इमरान खान की बहन उज्मा ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में फिर दायर की याचिका, जल्द सुनवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन उज्मा खान ने 27 अगस्त 2026 को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की, जिसमें अदालत की अवमानना मामले पर तत्काल सुनवाई की माँग की गई है। यह याचिका 18 अगस्त के उस आदेश के उल्लंघन को लेकर दाखिल हुई है, जिसमें अदालत ने अधिकारियों को इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
मामले का पृष्ठभूमि
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए और उनके परिवार को साप्ताहिक मुलाकात की सुविधा दी जाए। उज्मा खान का आरोप है कि इस आदेश का पालन जानबूझकर नहीं किया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया।
उज्मा की याचिका में मुख्य दलीलें
याचिका में उज्मा खान ने तर्क दिया है कि अदालत के आदेशों की लगातार अनदेखी इमरान खान के मौलिक अधिकारों — जीवन, स्वास्थ्य और शारीरिक सुरक्षा — का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जेल में इमरान खान की सेहत लगातार बिगड़ रही है और यह स्थिति अत्यंत गंभीर है।
उन्होंने अदालत से माँग की कि अवमानना याचिका पर सुनवाई इसी सप्ताह या अगले सप्ताह के भीतर सुनिश्चित की जाए। गौरतलब है कि 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने तत्काल सुनवाई की उनकी पहली माँग खारिज कर दी थी, जिसके बाद यह नई याचिका दाखिल की गई। अदालत ने अवमानना याचिका की सुनवाई 16 सितंबर के लिए निर्धारित की है।
इमरान खान की हिरासत और राजनीतिक संदर्भ
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का दावा है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए सत्ता से हटाए जाने के बाद से उन पर राज्य उपहार और कथित अवैध विवाह सहित कई मामलों में कार्रवाई हुई है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत ऐलिस जिल एडवर्ड्स ने इमरान खान की हिरासत की परिस्थितियों और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा न मिलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने पाकिस्तान से अपील की थी कि इमरान खान को मानवीय परिस्थितियाँ और अपनी पसंद के डॉक्टर से इलाज की अनुमति दी जाए।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वह उज्मा खान की तत्काल सुनवाई की माँग स्वीकार करता है या 16 सितंबर की निर्धारित तारीख पर ही सुनवाई होती है। यह मामला पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यपालिका के अनुपालन के व्यापक सवालों से जुड़ा हुआ है।