स्वास्थ्य की चिंता
गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट में इमरान खान और बुशरा बीबी के 190 मिलियन पाउंड वाले मामले में अपील और सजा निलंबन की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने एकांत कारावास और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएँ उठाईं, जिसके बाद अदालत ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया।
इमरान खान की ओर से बैरिस्टर सलमान सफदर पेश हुए, जबकि नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) की तरफ से जावेद अशरफ और रफी मकसूद ने पक्ष रखा। सलमान सफदर ने बताया कि उन्होंने 8 अप्रैल को इमरान खान से मुलाकात की थी, लेकिन स्पष्ट आदेश होने के बावजूद उन्हें बुशरा बीबी से मिलने नहीं दिया गया।
सफदर ने इमरान खान की सेहत से जुड़ी गंभीर बातें भी उठाईं और बताया कि उनकी आँखों की रोशनी 85 प्रतिशत तक कम हो चुकी है और उन्हें एक आँख से भी ठीक से दिखाई नहीं देता।
संयुक्त राष्ट्र मंच पर बेटे की आवाज़
इससे पहले मार्च में इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपने पिता की हिरासत को "मनमाना" बताते हुए पाकिस्तान सरकार से उनके साथ हो रहे व्यवहार पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का उल्लंघन है।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान कासिम खान ने कहा कि इमरान खान का मामला कोई अलग घटना नहीं, बल्कि 2022 के बाद पाकिस्तान में दमन की एक बड़ी लहर का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने राजनीतिक कैदियों की गिरफ्तारी, सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमे और पत्रकारों को "चुप कराने, अगवा करने या देश छोड़ने पर मजबूर करने" जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, कासिम खान ने यह भी कहा कि इमरान खान को एकांत में रखा गया है, परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा और इलाज भी नहीं मिल रहा। उन्होंने फरवरी 2024 के आम चुनावों में धाँधली के आरोपों का भी उल्लेख किया।
कासिम खान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने GSP-प्लस ढाँचे के तहत कई मानवाधिकार समझौतों का पालन करने का वादा किया है, जिनमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का अंतरराष्ट्रीय समझौता और यातना के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन शामिल हैं।
परिवार की पीड़ा: कासिम का भावुक बयान
कासिम खान ने कहा, "मैं और मेरा भाई कोई राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम कभी भी ऐसे मंचों पर आना नहीं चाहते थे। लेकिन मेरे पिता की हालत ने हमें मजबूर कर दिया है। हम चुप नहीं रह सकते जब उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें हमसे दूर रखा जा रहा है।" यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की बढ़ती आलोचना का हिस्सा बन गया है।
आगे क्या होगा
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया है, लेकिन PTI की ओर से अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं। गौरतलब है कि GSP-प्लस के तहत यूरोपीय संघ भी पाकिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति पर नज़र रखता है, जो इस मामले को कूटनीतिक रूप से भी संवेदनशील बनाता है।