13 अक्टूबर 2026
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अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई की फोन पर बातचीत, भारत-ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर किए विचार साझा

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अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई की फोन पर बातचीत, भारत-ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर किए विचार साझा

सारांश

भारत के NSA अजित डोभाल और ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई के बीच 12 अक्टूबर को हुई फोन वार्ता ब्रिक्स में मोदी-पेजेश्कियन बैठक की सीधी कड़ी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह संपर्क दोनों देशों के उच्च-स्तरीय सुरक्षा संवाद को जीवंत रखने की रणनीति को दर्शाता है।

मुख्य बातें

NSA अजित डोभाल और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव डॉ.
मोहसिन रेजाई के बीच 12 अक्टूबर 2026 को टेलीफोन वार्ता हुई।
दोनों पक्षों ने नवीनतम क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित के मुद्दों पर विचार साझा किए।
यह बातचीत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद हुई प्रगति की कड़ी है।
ईरानी राजदूत मोहम्मद फताली ने पहले बताया था कि राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ब्रिक्स में तय एजेंडे पर अमल के लिए मंत्रालयों को तुरंत निर्देश जारी किए।
जयशंकर ने जुलाई में ईरान के विदेश मंत्री अराघची से बात कर वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव डॉ. मोहसिन रेजाई के बीच सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 की शाम टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें नवीनतम क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और दोनों देशों के आपसी हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की।

बातचीत का विवरण

ईरानी दूतावास ने अपने पोस्ट में कहा, 'ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव डॉ. मोहसिन रेजाई ने आज शाम भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी हितों और नवीनतम क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार साझा किए गए।' यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा तनाव बना हुआ है और भारत की इस क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति बढ़ रही है।

ब्रिक्स बैठक के बाद की कड़ी

यह संपर्क उन खबरों के कुछ दिन बाद आया है जिनमें भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा था कि तेहरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान तय हुए एजेंडे पर गंभीरता से काम कर रहा है। फताली के अनुसार, 'राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने उन चर्चाओं के तुरंत बाद ही संबंधित मंत्रालयों और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं और बैठक के दौरान जिन मामलों पर सहमति बनी थी, उन्हें संबंधित संस्थानों द्वारा गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।'

राजदूत फताली ने यह भी कहा था कि 'भारत-ईरान संबंधों में कई मुद्दे एजेंडे में हैं। समझौतों को सही ढंग से लागू करना और उन्हें व्यावहारिक परिणामों में बदलने के लिए समय और निरंतर फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा था कि 'ईरान विभिन्न क्षेत्रों में भारत के साथ संबंधों को और विकसित और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।'

वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर भारत की चिंता

गौरतलब है कि भारत ने तेहरान के साथ क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर भी अपनी गहरी चिंता जताई है। जुलाई में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की थी। जयशंकर ने उस बातचीत के बाद एक्स पर लिखा था, 'आज शाम ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। क्षेत्र में जारी शत्रुता पर हमारी गहरी चिंताओं से अवगत कराया। पुरजोर आग्रह किया कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमलों से बचा जाए। भारत किसी भी पक्ष द्वारा किए गए ऐसे किसी भी हमले की निंदा करता है।'

भारत-ईरान संबंधों का व्यापक संदर्भ

यह बातचीत भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक सक्रियता की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है। दोनों देश चाबहार बंदरगाह परियोजना, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क जैसे मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिम एशिया में अपने कूटनीतिक और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

आगे की दिशा

डोभाल-रेजाई बातचीत के विस्तृत एजेंडे का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी दूतावास की पुष्टि यह संकेत देती है कि दोनों देश उच्च-स्तरीय सुरक्षा संवाद को निरंतर बनाए रखने के प्रति सजग हैं। अब यह देखना होगा कि ब्रिक्स सम्मेलन में तय हुए समझौतों पर व्यावहारिक प्रगति किस रफ्तार से होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत के ऊर्जा और व्यापार हितों को सीधे प्रभावित कर रही है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि वार्ता के एजेंडे का कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया, जो पारदर्शिता की सीमाएँ उजागर करता है। चाबहार परियोजना से लेकर क्षेत्र में जहाजरानी सुरक्षा तक — भारत की कूटनीति में ईरान एक जटिल साझेदार है और इस संवाद की असली परीक्षा व्यावहारिक परिणामों में होगी, न कि केवल बयानों में।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई की बातचीत क्यों हुई?
ईरानी दूतावास के अनुसार, यह बातचीत दोनों देशों के आपसी हित के मुद्दों और नवीनतम क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार साझा करने के लिए हुई। यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन की बैठक में तय एजेंडे की अनुवर्ती कड़ी भी मानी जा रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत-ईरान के बीच क्या तय हुआ था?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियन की मुलाकात हुई थी, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी। ईरानी राजदूत फताली के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इन मुद्दों पर अमल के लिए संबंधित मंत्रालयों को तुरंत निर्देश जारी किए।
भारत ने ईरान के साथ वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर कब चिंता जताई थी?
जुलाई 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों पर भारत की गहरी चिंता जताई और किसी भी पक्ष द्वारा ऐसे हमलों की निंदा की।
भारत-ईरान सुरक्षा वार्ता का महत्व क्या है?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के ऊर्जा, व्यापार एवं चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक हितों को देखते हुए यह वार्ता महत्वपूर्ण है। उच्च-स्तरीय सुरक्षा संवाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तालमेल बनाए रखने और संभावित जोखिमों पर समय रहते चर्चा करने का अवसर देता है।
क्या भारत-ईरान संबंधों में हाल में कोई व्यावहारिक प्रगति हुई है?
ईरानी राजदूत फताली के अनुसार, ब्रिक्स बैठक के बाद संबंधित संस्थानों द्वारा सहमत मुद्दों को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, विशिष्ट परिणामों का कोई आधिकारिक विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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