जिया उर रहमान की 45वीं पुण्यतिथि पर भारतीय उच्चायोग की श्रद्धांजलि, भारत-बांग्लादेश साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने 30 मई 2026 को बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान बीर उत्तम की 45वीं पुण्यतिथि पर उन्हें औपचारिक श्रद्धांजलि अर्पित की और मार्च 1971 के उनके ऐतिहासिक रेडियो संबोधन को याद किया। उच्चायोग ने कहा कि उस भाषण ने जनता में प्रतिरोध की भावना जगाई, जो अंततः बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का आधार बनी।
उच्चायोग का संदेश
ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "आज जब बांग्लादेश अपने देश के महान सपूतों में से एक पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान बीर उत्तम को याद कर रहा है, तो हमें ऐतिहासिक मार्च 1971 के रेडियो संबोधन का स्मरण हो रहा है। उस भाषण ने जनता में गजब का जोश भर दिया था, उन्हें अत्याचारियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने को प्रेरित किया, जिससे अंततः स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।"
मिशन ने आगे कहा, "आज भारत बांग्लादेश के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार है। हम लोगों ने साझा बलिदान दिया है और अपने देश को प्रगति मार्ग पर प्रशस्त करने को हमेशा तैयार हैं।"
पुण्यतिथि समारोह और राजनीतिक भागीदारी
इस अवसर पर ढाका के जिया उद्यान में हजारों लोग एकत्रित हुए, जिनमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। जिया उर रहमान के पुत्र एवं पार्टी प्रमुख तारिक रहमान ने भी अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
गौरतलब है कि 30 मई 1981 को चटगांव सर्किट हाउस में जिया उर रहमान की हत्या कर दी गई थी। कथित तौर पर सेना के कुछ असंतुष्ट अधिकारियों ने इस हत्या की योजना बनाई थी।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
यह श्रद्धांजलि ऐसे समय में आई है जब भारत ने हाल के महीनों में बांग्लादेश के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान और बांग्लादेश की जनता को शुभकामनाएँ देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने की इच्छा व्यक्त की थी।
दोनों देशों ने साझा सांस्कृतिक विरासत, परस्पर सम्मान और विकास-आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में नई पहलें हो रही हैं।
जिया उर रहमान की ऐतिहासिक विरासत
जिया उर रहमान बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के प्रमुख नायकों में से एक माने जाते हैं। मार्च 1971 में उनके रेडियो संबोधन को बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा के संदर्भ में ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है। उन्होंने बाद में देश के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया और बीएनपी की स्थापना की।
भारत-बांग्लादेश के बीच यह कूटनीतिक संवाद आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।