इमरान खान की बहनों को अदियाला जेल में मुलाकात से रोका, अदालती आदेशों की अनदेखी जारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों को 2 सितंबर 2025 को एक बार फिर रावलपिंडी की अदियाला जेल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई — और यह तब हुआ जब इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) ने एक दिन पहले ही जेल अधिकारियों को जेल मैनुअल के अनुसार चलने का स्पष्ट निर्देश दिया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खान की पत्नी बुशरा बीबी से भी उनका परिवार नहीं मिल सका।
मुलाकात से रोके जाने का घटनाक्रम
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के वकील एडवोकेट अवैस यूनुस चौधरी ने बताया कि इमरान खान की तीन बहनें मंगलवार को दोपहर 2 बजे से शाम 6:30 बजे तक अदियाला जेल के बाहर मुलाकात का इंतजार करती रहीं। इसके बावजूद जेल अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी। PTI ने इस कदम को सर्वोच्च न्यायालय और इस्लामाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का सीधा उल्लंघन करार दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उनकी अनदेखी
18 अगस्त को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाए और परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने दिया जाए। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने 21 अगस्त को उन्हें पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले गए — शिफा हॉस्पिटल नहीं — और डॉक्टरों के 'मेडिकली फिट' बताने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया। इस प्रकार अदालत के आदेश का पालन केवल आंशिक रूप से हुआ।
PTI की प्रतिक्रिया और कानूनी मोर्चा
PTI ने जेल प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उच्च न्यायपालिका के आदेशों को नजरअंदाज करना 'बेहद गंभीर' मामला है। पार्टी ने संबंधित अधिकारियों से माँग की कि इमरान खान और बुशरा बीबी को कानून के अनुसार परिवार से मिलने का अधिकार दिया जाए। गौरतलब है कि सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने इमरान खान की बहन की वह अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें 18 अगस्त के आदेश को लागू न करने पर दायर अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की माँग की गई थी।
इमरान खान की कैद का पृष्ठभूमि
इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद उन पर भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में सजा सुनाई गई है। PTI कथित तौर पर इन सभी मामलों को राजनीति से प्रेरित बताती आई है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा
PTI ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को अदालत में फिर से उठाएगी। अदालती आदेशों की बार-बार अनदेखी को देखते हुए कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अवमानना की कार्यवाही तेज हो सकती है। जेल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।