18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत ने नेपाल और बांग्लादेश को भेजा न्योता, दक्षिण एशियाई संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
भारत नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में है, और इस क्रम में पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश को समूह के आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह निमंत्रण केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है — बल्कि यह दक्षिण एशिया में उथल-पुथल के बाद के दौर में द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने का एक सुविचारित प्रयास है।
आमंत्रण का कूटनीतिक संदर्भ
ब्रिक्स की परंपरा रही है कि शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय समूहों के अध्यक्षों को आमंत्रित किया जाता है। बांग्लादेश इस समय बिम्सटेक (BIMSTEC) का अध्यक्ष है, जिसका नेपाल भी सदस्य है। रिपोर्टों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य 'ग्लोबल साउथ' के साथ दक्षिण एशिया की सामूहिक भागीदारी को और सुदृढ़ करना है। साथ ही, यह तीनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक नया अध्याय खोलने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
वैश्विक अव्यवस्था के बीच भारत की भूमिका
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय संबंध गहरे संकट में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक व्यवस्था पर 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली नीति हावी है और साझा नियम कमज़ोर पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत, ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में, अपनी थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' के तहत शांतिपूर्ण बहुपक्षीय सहयोग की वकालत कर रहा है। गौरतलब है कि भारत वैश्विक शांति और सहयोग के मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
नेपाल और बांग्लादेश के साथ संबंधों की जटिलता
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पड़ोसी देश भारत के सामने अलग-अलग चुनौतियाँ पेश करते हैं। नेपाल में एक नई और मात्र पाँच वर्ष पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व में सरकार है, जबकि बांग्लादेश में ऐसी पार्टी सत्ता में है जिसके साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध कथित तौर पर ठंडे रहे हैं। इसके बावजूद, भारत इस कूटनीतिक धुंध को पार करते हुए संबंधों को पुनः पटरी पर लाने के लिए दृढ़ बताया जा रहा है — हालाँकि विश्लेषकों का मानना है कि यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही कठिन।
जयशंकर के नेपाल दौरे की अटकलें
रिपोर्टों के अनुसार, अटकलें हैं कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर नेपाल के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करने हेतु नेपाल का दौरा कर सकते हैं। यदि यह दौरा होता है, तो यह भारत-नेपाल संबंधों में एक सकारात्मक संकेत होगा।
क्षेत्रीय सहयोग का व्यापक लक्ष्य
नेपाल के लिए यह आमंत्रण उसे 'ग्लोबल साउथ' पहलों से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने में सहायक होगा। साथ ही, नई दिल्ली और बीजिंग के एक ही मंच पर उपस्थित रहने से नेपाल की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को भी बल मिलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरी कवायद का व्यापक लक्ष्य 'ग्लोबल साउथ' मिशन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उपमहाद्वीप में क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना है — और इसके लिए तीनों देशों को अपने संबंधों को सावधानी और समझदारी से संभालने की साझा जिम्मेदारी निभानी होगी।