इमरान खान की बहनों को अदियाला जेल में मुलाकात से फिर रोका, IHC आदेश की अवमानना जारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों को 16 सितंबर 2026 को एक बार फिर रावलपिंडी की अदियाला जेल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। यह घटना तब सामने आई जब इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) पहले ही परिवार के सदस्यों और वकीलों को नियमित मुलाकात का अधिकार देने का आदेश जारी कर चुका है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, जेल प्रशासन द्वारा न्यायालय के फरमान को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
मुलाकात से इनकार का ताज़ा घटनाक्रम
इमरान खान के वकील अवैस यूनस चौधरी ने बताया कि खान की बहनें और छह वकील मंगलवार को जेल पहुँचे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। 'डॉन' अखबार के हवाले से चौधरी ने कहा, 'बहनें शाम 6:30 बजे के बाद भी वहाँ इंतज़ार करती रहीं, लेकिन मुलाकात की मंजूरी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि IHC ने आदेश दिया है कि परिवार और वकीलों के साथ मंगलवार को तथा पार्टी नेताओं के साथ गुरुवार को मुलाकात कराई जाए — लेकिन इन आदेशों का उल्लंघन बदस्तूर जारी है।
अलीमा खान की तीखी प्रतिक्रिया
मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान की बहन अलीमा खान ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से अदालतें इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'अगर अदालतों से न्याय नहीं मिलेगा, तो लोग सड़कों पर नहीं उतरेंगे तो क्या करेंगे? यह सिर्फ इमरान खान की बात नहीं है — इसका असर पाकिस्तान के हर नागरिक पर पड़ेगा।' अलीमा खान के अनुसार, जज सरफराज डोगर 20 महीनों से अल-कादिर मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहे, और तोशाखाना मामले में भी नौ महीनों से कोई सुनवाई नहीं हुई।
उज्मा खान की अवमानना याचिका
3 सितंबर को इमरान खान की दूसरी बहन उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की दूसरी याचिका दायर की। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अदियाला जेल के सुपरिटेंडेंट साजिद बेग, पंजाब के जेल महानिरीक्षक मियाँ सालिक जलाल, गृह मंत्रालय के सचिव अहमद सरवर रजा और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के मुख्य आयुक्त सोहेल अशरफ को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश — जिसमें इमरान खान को बहनों से साप्ताहिक मुलाकात और बेटों कासिम खान व सुलेमान खान से सप्ताह में दो बार फोन पर बात करने की अनुमति दी गई थी — को लागू नहीं किया गया।
18 अगस्त के आदेश की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को जाँच और इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और परिवार से मिलने देने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद अधिकारियों ने 21 अगस्त को उन्हें पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले गए और डॉक्टरों के 'मेडिकली फिट' घोषित करने के बाद वापस अदियाला जेल भेज दिया। यह ऐसे समय में आया है जब संवैधानिक अदालत के गठन पर भी विवाद गहरा है — अलीमा खान ने आरोप लगाया कि इसे 'असंवैधानिक तरीके से' बनाया गया और इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट को कमज़ोर करना है।
आगे क्या होगा
उज्मा खान की याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह मुलाकात और फोन-वार्ता संबंधी आदेश को तत्काल लागू कराने के लिए ठोस कदम उठाए। यह देखना होगा कि अदालत इस बार जेल प्रशासन की अवज्ञा पर कितनी सख्ती दिखाती है, और क्या प्रतिवादी अधिकारियों को कोई जवाबदेही तय की जाती है।