16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इमरान खान की बहनों को अदियाला जेल में मुलाकात से फिर रोका, IHC आदेश की अवमानना जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इमरान खान की बहनों को अदियाला जेल में मुलाकात से फिर रोका, IHC आदेश की अवमानना जारी

सारांश

IHC के स्पष्ट आदेश के बावजूद पाकिस्तान का जेल प्रशासन इमरान खान की बहनों को बार-बार मुलाकात से रोक रहा है। शाम 6:30 बजे के बाद भी इंतज़ार करने पर भी कोई अनुमति नहीं मिली। अब सुप्रीम कोर्ट में दूसरी अवमानना याचिका दाखिल हो चुकी है, जिसमें PM शहबाज शरीफ समेत कई अधिकारी प्रतिवादी हैं।

मुख्य बातें

इमरान खान की बहनों और छह वकीलों को 16 सितंबर 2026 को अदियाला जेल में मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई।
इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) ने परिवार को मंगलवार और पार्टी नेताओं को गुरुवार को मुलाकात का आदेश दे रखा है, जिसका उल्लंघन हो रहा है।
उज्मा खान ने 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में दूसरी अवमानना याचिका दायर की; PM शहबाज शरीफ समेत पाँच वरिष्ठ अधिकारी प्रतिवादी हैं।
18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट आदेश — बहनों से साप्ताहिक मुलाकात और बेटों कासिम व सुलेमान से सप्ताह में दो बार फोन-वार्ता — को लागू नहीं किया गया।
अलीमा खान के अनुसार, अल-कादिर मामले में 20 महीनों और तोशाखाना मामले में 9 महीनों से जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हुई।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों को 16 सितंबर 2026 को एक बार फिर रावलपिंडी की अदियाला जेल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। यह घटना तब सामने आई जब इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) पहले ही परिवार के सदस्यों और वकीलों को नियमित मुलाकात का अधिकार देने का आदेश जारी कर चुका है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, जेल प्रशासन द्वारा न्यायालय के फरमान को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

मुलाकात से इनकार का ताज़ा घटनाक्रम

इमरान खान के वकील अवैस यूनस चौधरी ने बताया कि खान की बहनें और छह वकील मंगलवार को जेल पहुँचे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। 'डॉन' अखबार के हवाले से चौधरी ने कहा, 'बहनें शाम 6:30 बजे के बाद भी वहाँ इंतज़ार करती रहीं, लेकिन मुलाकात की मंजूरी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि IHC ने आदेश दिया है कि परिवार और वकीलों के साथ मंगलवार को तथा पार्टी नेताओं के साथ गुरुवार को मुलाकात कराई जाए — लेकिन इन आदेशों का उल्लंघन बदस्तूर जारी है।

अलीमा खान की तीखी प्रतिक्रिया

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान की बहन अलीमा खान ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से अदालतें इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'अगर अदालतों से न्याय नहीं मिलेगा, तो लोग सड़कों पर नहीं उतरेंगे तो क्या करेंगे? यह सिर्फ इमरान खान की बात नहीं है — इसका असर पाकिस्तान के हर नागरिक पर पड़ेगा।' अलीमा खान के अनुसार, जज सरफराज डोगर 20 महीनों से अल-कादिर मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहे, और तोशाखाना मामले में भी नौ महीनों से कोई सुनवाई नहीं हुई।

उज्मा खान की अवमानना याचिका

3 सितंबर को इमरान खान की दूसरी बहन उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की दूसरी याचिका दायर की। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अदियाला जेल के सुपरिटेंडेंट साजिद बेग, पंजाब के जेल महानिरीक्षक मियाँ सालिक जलाल, गृह मंत्रालय के सचिव अहमद सरवर रजा और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के मुख्य आयुक्त सोहेल अशरफ को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश — जिसमें इमरान खान को बहनों से साप्ताहिक मुलाकात और बेटों कासिम खानसुलेमान खान से सप्ताह में दो बार फोन पर बात करने की अनुमति दी गई थी — को लागू नहीं किया गया।

18 अगस्त के आदेश की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को जाँच और इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और परिवार से मिलने देने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद अधिकारियों ने 21 अगस्त को उन्हें पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले गए और डॉक्टरों के 'मेडिकली फिट' घोषित करने के बाद वापस अदियाला जेल भेज दिया। यह ऐसे समय में आया है जब संवैधानिक अदालत के गठन पर भी विवाद गहरा है — अलीमा खान ने आरोप लगाया कि इसे 'असंवैधानिक तरीके से' बनाया गया और इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट को कमज़ोर करना है।

आगे क्या होगा

उज्मा खान की याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह मुलाकात और फोन-वार्ता संबंधी आदेश को तत्काल लागू कराने के लिए ठोस कदम उठाए। यह देखना होगा कि अदालत इस बार जेल प्रशासन की अवज्ञा पर कितनी सख्ती दिखाती है, और क्या प्रतिवादी अधिकारियों को कोई जवाबदेही तय की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बताता है कि अदालती आदेशों को लागू कराने का कोई प्रभावशाली तंत्र फिलहाल काम नहीं कर रहा। PM शहबाज शरीफ का प्रतिवादी के रूप में नामित होना सीधे राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठाता है, जिसे मुख्यधारा की रिपोर्टिंग अक्सर तकनीकी-कानूनी ब्यौरों के पीछे दबा देती है। अगर अदालत इस बार भी केवल आदेश दोहराने पर सीमित रहती है, तो पाकिस्तान के संवैधानिक ढाँचे की विश्वसनीयता पर वैश्विक स्तर पर और गंभीर प्रश्न उठेंगे।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान खान की बहनों को जेल में मुलाकात से क्यों रोका गया?
जेल प्रशासन ने IHC के स्पष्ट आदेश के बावजूद बहनों और वकीलों को अदियाला जेल में प्रवेश नहीं दिया। वकील अवैस यूनस चौधरी के अनुसार, शाम 6:30 बजे के बाद भी इंतज़ार के बावजूद कोई अनुमति नहीं दी गई और कोई कारण भी नहीं बताया गया।
IHC ने इमरान खान की मुलाकात के बारे में क्या आदेश दिया था?
इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि इमरान खान के परिवार और वकीलों के साथ मंगलवार को और पार्टी नेताओं के साथ गुरुवार को मुलाकात कराई जाए। इसके अतिरिक्त, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात करने और बहनों से साप्ताहिक मिलने की अनुमति दी थी।
उज्मा खान की अवमानना याचिका में किन्हें प्रतिवादी बनाया गया है?
3 सितंबर को दाखिल याचिका में PM शहबाज शरीफ, अदियाला जेल के सुपरिटेंडेंट साजिद बेग, पंजाब के जेल महानिरीक्षक मियाँ सालिक जलाल, गृह मंत्रालय के सचिव अहमद सरवर रजा और ICT के मुख्य आयुक्त सोहेल अशरफ को प्रतिवादी बनाया गया है। यह उसी 18 अगस्त के आदेश को लागू न करने पर दूसरी अवमानना याचिका है।
18 अगस्त का सुप्रीम कोर्ट आदेश क्या था और उसे कैसे नज़रअंदाज़ किया गया?
18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और परिवार से मिलाने का आदेश दिया था। अधिकारियों ने 21 अगस्त को उन्हें PIMS ले जाकर 'मेडिकली फिट' घोषित कराया और वापस जेल भेज दिया — शिफा हॉस्पिटल कभी नहीं भेजा गया।
अलीमा खान ने न्यायपालिका पर क्या आरोप लगाए?
अलीमा खान ने आरोप लगाया कि अदालतें ऊपर से आदेश मिलने के बाद फैसले सुना रही हैं और अल-कादिर मामले में 20 महीनों से तथा तोशाखाना मामले में 9 महीनों से जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक अदालत का गठन असंवैधानिक तरीके से हुआ और इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट को कमज़ोर करना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले